चिंतामण गणेश मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़, भगवान राम से जुड़ा इतिहास

Last Updated:

चैत्र महीने के बुधवार का दिन भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना के लिए विशेष माना जाता है. उज्जैन के चिंतामण गणेश मंदिर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रही. ऐसा विश्वास है कि इस दिन दर्शन मात्र से सभी संकट और परेशानियां दूर हो जाती हैं. साथ ही इस दिन किसान अपनी फसल का हिस्सा चढ़ाने आते है.

विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां देशभर से भक्त भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. बाबा महाकाल के साथ ही भगवान गणेश की पूजा का भी खास महत्व माना जाता है. उज्जैन से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित चिंतामण गणेश मंदिर चैत्र माह के हर बुधवार विशेष रूप से भक्तों से भरा रहता है. इस दिन मंदिर के प्रांगण में मेला लगता है. कई किसान अपनी फसल लेकर चिंतामण गणेश के मंदिर सुबह से पहुंचते हैं. चैत्र मास की चौथी जत्रा पर सुबह से ही चिंतामण मंदिर में भक्तों का ताता लग जाता है.

बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु
चिंतामन गणेश मंदिर पर चैत्र के सभी बुधवार को जत्रा का महत्व माना जाता है. इसी परंपरा के चलते आज चौथी जत्रा पर प्रातः 4 बजे पुजारी ने मंदिर के पट खोलकर 11 फलों के रस से गणेश जी का पंचामृत अभिषेक किया. फिर आकर्षक श्रृंगार किया. इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए पट खोल दिए गए. जत्रा होने के कारण बड़ी संख्या में सुबह से श्रद्धालु पहुंचने लगे. हालात ये थे कि दोपहर तक श्रद्धालुओं की कतारें देखी गईं.

फसल पकने पर चढ़ाने पहुंचे किसान
उज्जैन स्थित चिंतामण गणेश मंदिर के पुजारी जयंत गुरु के अनुसार, चैत्र माह में गेहूं और चने की फसल पककर तैयार हो जाती है और किसानों के यहां धान के भंडार भर जाते हैं. नया धान बाजार में बेचने से पहले किसान भगवान चिंतामण गणेश को अर्पित करने मंदिर आते हैं. यह परंपरा बहुत पुरानी है और समय के साथ यह जत्रा का रूप ले चुकी है. जत्रा में सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि देशभर से श्रद्धालु मनोकामना और आशीर्वाद के लिए भी शामिल होते हैं. चैत्र माह के इस पर्व में मंदिर प्रांगण में भक्तों का ताता लगा रहता है. भक्ति और उत्साह का अनोखा माहौल देखने को मिलता है.

किसान मयंक गुर्जर ने कही ये बात
किसान मयंक गुर्जर ने बताया कि यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध है और यहां हर मनोकामना पूरी होती है. चैत्र माह में वे अपने खेत की फसल लेकर भगवान गणेश के दर्शन के लिए आए हैं. उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा से इस बार फसल अच्छी हुई है. इसलिए वे फसल बेचने से पहले भगवान को चढ़ाकर आभार व्यक्त करने आए हैं. मंदिर में दर्शन करते ही उनका मन संतोष और श्रद्धा से भर गया. उन्होंने बताया कि इस अवसर पर मंदिर में भक्तों का ताता लगा रहता है और हर कोई अपने मनोकामना की पूर्ति के लिए यहां पहुंचता है. भगवान के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि और नई ऊर्जा का अनुभव होता है.

जानिए किसने की थी मंदिर की स्थापना
इस मंदिर की बात करें तो राम भगवान भी इस मंदिर मे आए थे. धार्मिक मान्यतानुसार, इस गणेश मंदिर में भगवान चिंतामण गणेश की स्थापना भगवान राम ने वनवास से लौटने के बाद की थी. वहीं इच्छामन और सिद्धिविनायक गणेश की स्थापना लक्ष्मण जी और सीता माता ने की थी. ऐसा मान्यता है कि जो भक्त चैत्र माह के बुधवार के दिन चिंतामण गणेश मंदिर में दर्शन पूजन करता है. भगवान गणेश उसकी सभी मनोकामना पूरी कर देते हैं. साथ ही उसे सभी प्रकार के चिंता से मुक्त कर देते हैं.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *