खंडवा. सर्दियों का मौसम आते ही बाजार में रंग-बिरंगी सब्जियों की बहार आ जाती है लेकिन इनमें एक ऐसी सब्जी है, जो न केवल खाने में स्वादिष्ट होती है बल्कि सेहत के लिए भी अमृत के समान मानी जाती है और वह है चुकंदर (Beetroot Benefits). अगर किसान भाई नवंबर के महीने में इसकी खेती शुरू करें, तो कुछ ही महीनों में उन्हें शानदार मुनाफा मिल सकता है. चुकंदर एक ऐसी फसल है जो कम समय, कम लागत और कम मेहनत में बढ़िया आमदनी देती है. यही कारण है कि आज कई किसान पारंपरिक खेती छोड़कर चुकंदर की ओर रुख कर रहे हैं.
ठंडी और नम जलवायु सबसे उपयुक्त
उन्होंने कहा कि चुकंदर की खेती के लिए ठंडी और नम जलवायु सबसे उपयुक्त होती है. नवंबर से जनवरी के बीच इसका उत्पादन सबसे अच्छा होता है. यह फसल दोमट या बलुई दोमट मिट्टी में शानदार बढ़ती है. मिट्टी का pH स्तर 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए. खेत की तैयारी करते समय दो से तीन बार गहरी जुताई करें और मिट्टी को भुरभुरी बना लें. साथ ही खेत में 20-25 टन गोबर की सड़ी खाद डालना बेहतर रहता है.
बीज बुवाई का सही समय और मात्रा
नवंबर का महीना चुकंदर की बुआई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. एक हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 6-8 किलोग्राम बीज पर्याप्त होते हैं. बीज बोते समय लाइन से लाइन की दूरी 45 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए. बीज बोने के बाद हल्की सिंचाई कर दें ताकि अंकुरण जल्दी हो जाए.
सिंचाई और देखभाल
पहली सिंचाई बीज बोने के 3-5 दिन बाद करनी चाहिए. उसके बाद हर 10 से 12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें. ध्यान रहे कि खेत में जलजमाव न हो क्योंकि इससे जड़ गलने की संभावना बढ़ जाती है. खरपतवार नियंत्रण के लिए बुवाई के 20 दिन बाद एक बार निराई-गुड़ाई अवश्य करें.
रोग और कीट प्रबंधन
चुकंदर में सबसे आम समस्या पत्ती झुलसा रोग की होती है. इससे बचाव के लिए किसान मैन्कोजेब या कार्बेन्डाजिम का छिड़काव कर सकते हैं. इसके अलावा यदि फसल में कीट लग जाएं, तो नीम का छिड़काव या जैविक दवाओं का उपयोग करना फायदेमंद रहता है.
फसल कटाई और पैदावार
चुकंदर की फसल बुआई के 70 से 80 दिन बाद तैयार हो जाती है. जब जड़ का रंग गहरा लाल और आकार गोल हो जाए, तो इसे निकाल लेना चाहिए. एक हेक्टेयर में औसतन 250 से 300 क्विंटल तक उत्पादन आसानी से मिल सकता है.
बाजार भाव और मुनाफा
चुकंदर की कीमत सीजन और मांग के अनुसार बदलती रहती है. वर्तमान में बाजार में इसका भाव 12 से 20 रुपये प्रति किलो तक चल रहा है. अगर किसान एक हेक्टेयर में खेती करते हैं, तो उन्हें 1.5 से दो लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा आसानी से हो सकता है. वहीं जिन किसानों की फसल बड़ी मंडियों में जाती है, उन्हें और भी अधिक दाम मिलते हैं.
स्वाद और सेहत दोनों में लाभकारी
चुकंदर सिर्फ सब्जी नहीं बल्कि एक प्राकृतिक दवा है. इसे सलाद, जूस, सूप, पराठे और हलवे के रूप में खाया जा सकता है. यह रक्त शुद्ध करने, हीमोग्लोबिन बढ़ाने, दिल की बीमारियों से बचाने और त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करता है. कुल मिलाकर चुकंदर की खेती किसानों के लिए एक सुनहरा मौका है. यह ऐसी फसल है, जो कम लागत, कम मेहनत और कम समय में अधिक लाभ देती है. अगर किसान नवंबर के महीने में इसकी शुरुआत करें और उचित देखभाल करें, तो अगले तीन महीनों में उन्हें बंपर मुनाफा मिल सकता है. अगर आप किसान हैं और अपनी आमदनी बढ़ाना चाहते हैं, तो इस सर्दी चुकंदर की खेती जरूर करें क्योंकि यह फसल न सिर्फ आपकी जेब भरेगी बल्कि लोगों की थालियों का स्वाद और उनकी सेहत भी बढ़ाएगी.
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