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मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ से आदेश जारी किया गया है, जिसमें बताया गया है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति RTE 2009 लागू होने से पहले हुई थी. उन्हें राज्य में TET परीक्षा आदेश जारी होने के दो साल के अंदर देनी होगी.
सांकेतिक तस्वीर AI
रिपोर्ट-रामाकांत दुबे
Madhya Pradesh Teacher Eligibility Test: मध्य प्रदेश में शिक्षकों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. करीब डेढ़ लाख शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडराया है. शिक्षा विभाग अब शिक्षकों की पात्रता परीक्षा लेगा. अगर कोई शिक्षक टीईटी (Teacher Eligibility Test) में फेल हो जाता है, तो उसे सेवा से हटा दिया जाएगा. शिक्षा विभाग के आदेश में सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया गया है.
शिक्षकों को पास करनी होगी TET परीक्षा
स्कूल शिक्षा विभाग ने आदेश में बताया गया है कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले हुई है. ऐसे शिक्षकों को सेवा में बने रहने के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा. ऐसी संभावना जताई जा रही है कि टीईटी परीक्षा जुलाई-अगस्त 2026 में आयोजित करवाई जा सकती है.
आदेश जारी होने के बाद 2 साल के भीतर पास करनी होगी परीक्षा
संभागीय संयुक्त संचालकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किया है. इसके अलावा यह भी बताया गया है कि जिन शिक्षकों की 5 साल से कम नौकरी बची है. उन्हें TET परीक्षा देने की जरूरत नहीं है. वहीं ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में अभी 5 साल से ज्यादा समय बचा है, उन्हें अनिवार्य रूप से टीईटी परीक्षा देनी होगी. आदेश जारी होने के 2 साल के भीतर किसी भी शिक्षक को TET परीक्षा पास करनी होगी.
विरोध भी हुआ शुरू
शिक्षा विभाग की तरफ से आदेश के बाद कई शिक्षक संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है. संगठनों का मानना है कि जो शिक्षक लंबे समय से सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें इस परीक्षा के आधार पर हटाना ठीक नहीं है.
क्या है TET टेस्ट?
टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट शिक्षक बनने के लिए एक पात्रता परीक्षा होती है. यह वह लोग देते हैं, जो सरकारी स्कूल में टीचर बनना चाहते हैं. यह टेस्ट क्लास एक से लेकर आठ तक बच्चों को पढ़ाने के लिए अनिवार्य है. यह परीक्षा इस बात को जांचने के लिए होती है कि आप बच्चों को पढ़ाने के योग्य हैं या नहीं.
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