नॉर्थ पोल के ऊपर से हमला कर सकती है ये मिसाइल, रेंज में चीन-अमेरिका सब फेल

नई दिल्‍ली. ट्रंप ने रूस को धमकी देते हुए उसके करीब अपनी दो न्‍यूक्लियर सबमरीन को तैनात कर दिया है. व्‍लादिमीर पुतिन की सेना के पास भी ऐसे-ऐसे हथियार हैं, जिसकी मदद से रूस किसी भी मिनट अमेरिका को मजा चखा सकता है. चलिए आपको रूस के सबसे घातक हथियारों में से एक RS-28 Sarmat मिसाइल के बारे में बताते हैं. नाटो द्वारा इसे SS-X-30 Satan 2 नाम दिया गया है. यह रूस की अत्याधुनिक सुपर-हैवी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है.

यह मिसाइल रूस की सैन्य शक्ति को बढ़ाने के लिए विकसित की गई है और इसका उद्देश्य पुरानी R-36M (SS-18 Satan) मिसाइलों को बदलना है. इसकी डिजाइन और विकास Makeyev Rocket Design Bureau द्वारा शुरू किया गया था और इसे 2000 के दशक में परियोजना के रूप में शुरू किया गया था. पहला सफल परीक्षण 20 अप्रैल 2022 को किया गया था.

खासियत

रेंज: इसकी रेंज लगभग 18,000 किलोमीटर (11,000 मील) है, जो इसे दुनिया की सबसे लंबी दूरी वाली ICBM बनाती है. यह ध्रुवों (North या South Pole) के ऊपर से भी लक्ष्य को भेद सकती है.

वजन और आकार: इसका वजन 208 टन है और लंबाई 35 मीटर है, जो इसे भारी और शक्तिशाली बनाता है.

पेलोड: यह 10-15 परमाणु वारहेड्स (MIRV – Multiple Independently Targetable Reentry Vehicles) ले जा सकता है! इसमें Avangard हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल भी शामिल हो सकते हैं, जो मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम को चकमा दे सकते हैं.

गति: यह मिसाइल हाइपरसोनिक गति (Mach 20+) तक पहुंच सकती है, जिससे इसे ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है.

ईंधन: यह लिक्विड-फ्यूल्ड मिसाइल है, जो भारी पेलोड ले जाने में सक्षम है, लेकिन लॉन्च तैयारी में समय लगता है.

खतरे के देश: Sarmat का पहला टारगेटअमेरिका और नाटो देश है. इसके अलावा यूरोप के पश्चिमी देश भी इसके निशाने पर हैं. क्योंकि यह रूस की परमाणु रणनीति का हिस्सा है. इसके अलावा यह यूक्रेन, जापान, और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए भी खतरा हो सकती है.

ताकत और कमजोरी

ताकत: Sarmat अमेरिका की LGM-30 Minuteman III (रेंज 13,000 किमी) और चीन की DF-41 (रेंज 12,000-15,000 किमी) से रेंज और पेलोड में आगे है. इसका हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल अमेरिकी Ground-Based Midcourse Defense को चुनौती दे सकता है.

कमजोरी: यह सॉलिड-फ्यूल्ड मिसाइलों (जैसे Minuteman III) की तुलना में लॉन्च में धीमी है और तकनीकी खामियों (जैसे 2024 का विस्फोट) से ग्रस्त रही है. इसके अलावा अमेरिका की Space-Based Infrared System इसे डिटेक्ट कर सकती है और भविष्य में अंतरिक्ष-आधारित इंटरसेप्टर इसे निष्क्रिय कर सकते हैं.

.

Source link

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *