Crude Oil Price Surge: मिडिल ईस्ट में चल रही घटनाओं ने कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लाने का काम किया है. ब्रेंट क्रूड अब 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है. अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध के असर से पिछले 30 दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 56 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
युद्ध शुरू होने से पहले कच्चा तेल लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास ट्रेड कर रहा था. जबकि अब यह 112 डॉलर तक पहुंच चुका है. जो वैश्विक सप्लाई पर बढ़ते दबाव का सीधा संकेत दे रहा है. आइए जानते हैं, इस बारे में विस्तार से….
होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से गहराया संकट
ईरानी सरकार के होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के फैसले का असर ग्लोबल सप्लाई पर देखने को मिला है. यह रास्ता दुनिया के अहम तेल रास्तों में से एक है. इस पर प्रभाव पड़ने से दुनिया के 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई बाधित होती है. यहीं कारण है कि कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल रहा है.
भारत की गैस जरूरतें प्रभावित
वैश्विक ऊर्जा संकट अब सिर्फ तेल तक सीमित नहीं रह गया है. बल्कि एलएनजी (LNG) मार्केट भी संकट में है. भारत अपनी कुल गैस जरूरतों को करीब 47 प्रतिशत हिस्सा कतर से आयात करता है.
कतर में जारी हमलों के कारण निर्यात 17 प्रतिशत तक गिर गई है. जिससे भारत जैसे देशों पर खासा असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है.
महंगे तेल और गैस का भारत पर असर
जिन देशों की ऊर्जा जरूरतें आयात पर निर्भर होती हैं, उनके लिए तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट का असर सबसे ज्यादा होता है. भारत भी इन्हीं देशों में शामिल है. तेल और एलएनजी की बढ़ती कीमतें न सिर्फ परिवहन और बिजली के खर्च को बढ़ाती हैं, बल्कि उद्योगों और उत्पादन की लागत बढ़ने की संभावना बनी रहती है.
इसका सीधा नतीजा महंगाई में तेजी के रूप में देखने को मिलता है. जिससे रोजमर्रा के सामान और सेवाओं के दाम बढ़ते हैं. आम लोगों की जेब पर इसका असर पड़ता है और घर की बजट बिगड़ जाती है.
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