5 देसी चीजों से बनी खाद के आगे डीएपी, यूरिया, NPK फेल! सोना उगलेगा खेत, बंपर होगा उत्पादन, खर्च भी कम

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Agriculture Tips: कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह ने बताया कि किसानों को अब रासायनिक खादों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए. इसके बजाय उन्हें अपने खेतों में हर 15 से 20 दिन में देसी खाद या जीवामृत का उपयोग शुरू करना चाहिए.

Agriculture Tips: मध्य प्रदेश के खरगोन में किसान रबी फसलों की बुवाई कार्य में जुट गए हैं. सीजन में गेहूं, चना, मक्का की मुख्य रूप से खेती होती है. वहीं, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि, खेतों में डीएपी, यूरिया, पोटाश और NPK जैसी रासायनिक खादों का लंबे समय तक उपयोग करने से मिट्टी के सूक्ष्म जीव (माइक्रोब्स) नष्ट हो चुके हैं. ये वही जीव हैं जो मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं और पौधों को पोषण देने में मदद करते हैं. जब सूक्ष्म जीव खत्म हो जाते हैं तो खाद मिट्टी में फिक्स हो जाती है, यानी पौधों तक नहीं पहुंच पाती.

इसी वजह से किसान जितनी भी खाद डालते है, उनका पूरा फायदा फसलों को नहीं मिल पाता है. खरगोन के कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजीव सिंह ने लोकल 18 को बताया कि किसानों को अब रासायनिक खादों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए. इसके बजाय उन्हें खेतों में हर 15 से 20 दिन में देसी खाद या जीवामृत का उपयोग शुरू करना चाहिए. यह देसी खाद खेतों में सूक्ष्म जीवों की संख्या को तेजी से बढ़ाती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता सुधरती है और फसल का उत्पादन भी बढ़ता है. सबसे बड़ी बात ये कि इससे किसानों का खाद पर खर्च आधा हो जाता है.

जीवामृत बनाने के लिए जरूरी सामग्री
जीवामृत तैयार करने के लिए किसी विशेष साधन या खर्च की जरूरत नहीं होती. इसे किसान घर पर ही बेहद आसानी से बना सकते हैं. इसके लिए 200 लीटर की टंकी में लगभग 180 लीटर पानी भरें. फिर उसमें 10 किलो गाय का गोबर और 10 लीटर गोमूत्र मिलाएं. इसके बाद 2 किलो गुड़ और 2 किलो बेसन या दलहनी फसलों का आटा डालें. आखिर में बरगद या पीपल के पेड़ के नीचे की आधा किलो मिट्टी डालें. यह मिट्टी प्राकृतिक सूक्ष्म जीवों से भरपूर होती है.

घर पर जीवामृत बनाने का सही तरीका
इन सभी चीजों को लकड़ी के डंडे से अच्छे से मिलाकर पांच से सात दिन तक ढककर छांव में रख दें. पांच से सात दिन बाद जीवामृत उपयोग के लिए तैयार हो जाता है. तैयार किए गए मिश्रण को किसान प्रति एकड़ खेत में 200 लीटर की मात्रा में खेतों डाल दें. इस प्रक्रिया को हर 15 से 20 दिन में दोहराने से खेतों में सूक्ष्म जीवों की संख्या बढ़ने लगती है. जब ये जीव सक्रिय होते हैं तो खेत में डाली गई खाद का पूरा लाभ पौधों को मिलने लगता है. धीरे-धीरे रासायनिक खादों की जरूरत भी कम हो जाती है.

जीवामृत डालने के अचूक फायदे
डॉ. सिंह के मुताबिक यदि किसान नियमित रूप से जीवामृत का उपयोग करें तो न सिर्फ उनकी मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, सूक्ष्म जीवों की संख्या में इजाफा होगा, बल्कि फसल की पैदावार में भी अधिक बढ़ोतरी होगी. इसी के साथ मिट्टी की संरचना सुधरेगी, नमी लंबे समय तक बनी रहेगी और जड़ें मजबूत होंगी. इससे किसान रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करके आर्थिक रूप से भी लाभ कमा सकेंगे.

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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