Rinku Singh Father Death due to liver cancer: भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह (khanchandra singh)का निधन हो गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रिंकू सिंह के पिता को स्टेज-4 लिवर कैंसर था, जिसका इलाज कई सालों से चल रहा था. मंगलवार को ही अपने पिता की नाजुक हालत की खबर सुनकर क्रिकेटर रिंकू सिंह आईसीसी पुरुष टी20 वर्ल्ड कप 2026 को बीच में छोड़कर ग्रेटर नोएडा आ गए थे. यहां यथार्थ हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली. आखिर क्या है लिवर कैंसर, कैसे होता है, कैसे नजर आते हैं लक्षण, क्या है कारण, इलाज का तरीका, जिसने ले ली क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता की जान.
क्या है लिवर कैंसर?
मेयो क्लिनिक में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, लिवर कैंसर तब होता है, जब लिवर की कोशिकाओं के डीएन में म्यूटेशन होता है. इस वजह से ये कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं, जिससे ट्यूमर बनता है. कई बार अधिक और लंबे समय तक शराब का सेवन, लिवर सिरोसिस, क्रोनिक हेपेटाइटिस बी, सी इंफेक्शन, फैटी लिवर आदि लिवर कैंसर का कारण हो सकते हैं.
लिवर कैंसर के कारण और जोखिम
आमतौर पर लिवर कैंसर होने का मुख्य कारण लिवर क्रोनिक वायरल हेपेटाइटिस बी, सी के कारण होता है. इसमें लिवर में लगातार सूजन रहता है. लिवर सिरोसिस तब होता है, जब आप अधिक शराब का सेवन करते हैं, हेपेटाइटिस से ग्रस्त हो, जिससे लिवर में घाव, सूजन लंबे समय तक बना रहे, जो बाद में कैंसर का रूप ले लेता है. जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक शराब का सेवन करता है, तो लिवर को नुकसान पहुंचता है. इससे लिवर सिरोसिस होने का खतरा बढ़ जाता है, जो लिवर कैंसर का कारण बनता है. इसके अलावा, फैटी लिवर, टाइप 2 डायबिटीज, मोटापा भी लिवर कैंसर होने के रिस्क को बढ़ाते हैं.
लिवर कैंसर के लक्षण
बिना किसी कारण के वजन कम होना.
भूख न लगना, दिन भर में बहुत कम खाना.
पेट में दाहिने भाग में ऊपर की तरफ दर्द बने रहना.
पेट में सूजन होना या पानी भर जाना.
स्किन और आंखों का पीला नजर आना.
उल्टी और मतली जैसा बार-बार महसूस होना.
पेट में दाहिनी तरफ गांठ महसूस होना.
बहुत अधिक पीले रंग का पेशाब आना.
अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण लगातार नजर आए तो आप डॉक्टर से जरूर दिखा लें, क्या पता ये कोई लिवर डिजीज होने के कारण ऐसा हो रहा हो.
लिवर कैंसर स्टेज-4 या लास्ट स्टेज
लिवर कैंसर के स्टेज-4 में पहुंचने को लिवर फेलियर भी कहा जाता है. यह एक एडवास्ड कैंसर है, जिसका अर्थ होता है कि कैंसर लिवर से फैलकर शरीर के दूसरे अंगों तक पहुंच चुका है. इसमें लिम्फ नोड्स, फेफड़े, हड्डियों तक कैंसर की कोशिकाएं पहुंच जाती हैं. इस स्टेज को मेटास्टेसिस कहा जाता है. इस स्टेज में आकर लिवर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाता है. इससे लिवर अपना कार्य भी नहीं कर पाता है.
लिवर कैंसर का इलाज कैसे होता है?
मुख्य रूप से कैंसर को फैलने से रोकने के लिए और लक्षणों को कम करने के लिए टारगेटेड थेरेपी, कीमोथेरेपी, सर्जरी, दवाएं, इम्यूनोथेरेपी, पैलिएटिव केयर, गंभीर मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट तक करने की जरूरत पड़ती है. हालांकि, लक्षणों को जितनी जल्दी पहचान कर इलाज शुरू कर दिया जाए, पेशेंट का जान बचाना आसान हो सकता है. कोई भी कैंसर जब स्टेज-4 में पहुंच जाता है तो कई बार ट्रीटमेंट भी असर नहीं करता है और व्यक्ति की जान चली जाती है. लिवर कैंसर हो या कोई अन्य कैंसर, इलाज शुरू होने से लेकर ट्रीटमेंट के बाद भी मरीज को लगातार अपने डॉक्टर से संपर्क में बने रहना बेहद जरूरी है, क्योंकि कई बार कैंसर दोबारा लौट आता है.
लिवर कैंसर से बचाव का उपाय
शराब का सेवन सीमित मात्रा में और कभी-कभार करें.
हेपेटाइटिस का टीका लगवाएं.
डायबिटीज और मोटापा को कंट्रोल में रखें.
बाहर का अनहेल्दी, फैटी चीजों के सेवन से बचें और घर का स्वच्छ, हेल्दी भोजन करें.
हेपेटाइटिस सी से बचाव के लिए इस्तेमाल की गई इंजेक्शन, असुरक्षित यौन संबंध बनाने से बचें.