पर्सनल लोन एप्स पर डेटा चोरी और हैरेसमेंट का खतरा: कॉन्टैक्ट-लोकेशन का एक्सेस मांगे तो सावधान हो जाएं; डेटा के गलत इस्तेमाल पर क्या करें?

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नई दिल्ली14 मिनट पहले

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ऑनलाइन पर्सनल लोन लेना आजकल बहुत आसान हो गया है। बस पैन, आधार और बैंक स्टेटमेंट अपलोड करो और कुछ ही मिनटों में पैसा खाते में आ जाता है। यह सुविधा जितनी आसान दिखती है, उतनी ही जोखिम भरी भी हो सकती है।

दरअसल, लोन के लिए अप्लाई करते समय आप केवल अपनी कमाई की जानकारी नहीं देते, बल्कि अपनी पहचान, खर्च करने की आदतें और कई बार अपने निजी कॉन्टैक्ट्स तक का एक्सेस भी अनजाने में एप्सको दे देते हैं।

ऑनलाइन एप्स बिचौलिए जैसे, डेटा चोरी का खतरा

ज्यादातर लोग यह नहीं देखते कि वे लोन के लिए अप्लाई कहां कर रहे हैं। किसी जाने-माने बैंक या रजिस्टर्ड NBFC (नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी) और किसी रैंडम लोन एप में जमीन-आसमान का फर्क होता है। बैंक RBI के नियमों से बंधे होते हैं और उनकी नियमित ऑडिटिंग होती है।

वहीं, कई इंस्टेंट-लोन एप्सकेवल बिचौलिए होते हैं। इनका काम आपका डेटा इकट्ठा करना और उसे आगे बेचना होता है। ऐसे में आपका डेटा कई हाथों से होकर गुजरता है, जिससे प्राइवेसी का खतरा बढ़ जाता है।

कॉन्टैक्ट्स और गैलरी का एक्सेस देना जरुरी नहीं

लोन एप्सअक्सर आपके फोन के कॉन्टैक्ट्स, कॉल लॉग्स, फोटो और लोकेशन का एक्सेस मांगते हैं। क्रेडिट स्कोर चेक करने के लिए इन चीजों की कोई जरूरत नहीं होती। पुराने मामलों में देखा गया है कि जब लोग समय पर लोन नहीं चुका पाए, तो इन एप्सने उनके रिश्तेदारों और दोस्तों को फोन करके परेशान किया।

हालांकि रेगुलेटर्स ने इस पर सख्ती की है, लेकिन यह पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगर कोई एप बेमतलब की परमिशन मांग रहा है, तो समझ लीजिए कि कुछ गड़बड़ है।

लोन रिजेक्ट होने के बाद भी डिलीट नहीं होता डेटा

अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर लोन नहीं मिला तो डेटा सुरक्षित है, लेकिन ऐसा नहीं होता। आपके डॉक्यूमेंट्स और आईडी सालों तक इन कंपनियों के सर्वर पर स्टोर रहते हैं।

प्राइवेसी पॉलिसी में ‘बिजनेस पर्पस’ या ‘एनालिसिस’ के नाम पर डेटा को अपने पार्टनर या वेंडर्स के साथ शेयर करने की छूट ले ली जाती है। यही कारण है कि एक बार लोन अप्लाई करने के बाद आपके पास अनचाहे कॉल्स और स्पैम मैसेज की बाढ़ आ जाती है।

टर्म्स एंड कंडीशन्स पढ़कर ही ‘एग्री’ पर क्लिक करें

जब किसी को पैसों की सख्त जरूरत होती है, तो वह अक्सर प्राइवेसी पॉलिसी या टर्म्स एंड कंडीशन्स को पढ़े बिना ‘एग्री’ यानी सहमत हैं, पर क्लिक कर देता है।

बिना किसी सवाल के या तुरंत अप्रूवल जैसे वादे लुभावने तो लगते हैं, लेकिन इनके पीछे आपकी प्राइवेसी की बलि दी जा रही होती है। डिजिटल लोन के दौर में आपकी स्पीड आपकी सुरक्षा पर भारी पड़ सकती है।

डेटा का गलत इस्तेमाल हो रहा है तो क्या करें?

अगर कोई कंपनी आपको धमकी भरे फोन कर रही है या आपके करीबियों को मैसेज भेज रही है, तो सबसे पहले उन सभी चीजों का स्क्रीनशॉट लें। एप की परमिशन तुरंत बंद करें और उसे अनइंस्टॉल कर दें। इसके बाद कंपनी के शिकायत पोर्टल पर और फिर RBI के लोकपाल या साइबर सेल में इसकी शिकायत दर्ज कराएं। यह केवल खराब व्यवहार नहीं, बल्कि कानूनी अपराध है।

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पर्सनल लोन 6 महीनों में 23% बढ़े: एक साल पहले 3% तक गिरावट रही थी, अप्रैल-सितंबर नए क्रेडिट कार्ड 28% कम जारी हुए

देश में घर, गाड़ी या अन्य उपभोक्ता जरूरतों के लिए कर्ज के रुझानों में अप्रैल-सितंबर के बीच बड़ा बदलाव आया है। जेएम फाइनेंशियल्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष की सुस्ती के बाद कंजप्शन बेस्ड बैंक लोन बढ़े हैं।

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