दांतों की वजह से भी बढ़ सकता है कॉलेस्ट्रॉल-शुगर! दिल्ली के टॉप डेंटल सर्जन ने क्यों कही ये बात

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गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के कुलपति और मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज़ (MAIDS) के पूर्व निदेशक प्रो. महेश वर्मा ने विश्व प्रोस्थोडॉन्टिस्ट दिवस पर लोगों को दांतों की अनदेखी से स्वास्थ्य बिगड़ने की चेतावनी दी है और लोगों से शरीर की फ‍िटनेस के साथ दांतों की सेहत पर भी फोकस करने की अपील की है.

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दांतों की वजह से भी बढ़ सकता है कॉलेस्‍ट्रॉल, जानें कैसे

Teeth problems and Cholesterol: आज फिटनेस को लेकर जागरुक लोग अपने शरीर को सुडौल बनाने के लिए तो मेहनत करते हैं लेकिन उनमें से बहुत सारे लोग दांतों की सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं. यही वजह है कि शरीर स्वस्थ होने के बजाय नई बीमारियों से घिर जाता है. स्वास्थ्य केवल बीमारी न होने का नाम नहीं, बल्कि बेहतर जीवन जीने का आधार है… ये बातें दिल्ली के टॉप डेंटल सर्जन ने कही हैं.

गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के कुलपति और मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज़ (MAIDS) के पूर्व निदेशक प्रो. महेश वर्मा ने विश्व प्रोस्थोडॉन्टिस्ट दिवस के मौके पर लोगों को जागरुक करते हुए चेतावनी दी कि लोगों को यह समझने की जरूरत है कि दांतों की अनदेखी पूरी सेहत बिगाड़ सकती है. उन्होंने कहा कि दांतों की समस्या के कारण लोग सख्त भोजन नहीं खा पाते और धीरे-धीरे नरम व मैदा-युक्त खाद्य पदार्थों पर निर्भर हो जाते हैं.इससे शरीर में रेशा की कमी हो जाती है. शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और डायबिटीज सहित पाचन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

प्रो. वर्मा ने लोगों से दांतों और मुंह की सेहत को प्राथमिकता देने की अपील की है.उन्होंने कहा कि एक दांत का गिरना भी व्यक्ति की खाने की क्षमता, पोषण और जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है. ऐसे बहुत सारे लोग हैं जिनके मुंह से एक या दो दांत गिर जाता है, लेकिन वे उसे गंभीरता से नहीं लेते और इग्नोर करते रहते हैं.

उन्होंने बताया कि एक दांत की कमी से मुंह का संतुलन बिगड़ जाता है और लोग एक ही तरफ से खाना चबाने लगते हैं. जैसे पैर की एक उंगली में परेशानी होने से चलना मुश्किल हो जाता है, वैसे ही एक दांत की कमी पूरे मुंह की कार्यक्षमता को प्रभावित करती है.

उन्होंने कहा कि प्रोस्थोडॉन्टिस्ट विशेष दंत विशेषज्ञ होते हैं, जो दांतों, जबड़े और मुस्कान की बहाली में प्रशिक्षित होते हैं. जिन लोगों को गलतफहमी है कि डेंटल इम्प्लांट सफल नहीं है या उससे परेशानी बढ़ सकती है, उन्हें समझने की जरूरत है कि डेंटल इम्प्लांट सुरक्षित, सरल प्रक्रिया वाले और आम लोगों के लिए भी किफायती विकल्प हैं. गिरे हुए दांतों को बदलवाना कोई शौक या फैशन नहीं है बल्कि स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन के लिए ये जरूरी है. अच्छे दांत अच्छे पोषण और बेहतर जीवन की नींव हैं.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

अमर उजाला एनसीआर में रिपोर्टिंग से करियर की शुरुआत करने वाली प्रिया गौतम ने हिंदुस्तान दिल्ली में संवाददाता का काम किया. इसके बाद Hindi.News18.com में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर काम कर रही हैं. हेल्थ एंड लाइफस्…और पढ़ें

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