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Mothers Inspiring Story: मध्यप्रदेश के बुरहानपुर की एक महिला की संघर्ष भरी कहानी आज लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है. 2008 के दंगों के दौरान कर्फ्यू में मिलने वाली सिर्फ दो घंटे की छूट में उन्होंने आटा चक्की का काम शुरू किया था. उसी छोटे से काम ने आज उनकी जिंदगी बदल दी और उन्होंने अपने तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाई. आज उनके बच्चे पढ़-लिखकर मल्टीनेशनल कंपनियों में काम कर रहे हैं. महिला की मेहनत और संघर्ष की यह कहानी बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो मुश्किल हालात भी सफलता की राह बना देते हैं.
Burhanpur News: मां की ममता और उसके संघर्ष की कहानियां अक्सर लोगों को प्रेरित करती हैं. बुरहानपुर की रहने वाली संगीता ओपी गुप्ता की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उन्होंने अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए कई मुश्किल हालातों का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी.
आज उनकी मेहनत का नतीजा यह है कि उनके तीनों बच्चे पढ़-लिखकर बड़ी मल्टीनेशनल कंपनियों में काम कर रहे हैं.
कर्फ्यू के दौरान शुरू किया काम
संगीता गुप्ता बताती हैं कि साल 2008 में बुरहानपुर में दंगों के कारण कर्फ्यू लगा हुआ था. उस समय लोगों को सिर्फ दो घंटे की ही छूट मिलती थी. इसी दौरान उन्होंने सोचा कि इस समय का उपयोग किसी काम में किया जाए. उन्होंने उसी दो घंटे की छूट में आटा चक्की चलाने का काम शुरू कर दिया. धीरे-धीरे यह काम बढ़ता गया और उन्हें इसी से आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रही.
बच्चों को पढ़ाना था सबसे बड़ा सपना
संगीता बताती हैं कि उनका सबसे बड़ा सपना अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना था. उन्होंने खुद बीए तक पढ़ाई की थी और चाहती थीं कि उनके बच्चे उनसे भी आगे बढ़ें. उन्होंने लगातार मेहनत करते हुए अपने तीनों बच्चों को पढ़ाया और उनकी पढ़ाई में कभी कोई कमी नहीं आने दी.
तीनों बच्चे बने सफल
आज संगीता गुप्ता के तीनों बच्चे अच्छी नौकरी कर रहे हैं. उनकी बड़ी बेटी प्रियंका गुप्ता ने एमबीए की पढ़ाई पूरी की और अब एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रही हैं. दूसरी बेटी अंकिता गुप्ता ने कंपनी सेक्रेटरी की पढ़ाई की है और एलएलबी के बाद सीए भी बनी हैं. वहीं उनका बेटा अभिषेक गुप्ता सॉफ्टवेयर इंजीनियर बन चुका है. संगीता कहती हैं कि आज उनके बच्चों की सफलता देखकर उन्हें अपनी मेहनत का फल मिल गया है.
सास से मिली थी प्रेरणा
संगीता बताती हैं कि आटा चक्की चलाने की प्रेरणा उन्हें अपनी सास शिवकली बाई गुप्ता से मिली थी. उनकी सास ने साल 1968 में इस काम की शुरुआत की थी. उन्हीं को देखकर संगीता ने भी इस काम को आगे बढ़ाया. आज वह सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक चक्की चलाती हैं.
मेहनत से हर साल लाखों की कमाई
बुरहानपुर के अनाज बाजार में उनकी आटा चक्की है, जहां लोग गेहूं, चावल और दाल पीसाने के लिए आते हैं. इस काम से वह हर साल करीब 4 से 5 लाख रुपये तक की कमाई कर लेती हैं. इस काम में उनके पति ओपी गुप्ता भी समय-समय पर उनका सहयोग करते हैं.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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