आयुर्वेद में भोजन करने के 13 नियम, 12 को पेरेंट्स के सामने ही तोड़ देते हैं बच्चे

आजकल बच्चों को खाना खिलाना पेरेंट्स के लिए टेड़ी खीर होता जा रहा है. बहुत सारे पेरेंट्स डॉक्टरों के पास इसी समस्या को लेकर पहुंचते हैं कि उनका बच्चा ठीक से खाना नहीं खाता या फिर बिना फोन देखे खाना नहीं खाता. ऐसी कई चीजें हैं जो पेरेंट्स के लिए सिरदर्द होने के साथ ही बच्चों की सेहत के लिए भी ठीक नहीं हैं. हालांकि कई बार पेरेंट्स खुद बहुत ज्यादा चिंतित होने के चलते ऐसे काम कर बैठते हैं, जिसका फायदा बच्चों को कम नुकसान ज्यादा होता है. आयुर्वेद में भोजन करने के 13 नियम हैं, लेकिन आजकल देखें तो इनमें से 12 नियम बच्चे अपने पेरेंट्स के सामने ही तोड़ देते हैं और ये बात पेरेंट्स को भी पता नहीं होती है.

हाल ही में आयुष मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ, नई दिल्ली ने बच्चों के लिए आहार के नियम बताए हैं जिनका पालन अगर बच्चे और बड़े भी करते हैं तो भोजन का पूरा गुण उनके शरीर में जाता है. ये नियम चरक संहिता से लिए गए हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं वो 13 नियम और किन 12 को तोड़ते हैं बच्चे…

ये हैं आहार के नियम, आप भी कर सकते हैं अपना टेस्‍ट

1. गर्म ही खाना चाहिए
अधिकांश माता-पिता बच्चों को गर्म खाना खिलाते हैं और बच्चे खाते भी हैं, लेकिन स्कूल में अक्सर बच्चों को ठंडा टिफिन खाना पड़ता है. ऐसे में कुछ हद तक यह नियम टूट जाता है.

2. स्निग्ध खाना चाहिए
मुलायम खाना भी पेरेंट्स बच्चों को देते हैं, लेकिन आजकल बाजार में मिलने वाले स्नैक्स और जंक फूड न तो खाने में और न ही पचने में स्निग्ध होते हैं.

3. उचित मात्रा में खाना चाहिए
बहुत सारी स्टडीज बताती हैं कि बच्चे आजकल ओवरईटिंग के शिकार हो रहे हैं. टीवी और फोन के सामने भोजन करते हुए उन्हें पता ही नहीं होता कि कितना खाना चाहिए.

4. पिछला भोजन पच जाने पर ही भोजन करना चाहिए
देखा जाता है कि आजकल बच्चे ही नहीं बल्कि पेरेंट्स भी बच्चे को बिना भूख के कई बार खाना खाने के लिए प्रेशर डालते रहते हैं. वे हर दो से 3 घंटे पर बच्चे को कुछ न कुछ खाने के लिए देते हैं, जबकि जरूरी नहीं कि पिछला भोजन पच गया हो.

5. विपरीत प्रकृति का भोजन नहीं करना चाहिए
बच्चे कई बार सर्दी के मौसम में ठंडी चीजें जैसे आइसक्रीम आदि खाते हैं, जबकि गर्मी में गर्म चीजें खा लेते हैं. यहां तक कि पेरेंट्स हेल्थ के लिए जरूरी समझकर ऐसी चीजें बच्चों को खिला देते हैं जो ठीक नहीं है.

6. अनुकूल स्थान पर भोजन करना चाहिए.
आजकल बच्चों की घर में भोजन करने की सबसे प्रिय जगह होती है बेड या बिस्तर. बच्चे सोने की जगह पर बैठकर भोजन इसलिए भी करते हैं क्योंकि बड़े ऐसा करते हैं.

7. अनुकूल उपसाधनों में भोजन करना चाहिए.
सही बर्तनों में भोजन करना चाहिए. बस इसी नियम का पालन घरों में बच्चे आजकल कर रहे हैं.

8. बहुत जल्दी-जल्दी नहीं खाना चाहिए.
स्कूलों में अक्सर खेल और एक्टिविटीज या घरों में भी बच्चे जल्दी जल्दी खाते हैं तो ऐसी स्थिति में उन्हें रोकना चाहिए.

9. बहुत धीरे-धीरे नहीं खाना चाहिए.
यह आदत ज्यादातर बच्चों में आजकल है. बहुत सारे बच्चे टीवी के सामने बैठकर बहुत धीरे धीरे खाना खाते हैं और एक समय के बाद यह खराब आदत बन जाती है.

10. भोजन करते समय बात न करें
यह एक कॉमन खराबी है, ज्यादातर बच्चे ऐसा करते हैं.

11. भोजन करते समय हंसें नहीं.
हंसने पर भी कोई पाबंदी न होने के चलते, अक्सर भोजन का ये नियम टूटता है.

12. अत्यधिक एकाग्रता से भोजन ग्रहण करना चाहिए.
बच्चे भोजन में एकाग्रता के बजाय टीवी या फोन में एकाग्र हो जाते हैं, जिसका खराब असर खाने पर पड़ता है.

13. स्वयं का विचार करके ही भोजन करना चाहिए.
यह एक कॉमन कमी है, आजकल न तो बच्चे और न ही बड़े स्वयं का विचार करके भोजन करते हैं, जबकि उनके सामने बहुत सारी चीजें, टीवी, फोन आदि रहती हैं.

इन नियमों से आप भी अपनी जांच कर सकते हैं, कि आखिर आप आहार के कितने नियमों का पालन करते हैं.

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