सूरज की गर्मी नहीं झेल पाया धूमकेतु ATLAS, वैज्ञानिकों ने टूटते हिस्से देखे

खगोलविदों ने हाल ही में सौर मंडल के धूमकेतु C/2025 K1 (ATLAS) की ऐसी तस्वीरें रिकॉर्ड की हैं, जो साफ बताती हैं कि यह धूमकेतु अब बिखर रहा है. 11 नवंबर की रात से इसकी हालत में बड़ा बदलाव दिखाई देने लगा. वैज्ञानिकों का मानना है कि अक्टूबर की शुरुआत में इसके सूरज के बहुत करीब पहुंचने से इसकी मजबूत परत कमजोर हो गई थी.

यह धूमकेतु मई 2025 में खोजा गया था. इसके बाद यह धीरे धीरे ज्यादा चमकने लगा क्योंकि सूरज के पास जाते हुए इसकी जमी हुई बर्फ पिघल कर गैस में बदलने लगी. यही गैस धूमकेतु के चारों तरफ एक चमकीला बादल बनाती है जिसे कोमा कहा जाता है. सूरज से निकली तेज हवा इस गैस को पीछे की तरफ उड़ा देती है, जिससे धूमकेतु की लंबी पूंछ बनती है. हालांकि यह इतना चमकीला नहीं था कि इसे नंगी आंखों से देखा जा सके.

11 नवंबर को टूटा धूमकेतु, तीन हिस्से दिखे
8 अक्टूबर को सूरज के पास से गुजरने के बाद धूमकेतु की हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार नवंबर में इसका ढांचा टूट गया. इटली की एस्यागो वेधशाला के 1.82 मीटर कॉपरनिकस टेलिस्कोप से ली गई तस्वीरों में 11 नवंबर की रात धूमकेतु के तीन बड़े टुकड़े दिखाई दिए.

इटली के वैज्ञानिक माज्जोटा एपिफानी ने बताया कि दो टुकड़े लगभग एक जैसे दिख रहे हैं और इन दोनों की चमक भी करीब करीब बराबर है. इनके बीच की दूरी करीब दो हजार किलोमीटर थी. उन्होंने एक तीसरा और छोटा टुकड़ा भी देखा जो इन दोनों के बाईं तरफ कम चमक के साथ दिखाई दे रहा था.

अगली रात मिली और साफ तस्वीरें
12 और 13 नवंबर को वर्चुअल टेलिस्कोप प्रोजेक्ट के खगोलविद जियानलूका मासी ने भी धूमकेतु की तस्वीरें लीं. उनकी एनीमेशन में साफ दिखता है कि टूटे हुए टुकड़े सिर्फ 24 घंटे में कितनी तेजी से बदलते और एक दूसरे से दूर होते गए.

मासी ने बताया कि उस रात आसमान बेहद साफ था और उनके पास हाई रेजोल्यूशन वाला टेलिस्कोप था, जिसकी वजह से वह इस घटना की बारीकियां रिकॉर्ड कर पाए.

काइपर बेल्ट से आया धूमकेतु
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह धूमकेतु सौर मंडल के बेहद दूर वाले हिस्से यानी काइपर बेल्ट से आया है. यह इलाका बर्फीली वस्तुओं से भरा हुआ है जिन्हें सौर मंडल की शुरुआत का अवशेष माना जाता है.

उम्मीद की जा रही है कि यह धूमकेतु अपनी पहली ही यात्रा में भीतर के सौर मंडल की गर्मी को सहन नहीं कर पाया और इसलिए टूट गया. वैज्ञानिकों के लिए ऐसी वस्तुएं बेहद महत्वपूर्ण होती हैं क्योंकि इन्हें सौर मंडल का टाइम कैप्सूल कहा जाता है. इनका अध्ययन यह समझने में मदद करता है कि हमारे ग्रहों की शुरुआती रचना कैसी रही होगी.

इंटरस्टेलर धूमकेतु 3I/ATLAS से कोई संबंध नहीं
इन दिनों एक और धूमकेतु 3I/ATLAS काफी चर्चा में है, लेकिन C/2025 K1 का उससे कोई संबंध नहीं है. दोनों का नाम सिर्फ इसलिए मिलता है क्योंकि इन्हें ATLAS कार्यक्रम के जरिए खोजा गया था. हाल में 3I/ATLAS के बारे में तरह तरह की अफवाहें भी फैलीं, जिनमें इसे एलियन जहाज तक बताया गया, लेकिन C/2025 K1 एक सामान्य सौर मंडल का धूमकेतु है.

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