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Poultry farming success story : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्व-सहायता समूह आज ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहे हैं. कांकेर जिले के अंतागढ़ स्थित ग्राम बेलोंडी की अनुसुइया नेताम इसकी मिसाल हैं, जिन्होंने मुर्गीपालन व्यवसाय अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं.
खेती और मजदूरी पर निर्भर परिवार की आय अनिश्चित थी, जिससे घर खर्च और बच्चों की पढ़ाई में दिक्कतें आती थीं. इसी परिस्थिति ने अनुसुइया नेताम को नया रास्ता तलाशने के लिए प्रेरित किया.
जय मां संतोषी स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, ऋण प्रबंधन और छोटे व्यवसाय की जानकारी मिली. समूह से 30 हजार रुपए का ऋण लेकर उन्होंने मुर्गीपालन शुरू किया.
करीब 33 हजार 360 रुपए के शुरुआती निवेश से 360 देशी चूजों की खरीदी की गई. दाना, बर्तन, वैक्सीन और अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था कर व्यवसाय को व्यवस्थित रूप दिया गया.
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कुछ महीनों की देखभाल के बाद मुर्गियां बिक्री के लिए तैयार हुईं. लगभग 200 मुर्गियां बेचकर 55 हजार रुपए की आय हुई, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई.
स्व-सहायता समूह और ग्राम संगठन के सहयोग से अनुसुइया नेताम आज आत्मनिर्भर बन चुकी हैं. उनकी सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी प्रेरित होकर स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ा रही हैं.
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