खंडवा. मौसम बदलते ही सबसे ज्यादा असर बच्चों की सेहत पर देखने को मिलता है. खासकर ठंड के मौसम में बच्चों में खांसी, सीने में कफ जमना, जुकाम और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत आम हो जाती है. छोटे बच्चे अपनी परेशानी ठीक से बता भी नहीं पाते, ऐसे में माता-पिता की चिंता और बढ़ जाती है. रात के समय खांसी का बढ़ जाना, सीने से घरघराहट की आवाज आना या बार-बार सर्दी लगना इस बात का संकेत है कि बच्चे का श्वसन तंत्र कमजोर पड़ रहा है. मध्य प्रदेश के खंडवा के डॉक्टर अनिल पटेल लोकल 18 को बताते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार बच्चों में ठंड के मौसम में कफ दोष बढ़ जाता है. ठंडी चीजें, आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स, कमजोर इम्युनिटी और बदलता मौसम इसके मुख्य कारण हैं. अच्छी बात यह है कि आयुर्वेद में कुछ ऐसे देसी और सुरक्षित उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर बच्चों को बिना दवा के भी राहत मिल सकती है.
डॉ अनिल पटेल बताते हैं कि बच्चों में कफ जमने के पीछे कई वजहें होती हैं, बार-बार ठंडी चीजें खाना, कमजोर पाचन, मौसम का बदलाव, वायरल इंफेक्शन या एलर्जी. जब कफ ज्यादा बढ़ जाता है, तो वह छाती और फेफड़ों में जमने लगता है, जिससे खांसी और सीने में जकड़न होती है.
5 असरदार देसी उपाय
1. हल्दी वाला गुनगुना दूध
हल्दी में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं. रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में चुटकी भर हल्दी मिलाकर देने से कफ कम होता है और सीने को आराम मिलता है.
2. अदरक और शहद का मिश्रण
अदरक कफ को पिघलाने में मदद करता है. आधा चम्मच अदरक का रस और आधा चम्मच शहद दिन में 1-2 बार दिया जा सकता है. ध्यान रखें कि एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद न दें.
3. तुलसी का काढ़ा
तुलसी को फेफड़ों के लिए अमृत माना जाता है. 5-6 तुलसी के पत्ते और थोड़ा सा अदरक एक कप पानी में उबालें. ठंडा होने पर 2-3 चम्मच बच्चों को दें.
4. भाप दिलवाएं
दिन में एक बार हल्की गुनगुनी भाप दिलाने से छाती में जमा कफ ढीला पड़ता है. छोटे बच्चों के साथ पूरी सावधानी रखें.
5. अजवाइन की पोटली से सेंक
अजवाइन को हल्का गर्म कर कपड़े में बांध लें और बच्चे की छाती और पीठ पर हल्की सेंक दें. इससे सीने की जकड़न में राहत मिलती है.
खानपान का रखें खास ध्यान
डॉक्टर बताते हैं कि ठंड में बच्चों को आइसक्रीम और ठंडी चीजें न दें. गुनगुना पानी, सूप, दलिया और खिचड़ी खिलाएं. ज्यादा मीठा और जंक फूड से भी परहेज करें.
कब जरूरी है डॉक्टर को दिखाना?
अगर बच्चे को सांस लेने में ज्यादा दिक्कत हो, तेज बुखार बना रहे, खांसी 5-7 दिन में ठीक न हो या बच्चा ज्यादा सुस्त दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. बच्चों की सेहत बेहद नाजुक होती है. ऐसे में शुरुआती लक्षण दिखते ही ये देसी उपाय अपनाए जाएं, तो काफी हद तक राहत मिल सकती है. साथ ही बच्चों को गर्म रखें, पोषण का ध्यान रखें और मौसम के हिसाब से उनकी देखभाल करें.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
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