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Agriculture News: लौकी की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी भी उतनी ही जरूरी है. किसान भाइयों को सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए, जिससे मिट्टी भुरभुरी हो जाए. इसके बाद दो से तीन बार रोटावेटर चलाना चाहिए ताकि मिट्टी अच्छी तरह से तैयार हो जाए.
सतना. गर्मियों के मौसम में सब्जियों की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छी कमाई का जरिया बन सकती है. खासकर लौकी की खेती ऐसी फसल मानी जाती है, जो कम समय में तैयार हो जाती है और बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसान मार्च के महीने में लौकी की बुवाई करते हैं, तो मई-जून तक फसल तैयार होकर बाजार में पहुंचने लगती है. गर्मी के दिनों में लौकी की खपत बढ़ जाती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं. यही कारण है कि कई किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ सब्जियों की खेती की ओर भी रुख कर रहे हैं. सही तकनीक और अच्छी किस्मों का चयन किया जाए, तो एक एकड़ खेत में लौकी की खेती से लगभग दो से तीन लाख रुपये तक की कमाई संभव हो सकती है.
मध्य प्रदेश के सतना के किसानों के अनुसार, मार्च का महीना लौकी की खेती के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है. इस समय तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगता है, जिससे बीज का अंकुरण तेजी से होता है और पौधे जल्दी बढ़ते हैं. इसी वजह से फसल समय पर तैयार हो जाती है और बाजार में अच्छी मांग के समय किसानों को बिक्री का मौका मिलता है. रामपुर में खेती कर रहे किसान अंशुमान सिंह ने लोकल 18 को बताया कि नॉर्थ इंडिया में मार्च के दौरान मौसम लौकी के लिए बिल्कुल अनुकूल हो जाता है. गर्मी की शुरुआत होने से बीज जल्दी अंकुरित होते हैं और पौधों की बढ़वार भी तेज होती है. अगर किसान इस समय बुवाई करते हैं, तो करीब दो महीने में लौकी की तुड़ाई शुरू हो जाती है.
इन किस्मों से बेहतर उत्पादन
लौकी की खेती में सही किस्म का चयन करना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है. किसानों के अनुसार, कुछ किस्में गर्मियों के मौसम में ज्यादा उत्पादन देती हैं और बाजार में भी पसंद की जाती हैं. इस मौसम में सतना जैसे क्षेत्रों के लिए पूसा किस्म लौकी की सबसे अच्छी किस्मों में मानी जाती है. इसमें फल का आकार बड़ा होता है और बीज भी कम होते हैं, जिससे इसकी मांग बाजार में ज्यादा रहती है. इसके अलावा अर्क बहार किस्म भी किसानों के बीच लोकप्रिय है, जिसमें लौकी गोल और आकार में बड़ी होती है. वहीं काशी गंगा किस्म की खासियत यह है कि इसमें रोगों के प्रति सहनशीलता अधिक होती है, जिससे फसल खराब होने का खतरा कम रहता है.
खेत की तैयारी और बुवाई का सही तरीका
लौकी की अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी भी उतनी ही जरूरी होती है. सबसे पहले खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए. इसके बाद दो से तीन बार रोटावेटर चलाकर मिट्टी को अच्छी तरह तैयार किया जाता है. किसान बताते हैं कि खेत में दो से तीन ट्रॉली गोबर की खाद डालना फायदेमंद रहता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है. इसके बाद बेड बनाकर सिंचाई कर दी जाती है और फिर मल्चिंग शीट बिछाकर ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था की जाती है. इसके बाद बीजों की बुवाई की जाती है. एक एकड़ खेत के लिए लगभग एक से डेढ़ किलो बीज की जरूरत होती है और पौधे से पौधे के बीच लगभग दो से तीन मीटर की दूरी रखी जाती है.
मचान तकनीक से बढ़ सकता है उत्पादन
लौकी की खेती में मचान तकनीक अपनाने से किसानों को अतिरिक्त फायदा मिल सकता है. इसमें पौधों को बांस या तार के सहारे ऊपर की ओर बढ़ने दिया जाता है, जिससे फल जमीन के संपर्क में नहीं आते. अंशुमान सिंह बताते हैं कि जब लौकी जमीन पर रहती है, तो फल पर दाग पड़ने की संभावना रहती है और आकार भी प्रभावित होता है लेकिन मचान तकनीक में फल हवा में लटकते रहते हैं, जिससे उनका आकार बेहतर बनता है और गुणवत्ता भी अच्छी रहती है. इसके अलावा स्प्रे और देखभाल करना भी आसान हो जाता है.
एक एकड़ में कितना उत्पादन?
उन्होंने कहा कि यदि किसान सही तरीके से खेती करें, तो लौकी की फसल लगभग 55 से 65 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. एक एकड़ खेत से करीब 150 से 200 कुंतल तक उत्पादन मिल सकता है. गर्मी के मौसम में बाजार में लौकी की कीमत भी अच्छी मिलती है. ऐसे में उत्पादन और बाजार मूल्य को ध्यान में रखते हुए किसान एक एकड़ से लगभग दो से तीन लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. यही वजह है कि कम समय में ज्यादा लाभ देने वाली यह खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनती जा रही है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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