कई परीक्षाओं में फेल…नहीं हारी हिम्मत, अब किसान का बेटा बना सब-इंस्पेक्टर

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Sagar News: चक्रेश लोधी के पिता गांव में खेतीबाड़ी करते हैं और मां गृहिणी हैं. उनका एक छोटा भाई भी है और वह भी सरकारी नौकरी की तैयारी में जुटा है.

सागर. मध्य प्रदेश के सागर के एक किसान के बेटे का रेलवे पुलिस में बतौर सब-इंस्पेक्टर चयन हुआ है. वह पिछले पांच साल से एग्जाम की तैयारी कर रहा था. इस दौरान उसने एमपीपीएससी पटवारी मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल की तैयारी की लेकिन किसी न किसी वजह से उसमें पीछे रह गया. उसने हिम्मत नहीं हारी और मेहनत करता रहा और अब रेलवे पुलिस में सलेक्शन से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है. युवक का नाम चक्रेश लोधी है. चक्रेश ने लोकल 18 से बात करते हुए कहा कि रेलवे में सब-इंस्पेक्टर की कुल 450 वैकेंसी पूरे देश में निकली थीं, जिसमें से एक पद पर उनका सलेक्शन हुआ है. वह अगले महीने ट्रेनिंग पर जाएंगे.

चक्रेश के पिता गांव में खेती करते हैं और उनकी मां गृहिणी हैं. चक्रेश का एक छोटा भाई भी है और वह भी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा है. सागर से 70 किलोमीटर दूर देवरी मछरिया गांव के रहने वाले चक्रेश लोधी बताते हैं कि उन्होंने साल 2019 में एमपीपीएससी की परीक्षा देनी शुरू की थी. वह डिप्टी कलेक्टर बनना चाह रहे थे लेकिन तैयारी के दौरान ही कोरोना आ गया और लॉकडाउन लग गया. तब वह अपने घर वापस लौट आए. इस दौरान वह तैयारी करते रहे. इंदौर लौटे तो फिर लॉकडाउन लग गया और इस बार वायरस का अटैक बहुत खतरनाक था. फिर घर आए, तो घरवालों ने जाने से मना कर दिया. इसी दौरान पटवारी की भर्ती निकली, तो एमपीपीएससी से उनका फोकस पटवारी की परीक्षा पर हो गया. पेपर दिया लेकिन कुछ नंबर से पीछे रह गए, तो मन हताश हुआ लेकिन हिम्मत नहीं हारी.

कांस्टेबल भर्ती की तैयारी की लेकिन…
उन्होंने बताया कि सागर आकर उन्होंने कांस्टेबल की तैयारी शुरू कर दी. इसमें फिजिकल की वजह से पीछे रह गए. जिंदगी में संघर्ष बढ़ता जा रहा था और सफलता मिल नहीं रही थी. तब उन्हें यहां पर संचालित होने वाली पटेल अकादमी के बारे में जानकारी मिली, जिसे उन्होंने जॉइन किया. यहां राहुल पटेल से मुलाकात हुई, जिन्होंने मेरी फिजिकल की तैयारी करवाई और रिटन के लिए भी मोटिवेट किया. इसी वजह से आज रेलवे में सलेक्शन हो पाया है.

डेढ़ साल तक रहा ये रूटीन
चक्रेश लोधी आगे बताते हैं कि तैयारी करते समय उन्होंने कुछ चीजों को फॉलो किया था. वह रोजाना सुबह 4:30 बजे उठते थे. सुबह 5 बजे ग्राउंड पर पहुंच जाते थे और 8 बजे तक मेहनत करते थे. इसके बाद अपने रूम पर लौटते थे और दो घंटे में खाना-पीना सब कुछ करके 10 बजे टिफिन लेकर लाइब्रेरी पहुंच जाते थे. वहां पर वह रात 8 बजे तक रुकते थे. उन्होंने डेढ़ साल तक यही रूटीन फॉलो किया. जिसके बाद अब सफलता मिली है. उन्होंने कहा कि अगर कोई युवक किसी भी एग्जाम की तैयारी कर रहा है, तो उसे अपने लक्ष्य पर फोकस करना पड़ेगा. मेहनत करनी पड़ेगी. तब जाकर ही सफलता मिलेगी.

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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