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बागेश्वर धाम के विवाह महोत्सव में 300 गरीब कन्याओं का सामूहिक विवाह हुआ. इसमें एक मानसी श्रीवास्तव भी हैं. उनकी कहानी दुखों से भरी हुई है. उनकी मां कैंसर की वजह से इस दुनिया से चली गई. वहीं पिता को अटैक आया. इस वजह से परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा.
Emotional Story: घर में जब बेटी बड़ी हो जाती है, तो माता-पिता उसकी शादी के बारे में चिंता करने लगते हैं. लेकिन जब उस बेटी के माता-पिता ही न हो तो फिर बेटी की शादी बोझ बन जाती है. ऐसी ही कहानी कानपुर की बेटी मानसी श्रीवास्तव की है, जिनके माता और पिता दोनों नहीं है. घर में सिर्फ एक भाई है जो खुद पैसे कमाने के लिए संघर्ष कर रहा है. जब लोकल 18 ने परिवार से बातचीत की, तो बेटी मानसी और बुआ फूट-फूटकर रोने लगती हैं. उन्होंने जो दुःखों का पहाड़ झेला था वह आज इस खुशी के पल में याद आ रहे थे. वह निःशब्द हो चुकी थीं. उनके आंसुओं का सैलाब लगातार बाहर निकल रहा था.कुछ देर बाद वह बातचीत की सामान्य स्थिति में आ पाईं.
मानसी श्रीवास्तव लोकल 18 से बातचीत में बताती हैं कि उन्हें बागेश्वर धाम कन्या विवाह महोत्सव की जानकारी पड़ोस की आंटी से लगी थी. वह बागेश्वर धाम से जुड़ी हैं. इसलिए उन्होंने ही इस कन्या विवाह की जानकारी दी थी. हम तो पहली बार ही आज बागेश्वर धाम आए हैं. मानसी बताती हैं कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह बागेश्वर धाम में आएंगी और यहां उनकी शादी होगी.
मानसी की बुआ राधा बताती हैं कि बागेश्वर धाम में भतीजी की शादी होना किस्मत है. बालाजी बागेश्वर सरकार की कृपा रही कि जिसका कोई नहीं उसके बालाजी सरकार हैं. करन ने बागेश्वर धाम कन्या विवाह महोत्सव में बहन का रजिस्ट्रेशन करा दिया था, जब लिस्ट में नाम आया तो हमारी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. मानसी अभी कॉलेज में पढ़ाई कर रही हैं.
भाई ने कराया रजिस्ट्रेशन
मानसी के भाई करन श्रीवास्तव बताते हैं कि हमें जैसे ही इस कन्या विवाह की जानकारी लगी थी तो मैं ही बागेश्वर धाम आया था और यहां शादी का रजिस्ट्रेशन जमा करने आया था. हमारी मम्मी को कैंसर था वह जनवरी 2024 में शांत हो गई थी. इसके बाद पिता जी को भी अटैक आ गया था. फिर परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट गया.
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