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10 लाख का सेटेलाइट रेडियो कॉलर पहने बाघ की मौत के बाद भी वह 48 घंटे तक जंगल में पड़ा रहा, जिसकी वजह से सवाल खड़े हो रहे हैं कि प्रबंधन क्या कर रहा था? वहीं इस मामले की एनटीसीए में शिकायत की गई है, जिस पर डीएफओ को नोटिस भेजा गया है.
सागर: वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बाघ की मौत ने बड़े सवाल खड़े किए हैं. वह भी तब जब टाइगर को 10 लाख की कीमत वाला रेडियो कॉलर पहनाया गया था. उसकी निगरानी के लिए अलग से टीम थी. अब इस मामले में वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट द्वारा शिकायत की गई है. टाइगर रिजर्व में जिस 3 साल के बाघ की मौत हुई है, उसे 28 दिन पहले ही नौरादेही लाया गया था. बताया गया कि दूसरे शक्तिशाली टाइगर से हुई टेरिटोरियल फाइट में जान चली गई. मारा गया बाघ ढाई साल से कान्हा टाइगर रिजर्व में रहकर जंगल के कायदे सीख रहा था. लेकिन दूसरे बाघ से संघर्ष करना नहीं सीख पाया.
डीएफओ को नोटिस, जवाब तलब
इसको लेकर वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे द्वारा प्रमुख सचिव वन, PCCF (Hoff) और NTCA से शिकायत की है इसमें फील्ड स्टाफ से लेकर अधिकारियों तक की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई करने की मांग की है. उनका कहना है की चीता लाए जाने से पहले बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. वहीं, वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे द्वारा की गई शिकायत को पीएससीएफ ने गंभीरता से लिया है. नौरादेही के डीएफओ को नोटिस जारी कर शिकायत के बिंदुओं पर जांच कर तीन दिन में जांच प्रतिवेदन मांगा है.
अलर्ट गया होगा, फिर भी लापरवाही!
अजय दुबे ने आरोप लगाया कि नौरादेही लाए टाइगर को सबसे आधुनिक 10 लाख वाला रेडियो कॉलर पहनाकर जंगल में छोड़ा गया था, जो पल-पल की लोकेशन तो देता ही है, लेकिन जब 8 घंटे तक मूवमेंट नहीं होता तो यह अलर्ट सिग्नल भी भेजता है. यह अलर्ट संबंधित बीट गार्ड, रेंजर एसडीओ और उस कंपनी तक जाता है, जिसका यह रेडियो कॉलर होता है. इसके बाद भी 48 घंटे तक बाघ मृत पड़ा रहा. छह बार अलर्ट सिग्नल आया होगा, इसके बाद भी किसी ने गंभीरता से नहीं लिया. यह न केवल फील्ड स्टाफ की कार्य क्षमता पर सवाल उठाता है, बल्कि मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल की विफलता को दर्शाता है.
ये सवाल भी उठाए
शिकायत में दूसरा सवाल ये कि अगर बाघों में टेरिटरी को लेकर फाइट हुई है तो इनकी गर्जना बहुत तेज होती है. कई किलोमीटर तक आवाज सुनाई देती है. अगर जमीनी स्टाफ सक्रिय होता तो उन्हें उनकी दहाड़ जरूर सुनाई देती. समय रहते मॉनिटरिंग कर रहे होते तो इस घटना को टाला जा सकता था. लेकिन, किसी को दो दिन तक खबर नहीं लगी तो आखिर कर्मचारी और अधिकारी क्या कर रहे थे? जब दो बाघों की लड़ाई होती है एक की मौत हो गई तो दूसरा भी घायल हुआ होगा, वह अब तक कहां है? किस हालत में है? क्या अब दूसरे बाघ इस टाइगर रिजर्व में सुरक्षित हैं?
जब से आया एक जगह बैठा था…
टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश सिंह का कहना है कि टाइगर घात लगाकर हमला करता है, इसलिए उसने सीधा उसके सिर पर अटैक किया जिसकी वजह से दूसरा बाघ हावी रहा. सामने वाले बाघ को तो शायद लड़ने का या खुद को बचाने का मौका भी नहीं मिल पाया होगा. जब टाइगरों में लड़ाई होती है तो वह अपनी एनर्जी फाइट करने में लगाते हैं. आवाज निकालने में नहीं और यह बाघ जब से आया था तो एक से डेढ़ दिन तक एक जगह पर ही बैठा रहता था. 20 दिन में चार बार ऐसा हुआ था, इसके सिग्नल समय-समय पर स्टाफ चेक कर रहा था, लेकिन दो दिन तक एक ही जगह पर मिले, तब शक हुआ और पास गए.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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