Agency:एजेंसियां
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कांगो के नॉर्थ किवू प्रांत में रुबाया कोल्टन खदान धंसने से 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में मजदूर, बच्चे और महिलाएं शामिल हैं. यह खदान दुनिया की 15 फीसदी कोल्टन सप्लाई देती है, जिसका इस्तेमाल मोबाइल और टेक इंडस्ट्री में होता है. हादसे ने खनन सुरक्षा और ग्लोबल सप्लाई चेन पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
किंशासा: पूर्वी अफ्रीकी देश कांगो में एक खदान हादसा अब अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन गया है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के नॉर्थ किवू प्रांत में स्थित रुबाया कोल्टन खदान में हुए भीषण भूस्खलन में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. मरने वालों में खदान में काम करने वाले मजदूरों के साथ बच्चे और स्थानीय बाजार में काम करने वाली महिलाएं भी शामिल हैं. यह हादसा बुधवार को हुआ, लेकिन शुक्रवार तक भी मलबे से शव निकालने का काम जारी रहा. स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि असली मृतकों की संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है, क्योंकि कई लोग अब भी लापता हैं.
किस चीज की खदान में हुआ हादसा?
प्रांतीय प्रशासन से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि करीब 20 घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है. राहत और बचाव कार्य बेहद कठिन हालात में किया जा रहा है, क्योंकि यह इलाका दुर्गम है और सुरक्षा हालात भी कमजोर हैं. रुबाया खदान राजधानी गोमा से करीब 60 किलोमीटर दूर स्थित है. यह खदान इसलिए बेहद अहम मानी जाती है क्योंकि यहां से निकलने वाला कोल्टन दुनिया भर में इस्तेमाल होता है. कोल्टन से टैंटलम नाम की धातु बनती है, जिसका इस्तेमाल मोबाइल फोन, कंप्यूटर, एयरोस्पेस उपकरण और गैस टर्बाइन जैसी आधुनिक तकनीकों में किया जाता है.
पूरी दुनिया पर दिख सकता है असर
आंकड़ों के मुताबिक, रुबाया खदान अकेले दुनिया की करीब 15 फीसदी कोल्टन सप्लाई देती है. ऐसे में इस हादसे का असर सिर्फ कांगो तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री पर भी इसका असर पड़ सकता है. स्थानीय लोग इस खदान में बेहद खतरनाक हालात में काम करते हैं. मजदूरों को रोजाना सिर्फ कुछ डॉलर की मजदूरी मिलती है और सुरक्षा के नाम पर लगभग कुछ भी नहीं होता. भारी बारिश के बाद मिट्टी ढहने की आशंका पहले से थी, लेकिन काम नहीं रोका गया.
इस इलाके पर साल 2024 से एक विद्रोही गुट का नियंत्रण बताया जा रहा है. ऐसे में सरकारी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कमजोर है. खनन का ज्यादातर काम हाथों से किया जाता है, जिससे हादसों का खतरा और बढ़ जाता है.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें
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