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Success Story: बिहार के छपरा जिले के युवा किसान अभिषेक कुमार ने पारंपरिक नर्सरी व्यवसाय को वैज्ञानिक पद्धति और प्रशिक्षण से जोड़कर नई पहचान बनाई है. परिवार की तीसरी पीढ़ी से जुड़े इस काम को उन्होंने आधुनिक तकनीक और हाइब्रिड प्रयोगों के जरिए आगे बढ़ाया. उनकी नर्सरी में टाटा सेंचुरी, डच रोज और ब्रिटिश रोज सहित 50 से अधिक वैरायटी के गुलाब तैयार किए जाते हैं. खास बात यह है कि कलम की तकनीक से एक ही पौधे में अलग-अलग रंगों के फूल खिलाए जा रहे हैं, जो ग्राहकों को बेहद आकर्षित करते हैं. जैविक खाद के उपयोग और गुणवत्ता के कारण उनकी नर्सरी आज इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है. रिपोर्ट- विशाल कुमार
बिहार के युवा अब पारंपरिक खेती के बजाय तकनीक और प्रशिक्षण के दम पर कृषि को लाभ का सौदा बना रहे हैं. छपरा के युवा प्रगतिशील किसान अभिषेक कुमार इसका जीता-जागता उदाहरण हैं. अभिषेक ने अपनी पुश्तैनी फूलों की नर्सरी को वैज्ञानिक पद्धति से जोड़कर जिले में एक नई पहचान बनाई है.
अभिषेक बताते हैं कि उनके परिवार की यह तीसरी पीढ़ी है जो नर्सरी के व्यवसाय से जुड़ी है. उनके पूर्वज दूसरे शहरों से फूल और पौधे खरीदकर बेचा करते थे. जिससे मुनाफा कम होता था. लेकिन अभिषेक ने आत्मा से विधिवत प्रशिक्षण लिया और खुद ही पौधे तैयार करने की तकनीक सीखी.
आज वे न सिर्फ पौधे तैयार कर रहे हैं, बल्कि हाइब्रिड वैरायटी के साथ प्रयोग कर अद्भुत परिणाम दे रहे हैं. अभिषेक की नर्सरी की सबसे बड़ी खासियत उनके द्वारा तैयार किए गए टाटा सेंचुरी गुलाब हैं. इन गुलाबों की विशेषताएं ग्राहकों को उनकी ओर खींच लाती हैं. जैसे मल्टीकलर का जादू.
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एक ही फूल के अंदर कई रंग समाहित होते हैं, जो देखने में बेहद आकर्षक लगते हैं. अभिषेक ने कलम के माध्यम से एक ही पौधे में अलग-अलग रंगों के फूल खिलाने की तकनीक विकसित की है. जहां आम गुलाब जल्दी मुरझा जाते हैं, वहीं अभिषेक के हाइब्रिड गुलाब 15 से 20 दिनों तक खिले रहते हैं.
इन पौधों में कांटे बेहद कम होते हैं. जिससे इन्हें संभालना आसान होता है. अभिषेक के पास डच रोज, ब्रिटिश रोज और टाटा सेंचुरी सहित अंग्रेजी गुलाब की 50 से अधिक वैरायटी उपलब्ध हैं.
अभिषेक अपनी नर्सरी में रसायनों के बजाय जैविक खाद का उपयोग करते हैं. उनका मानना है कि जैविक खाद से पौधों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और फूलों की चमक व खुशबू लंबे समय तक बरकरार रहती है. इसी गुणवत्ता के कारण छपरा शहर के थाना चौक स्थित उनकी नर्सरी पर ग्राहकों का तांता लगा रहता है.
सबसे कम उम्र के प्रगतिशील किसान होने का गौरव प्राप्त करने वाले अभिषेक अब अन्य किसानों को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं. उनका कहना है कि यदि युवा किसान वैज्ञानिक पद्धति अपनाएं, तो फूलों की खेती में अपार संभावनाएं हैं. अभिषेक की सफलता यह साबित करती है कि हुनर और सही मार्गदर्शन मिले तो मिट्टी से भी सोना उगाया जा सकता है.
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