चैत्र नवरात्रि आज से, घट स्थापना के लिए 8 मुहूर्त: जानिए नौ दिनों की आसान पूजन विधि, नवरात्रि व्रत और पूजा से जुड़े सवालों के जवाब

6 घंटे पहले

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आज से चैत्र नवरात्रि शुरू हो गई है। नवरात्रि 19 से 27 मार्च तक रहेगी। पहले दिन घट स्थापना के लिए 8 मुहूर्त रहेंगे। वसंत ऋतु में आने से इसे वासंती नवरात्र भी कहते हैं।

हिंदू नववर्ष के साथ शुरू होने के कारण ये साल की पहली नवरात्रि होती है। इन दिनों देवी पूजा के साथ व्रत पर ज्यादा जोर दिया जाता है। वजह ये है कि आयुर्वेद के मुताबिक वसंत ऋतु शुरू होते ही बीमारियां बढ़ती हैं। माना जाता है इस मौसम में खानपान पर ध्यान देने से पूरे साल बीमार नहीं होते।

देवी पुराण के अनुसार साल में दो नवरात्रि बहुत खास होती है। पहली वसंत ऋतु (मार्च-अप्रैल) में होती है। इसे चैत्र नवरात्र कहते हैं। दूसरी शरद ऋतु (सितंबर-अक्टूबर) में आती है। इसे शारदीय नवरात्र कहते हैं।

अब जानिए नवरात्रि से जुड़े सवाल और उनके जवाब

सवाल: कलश स्थापना क्यों करते हैं? जवाब: मिट्टी का कलश पृथ्वी तत्व का प्रतीक माना जाता है। इसमें जल और वायु तत्व होते हैं और पास रखा दीपक अग्नि तत्व का प्रतीक होता है। कलश में आकाश तत्व यानी ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा का आवाहन करना ही घट स्थापना कहलाता है। जल से सृष्टि की उत्पत्ति मानी गई है और जल में सभी देवी-देवताओं का निवास माना जाता है, इसलिए कलश में शक्ति का आवाहन किया जाता है।

सवाल: नवरात्रि में हर दिन एक देवी की पूजा क्यों करते हैं, क्या नौ दिनों तक सिर्फ देवी दुर्गा की पूजा भी कर सकते हैं ? जवाब: हां, सिर्फ देवी दुर्गा की पूजा भी कर सकते हैं, देवी भागवत के अनुसार नवरात्रि में हर दिन देवी दुर्गा के ही एक रूप की पूजा होती है। इस ग्रंथ में कहा है कि नवरात्रि में देवी को नौ रूपों में पूजना चाहिए। वहीं, मार्कंडेय पुराण में ब्रह्मा जी ने नौ दुर्गाओं के नाम और उनका महत्व बताया है। ये नवदुर्गा ही देवी के नौ रूप है। नवदुर्गा-पूजन एक पुरानी शास्त्रीय परंपरा है, जिसका जिक्र 8वीं सदी में मिले ग्रंथों में मिलता है।

सवाल: नवरात्रि व्रत क्यों करते हैं? जवाब: नवरात्रि व्रत से खानपान की आदतों में संयम आता है। व्रत के दौरान कम भोजन मिलने पर शरीर अपनी कमजोर कोशिकाओं को तोड़कर ऊर्जा बनाता है। इससे अच्छी कोशिकाएं बची रहती हैं और शरीर स्वस्थ रहता है। इस प्रक्रिया को ऑटोफेजी कहते हैं। जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओशुमी को इस प्रक्रिया के पीछे का विज्ञान समझाने के लिए 2016 में मेडिसिन का नोबेल पुरस्कार मिला। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग में मार्क मैटसन की रिसर्च के मुताबिक उपवास शरीर को हल्के अच्छे स्ट्रेस में डालता है, जिससे कोशिकाएं मजबूत होती हैं, शरीर की क्षमता बढ़ती है और उम्र बढ़ने की संभावना भी ज्यादा होती है।

सवाल: व्रत रखने के नियम और कायदे क्या हैं? जवाब: व्रत में केवल खानपान का ही नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म का भी संयम रखा जाता है। इससे शारीरिक और मानसिक, दोनों सेहत अच्छी रहती है। इन्हें मानसिक, वाचिक और कायिक व्रत कहा जाता है। मानसिक व्रत में काम, क्रोध और लोभ जैसे विचारों का त्याग किया जाता है। वाचिक व्रत में सच बोलते हैं और ऐसी बात नहीं कहते जिससे किसी को ठेस पहुंचे। कायिक व्रत में शारीरिक हिंसा से बचते हैं और ऐसा कोई काम नहीं करते जिससे किसी को नुकसान हो।

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