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Chhatarpur News: अनुज ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने 5 साल की उम्र से ही राजस्थान के लोकगीत गाने शुरू कर दिए थे. उनका परिवार लंगा समुदाय से आता है और इस समुदाय में 7 पीढ़ियों से यह परंपरा चली आ रही है. अनुज आज न केवल राजस्थान बल्कि भारत के हर राज्य में जाकर राजस्थानी लोकगीत प्रस्तुत करते है. इसके अलावा, वे अन्य देशों में भी जाकर अपने फोक कल्चर को प्रस्तुत करते है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा.
आज हम राजस्थान के युवा अनुज की बात कर रहे है. जिन्होंने राजस्थानी लोकगीत गायकी को अपना करियर चुना है. उनकी आवाज इतनी सुरीली है कि अब वे राजस्थान ही नहीं, अन्य राज्यों में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरते है. वे लंगा समुदाय से आते है. जिसमें 7 पीढ़ियों से राजस्थानी लोकगीत गाने-बजाने की परंपरा है.
अनुज ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने 5 साल की उम्र से ही राजस्थान के लोकगीत गाने शुरू कर दिए थे. उनका परिवार लंगा समुदाय से आता है और इस समुदाय में 7 पीढ़ियों से यह परंपरा चली आ रही है.
अनुज आज न केवल राजस्थान बल्कि भारत के हर राज्य में जाकर राजस्थानी लोकगीत प्रस्तुत करते है. इसके अलावा, वे अन्य देशों में भी जाकर अपने फोक कल्चर को प्रस्तुत करते है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा.
अनुज बताते है कि उनका जन्म लंगा समुदाय में हुआ है. जहां 7 पीढ़ियों से राजस्थानी लोकगीत गाने-बजाने की परंपरा है. इसे उन्होंने बचपन से ही अपनाया. उनके परिवार में राजस्थानी लोकगीत गाना एक सपना माना जाता है. वे चाहते है कि इस परंपरा को जीवित रखे क्योंकि आधुनिक समय में यह लुप्त होती जा रही है. इसलिए वे हर जगह जाकर राजस्थानी लोकगीत का प्रचार-प्रसार करते है.
अनुज बताते हैं कि राजस्थानी लोकगीत की शुरुआत वेलकम सोंग से होती है। यह है वेलकम सोंग “केसरिया बालम पधारो हमारे देश”. इसके बाद “साजन आया है सखी, मैं कई मन वार करा, थाड़ भरा गज मोतिया से, मैं ऊपर नैन धरा जी” गीत प्रस्तुत किया जाता है. यह गीत राजस्थान का एक पुराना लोकगीत है जो एक महिला अपने पति के घर लौटने पर गाती है.
हाल ही में छतरपुर जिले के खजुराहो में आदिवर्त स्थापना के तीसरे समारोह में अनुज ने राजस्थानी लोकगीत की प्रस्तुति देकर सभी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया था.
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