साइबर लिटरेसी- पेंशनर्स के साथ स्कैम: लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर फ्रॉड, बुजुर्गों को करें सावधान, ये 9 बातें हमेशा याद रखें

8 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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कुछ दिनों पहले दिल्ली के एक 79 वर्षीय रिटायर्ड सिविल इंजीनियर के साथ साइबर ठगी हुई। स्कैमर्स ने फर्जी विज्ञापन के जरिए उन्हें लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का झांसा दिया। इसके बाद उनके बैंक खाते से पैसे निकाल लिए।

हाल ही में इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने अपने ‘एक्स’ हैंडल से ऐसी ही एक घटना का वीडियो शेयर किया है। इसमें पेंशनधारकों को लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर होने वाले स्कैम के बारे में सतर्क किया गया है।

साइबर ठग बुजुर्गों की तकनीकी जानकारी की कमी का फायदा उठाते हैं। ऐसे में हमें अपने घर के बुजुर्गों को डिजिटल दुनिया के पीछे छिपे खतरों के बारे में बताना जरूरी है।

चलिए, आज साइबर लिटरेसी कॉलम में हम इस स्कैम के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • स्कैमर पेंशनर्स को अपने जाल में कैसे फंसाते हैं?
  • ऐसे स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

एक्सपर्ट: राहुल मिश्रा, साइबर सिक्योरिटी एडवाइजर, उत्तर प्रदेश पुलिस

सवाल- पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट क्या है, ठगों ने रिटायर्ड बुजुर्ग को कैसे चूना लगाया?

जवाब- यह पेंशन धारक के जीवित होने का आधिकारिक प्रमाणपत्र है। पेंशनर्स को हर साल यह सर्टिफिकेट अपने बैंक या अधिकृत पोर्टल के माध्यम से अपडेट कराना होता है। अगर यह समय पर जमा न हो तो पेंशन रुक सकती है। ठग इसी का फायदा उठाते हैं। नीचे दो अलग-अलग मामले समझिए-

पहला मामला

I4C द्वारा शेयर किए गए वीडियो के मुताबिक, एक रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर को फेसबुक स्क्रॉल करते हुए पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट करने का एक एड दिखा। जैसे ही उन्होंने इस एड पर क्लिक किया, एक वेबपेज खुला। इसमें ऑलरेडी उनकी कुछ पर्सनल डिटेल्स ऑटो-फिल थीं। उन्होंने ज्यादा सोचा नहीं और फॉर्म सबमिट कर दिया।

कुछ देर बाद उन्हें एक फोन कॉल आया और वॉट्सएप पर .apk फाइल भेजी आई। उनसे कहा गया कि ये फाइल डाउनलोड करके फॉर्म भर दीजिए। आपका पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट हो जाएगा। उन्होंने फॉर्म में अपना आधार नंबर, फोन नंबर दर्ज किया और ओटीपी सबमिट किया। ऐसा करते ही उनके फोन का कंट्रोल साइबर क्रिमिनल्स के पास चला गया। कुछ ही समय में उनके बैंक अकाउंट से 2.40 लाख रुपए कट गए।

दूसरा मामला

दूसरी घटना में रिटायर्ड सिविल इंजीनियर को फेसबुक स्क्रॉलिंग के दौरान PNB लाइफ सर्टिफिकेट का विज्ञापन दिखा। लिंक पर क्लिक करते ही उनसे नाम और मोबाइल नंबर लिया गया। कॉलर ने खुद को PNB स्टाफ बताकर वॉट्सएप पर ‘PNB Pension Life Certificate Update.apk’ भेजा और एप डाउनलोड करवाया। एप के जरिए पर्सनल व बैंक डिटेल ली गई और भरोसे के लिए 1 रुपए कटते दिखाया गया। कुछ ही घंटों में खाते से 4.15 लाख रुपए निकाल लिए गए।

सवाल- रिटायर्ड बुजुर्गों की तरफ से क्या गलती हुई, जिसके कारण वे ठगी का शिकार हो गए?

जवाब- दोनों रिटायर्ड बुजुर्गों ने तीन बड़ी गलतियां की थीं-

  • उन्होंने सोशल मीडिया पर दिखे विज्ञापन पर भरोसा कर लिया।
  • अनजान लिंक से APK फाइल डाउनलोड की, जो कभी भी बैंक या सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं होती है।
  • अनजान एप में अपनी पर्सनल और बैंक से जुड़ी जानकारी भर दी।
  • इन्हीं तीन गलतियों के कारण उनकी मेहनत की कमाई एक बार में उड़ गई।

सवाल- पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर साइबर स्कैमर्स ठगी को कैसे अंजाम देते हैं?

जवाब- स्कैमर्स पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट के नाम पर फर्जी एप और कॉल के जरिए बैंक डिटेल्स हासिल करते हैं। इसके बाद खाते से पैसे ऐंठ लेते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- लोग इतनी आसानी से इस तरह के स्कैम के झांसे में क्यों फंस जाते हैं?

