नहाय-खाय’ के साथ छठ महापर्व का शुभारंभ: आज होगा ‘खरना’; सोमवार को दिया जाएगा पहला अर्घ्य – Indore News

चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा शनिवार से ‘नहाय-खाय’ के साथ आरंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने अपने घरों की सफाई कर पवित्र स्नान किया और फिर मिट्टी के चूल्हे पर लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल बनाकर सात्विक भोजन ग्रहण किया। इसी के साथ छठ महापर्व की पावन शुरुआत हु

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रविवार को व्रतधारी ‘खरना’ मनाएंगे। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गन्ने के रस में बनी खीर, दूध-चावल का पिठ्ठा और घी लगी रोटी बनाकर सूर्य भगवान को अर्पित करेंगे। प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घंटे के कठिन निर्जल उपवास का संकल्प लेंगे।

पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान मध्य प्रदेश के अध्यक्ष ठाकुर जगदीश सिंह और महासचिव केके झा ने कहा कि छठ महापर्व पूरी तरह प्रकृति और सात्विकता की उपासना का प्रतीक है। व्रती सूर्य भगवान की आराधना करते हैं और बांस के सूप में मौसमी फल जैसे गन्ना, सुथनी, केला, सेब, अनार, नारियल आदि चढ़ाते हैं। यह पर्व मानव और प्रकृति के अटूट संबंध का प्रतीक है।

लौकी-चावल से होती है शुभ शुरुआत ड्रीम सिटी निवासी सुषमा झा ने बताया कि परंपरा के अनुसार छठ व्रत ‘नहाय-खाय’ से शुरू होता है। लौकी को सात्विक और पवित्र माना गया है। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है और पाचन के लिए भी हल्की होती है। इसलिए व्रत का पहला भोजन लौकी-चावल से किया जाता है, ताकि आगे के उपवास के दौरान शरीर ऊर्जावान रहे।

पूरे शहर में छठ घाटों पर उमड़ेगी आस्था इस बार शहर में करीब 200 घाटों पर छठी मैया की पूजा की जाएगी। प्रमुख स्थानों में विजय नगर, तुलसी नगर, समर पार्क, निपानिया, देवास नाका, मांगल्या, स्कीम 78, सुखलिया, श्याम नगर एक्सटेंशन, शंखेश्वर सिटी, टिगरिया बादशाह, सूर्य मंदिर कैट रोड, सिलिकॉन सिटी, कालानी नगर, पिपलियाहना तालाब, सिरपुर तालाब आदि शामिल हैं। पूर्वांचल विशेषकर बिहारी समुदाय के श्रद्धालु सूर्य देव से परिवार, समाज और देश की खुशहाली की कामना करेंगे।

महिलाएं सजाएंगी सूप और टोकरी में प्रसाद

तुलसी नगर निवासी शारदा सिंह, जो पिछले कई वर्षों से अपने परिवार और समाजजनों के साथ छठ पूजा करती हैं, ने बताया कि खरना के अगले दिन सुबह से महिलाएं ठेकुआ, गुजिया, पूड़ी, पुआ जैसे पारंपरिक पकवान मिट्टी के चूल्हे पर बनाती हैं। इन्हें सूप और टोकरी में फल, नारियल और दीपक के साथ सजाकर घाट ले जाया जाता है। शाम को व्रती कमर-भर पानी में खड़े होकर सूर्यास्त के समय संध्या अर्घ्य देती हैं।

27 को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य, 28 को उगते सूर्य को समर्पण सोमवार, 27 अक्टूबर को छठ पर्व के तीसरे दिन व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगे। महापर्व का समापन मंगलवार, 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देने और परिवार की मंगलकामना के साथ होगा।

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