छोटी दुकान, बड़ा सपना! कंचन प्रसाद के चिकन-मटन रेसिपी का हर कोई है दीवाना

सिवान :  वैसे तो बिहार स्वादिष्ट मटन के मामले में किसी पहचान का मोहताज नहीं है, लेकिन सिवान जिले के बड़हरिया प्रखंड मुख्यालय में भी एक खास दुकान है, जिसका नाम सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. यह दुकान न सिर्फ अपने लजीज स्वाद के लिए मशहूर है, बल्कि इसलिए भी खास है. क्योंकि इसे एक ही परिवार की तीसरी पीढ़ी चला रही है. यहां मटन बहुत ही अनोखे तरीके से तैयार किया जाता है. आइये जानते हैं इसके बारे में.

30 साल पुरानी है चिकन-मटन की दुकान

दुकानदार कंचन प्रसाद बताते हैं कि पिछले 30 सालों से भी अधिक समय से उनका परिवार इसी धंधे से जुड़ा हुआ है. शुरुआत उनके पिता ने की थी. इसके बाद उनके भाई ने दुकान संभाली. फिर वे खुद इस काम में उतरे और अब पिछले 5 सालों से उनका बेटा भी दुकान चलाने में सहयोग कर रहा है. यही वजह है कि दुकान का स्वाद और भरोसा दोनों पीढ़ी दर पीढ़ी चलता आ रहा है.

चिकन-मटन खाने के लिए लगती है भीड़

कंचन प्रसाद ने बताया कि उनके यहां का चिकन और मटन इलाके में सबसे अधिक पसंद किया जाता है. ग्राहक कहते हैं कि ऐसा स्वाद बड़हरिया में ही नहीं, सिवान के दूसरे क्षेत्रों में भी कम ही मिलता है. दुकान पर रोज भारी भीड़ लगी रहती है और लोग लाइन में लगकर थाली का इंतजार करते हैं. चिकन और मटन खाने वालों की ये दुकान फेवरेट हो गई है. यहां सुबह से शाम तक में लोग 100 प्लेट चट कर जाते हैं.

दुकानदार बताते हैं कि उनके परिवार ने कभी भी रेसिपी से समझौता नहीं किया.यही वजह है कि उनके मसाले और पकाने का तरीका आज भी वैसा ही है. जैसा उनके पिता ने शुरू किया था. वह कहते हैं कि दुकान भले ही पुरानी है, लेकिन स्वाद आज भी उतना ही ताजा और यादगार है. कंचन मानते हैं कि इसी निरंतरता और विश्वास ने उनकी दुकान को एक अलग पहचान दिलाई है.

जानें चिकन-मटन रेसिपी की कीमत

कंचन प्रसाद ने बताया कि वे मटन को सरल रेट पर उपलब्ध कराते हैं. यहां 50, 100, 150 और 200 रुपये की प्लेट मिल जाती है. मटन की फिक्स रेट प्रति दो पीस 150 रुपये प्लेट है. यह दर स्थानीय लोगों की जेब के अनुकूल है और इसी वजह से दुकान पर हर वर्ग के ग्राहक आते हैं. दुकान में चार कर्मचारी काम करते हैं जो सुबह से शाम तक ग्राहकों की मांग पूरी करने में जुटे रहते हैं.

इसी वजह से बड़हरिया बाजार में आने वाला कोई भी व्यक्ति दुकान का नाम सुनते ही खाने की सोच लेता है. खास तौर पर गांवों के लड़के और युवाओं में यहां के चिकन-मटन का स्वाद बेहद लोकप्रिय है. पढ़ने वाले छात्रों से लेकर बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोग, हर दिन बड़ी संख्या में दुकान तक पहुंचते हैं.

150 प्लेट तक लोग कर जाते हैं चट

कंचन प्रसाद का कहना है कि मंगलवार और गुरुवार को दुकान बंद रहती है, लेकिन बाकी सभी दिनों में बिक्री का आंकड़ा 100 से 150 प्लेट के बीच पहुंच जाता है. व्यस्त दिनों में यह संख्या और अधिक भी हो जाती है. बिक्री और ग्राहकों की संख्या को देखते हुए परिवार की मासिक कमाई करीब 30 से 50 हजार रुपये तक हो जाती है.

वे स्वीकार करते हैं कि शुरुआत में कठिनाइयां जरूर थीं. जगह, पहचान और पूंजी की समस्या सामने थी, लेकिन कड़ी मेहनत और ग्राहकों के भरोसे से कारोबार खड़ा हुआ और धीरे-धीरे दुकान ने अच्छी पकड़ बना ली. आज हालात ऐसे हैं कि जिन लोगों ने एक बार यहां का मटन या चिकन खाया, वे दोबारा लौटकर जरूर आते हैं.

व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाहते हैं  कंचन

कंचन प्रसाद और उनका परिवार इस व्यवसाय को आगे और बढ़ाना चाहते हैं. उनका सपना है कि आने वाले समय में उनकी दुकान का विस्तार हो और स्वाद का यह सफर अगले कई दशकों तक चलता रहे. उनकी मानें तो मेहनत, ईमानदारी और स्वाद अगर सही हो, तो छोटे से छोटा कारोबार भी एक पहचान बन सकता है और बड़हरिया इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.

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