जवाब- इस स्कैम में ठग पेंशनर्स की सीमित तकनीकी जानकारी का फायदा उठाते हैं। ‘लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट’ जैसी जरूरी प्रक्रिया का नाम लेकर वे पेंशनर्स को डराते हैं कि अगर तुरंत अपडेट नहीं किया गया तो पेंशन रुक सकती है। इस डर से वे बिना जांच-पड़ताल के फर्जी लिंक पर क्लिक कर देते हैं।

सवाल- इस तरह के किसी भी स्कैम से बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

जवाब- इसके लिए घर के बुजुर्गों को तकनीक के बारे में जागरूक करना जरूरी है। उन्हें ये बताएं कि बैंक या सरकार कभी भी APK फाइल भेजकर या फोन पर डिटेल्स मांगकर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट नहीं कराती है। इसके साथ ही उन्हें कुछ और बुनियादी बातों की जानकारी दें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल– पेंशनर लाइफ सर्टिफिकेट अपडेट कराने या प्राप्त करने का सही तरीका क्या है?

जवाब– लाइफ सर्टिफिकेट सिर्फ बैंक ब्रांच, पोस्ट ऑफिस या सरकारी jeevanpramaan.gov.in पोर्टल के जरिए ही अपडेट होता है। यह कभी भी सोशल मीडिया लिंक, कॉल या APK फाइल से नहीं होता है।

सवाल- घर के बुजुर्गों को स्कैम से बचाने के लिए क्या जरूरी कदम उठाने चाहिए?

जवाब- इसके लिए घर के बुजुर्गों को कुछ बातें जरूर बताएं। जैसेकि-

  • उन्हें समझाएं कि बैंक कभी भी फोन, वॉट्सएप या लिंक से डिटेल नहीं मांगते हैं।
  • सोशल मीडिया विज्ञापनों पर तुरंत भरोसा न करें।
  • अनजान एप डाउनलोड न करने के लिए मना करें।
  • अनजान कॉल, मैसेज या लिंक से इंटरैक्ट न करें।
  • समय-समय पर उनके मोबाइल फोन चेक करते रहें। देखें कोई संदिग्ध एप तो नहीं है।
  • उनके फोन में सिर्फ जरूरी और भरोसेमंद एप ही रखें।
  • बैंकिंग एप में डेली ट्रांजैक्शन लिमिट सेट करें।
  • नेट बैंकिंग और UPI पर अलर्ट/SMS नोटिफिकेशन हमेशा ऑन रखें।
  • उनके फोन में साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 सेव करें।
  • बैंक और परिवार के दो भरोसेमंद नंबर स्पीड डायल में डालें।
  • समय-समय पर उनके साथ बैठकर स्कैम के नए तरीकों के बारे में बताएं।
  • प्ले स्टोर में ‘प्ले प्रोटेक्ट’ विकल्प हमेशा ऑन रखें। किसी के कहने पर भी इसे बंद न करें।
  • सेटिंग्स से ‘इंस्टॉलेशन फ्रॉम अननोन सोर्स’ विकल्प को हमेशा ऑफ रखें।

सवाल- किसी भी स्कैम से बचने के लिए किन बुनियादी बातों का ध्यान रखना जरूरी है?

जवाब- इसके लिए 6 बुनियादी बातों का खास ख्याल रखें। अगर इसे समझ लिए तो किसी भी स्कैम से बच सकते हैं।

  • किसी भी कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें।
  • किसी भी अनजान लिंक पर कभी क्लिक न करें।
  • .apk फाइल कभी भी डाउनलोड न करें।
  • लॉगिन डिटेल्स, OTP, ATM डिटेल और आधार की जानकारी किसी से शेयर न करें।
  • सरकारी या बैंकिंग से जुड़े अपडेट के लिए हमेशा संबंधित ऑफिस से संपर्क करें।
  • किसी भी जानकारी के लिए हमेशा ऑफिशियल वेबसाइट से ही हासिल करें।

सवाल- अगर कोई स्कैम का शिकार हो जाए तो उसे तुरंत क्या करना चाहिए?

जवाब- तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और अपने बैंक को सूचना दें। बैंक के सारे ट्रांजैक्शन तुरंत ब्लाॅक करवाएं। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराएंगे, पैसा मिलने की संभावना उतनी ही बढ जाती है।

सवाल- इस स्कैम की शिकायत कहां और कैसे कर सकते हैं?

जवाब- नेशनल साइबर क्राइम के हेल्पलाइन नंबर पर 1930 पर कॉल करके इस स्कैम की शिकायत कर सकते हैं। साथ ही cybercrime.gov.in वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं।

ध्यान रखें कि शिकायत करते समय बैंक ट्रांजैक्शन डिटेल, मोबाइल नंबर, स्क्रीनशॉट और कॉल/मैसेज की जानकारी जरूर दें, ताकि कार्रवाई जल्दी हो सके। इसके अलावा अपने नजदीकी थाने में भी इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

……………… ये खबर भी पढ़िए साइबर लिटरेसी- क्रेडिट कार्ड लिमिट बढ़ाने के नाम पर फ्रॉड: ठगी के तरीके पहचानें, सही तरीका और प्रोसेस जानें, ये 6 गलतियां न करें

बीते कुछ दिनों में क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर फ्रॉड तेजी से बढ़ रहे हैं। ठग खुद को बैंक अधिकारी बताकर फोन करते हैं, भरोसा जीतते हैं और फिर लिंक, ओटीपी या कार्ड डिटेल लेकर आपका बैंक अकाउंट खाली कर देते हैं। आगे पढ़िए…

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