सेलेब्रिटी,अरबपति भी अपने राज इस तिजोरी में छुपाते हैं! दुनिया में सिर्फ एक…

Agency:एजेंसियां

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London private vault: लंदन की IBV वॉल्ट दुनिया की सबसे सुरक्षित प्राइवेट तिजोरियों में से एक है. यहां स्टील, बायोमेट्रिक सुरक्षा और बुलेटप्रूफ ग्लास लगे हैं.

सेलेब्रिटी,अरबपति भी अपने राज इस तिजोरी में छुपाते हैं! दुनिया में सिर्फ एक...लंदन का प्राइवेट वॉल्ट.

लंदन के वेस्ट एंड इलाके में एक ऐसी बिल्डिंग है, जिसे देखकर लगता है मानो किसी हॉलीवुड क्राइम-थ्रिलर की शूटिंग चल रही हो. स्टील से ढकी दीवारें, बायोमेट्रिक सिक्योरिटी, आंख और उंगली का स्कैन, कार्ड-रीडर, बुलेटप्रूफ ग्लास, सब कुछ इतना हाईटेक कि सोचकर ही दिमाग घूम जाए. इस जगह को कहते हैं IBV International Vaults. पांच साल पुरानी ये प्राइवेट वॉल्ट सर्विस यूरोप की सबसे सुरक्षित तिजोरियों में गिनी जाती है.

यहां बिना तीन लेयर की पहचान के कोई अंदर घुस ही नहीं सकता. पहले फिंगरप्रिंट, फिर आई-स्कैन और आखिर में इलेक्ट्रॉनिक कार्ड. उसके बाद भी “मैन ट्रैप” नाम का एक जोन आता है, जहां दो गेट्स और ऐसी बुलेटप्रूफ ग्लास लगी है जिस पर AK-47 की गोलियां भी बेअसर हैं. 24 घंटे सीसीटीवी, अलार्म और यहां तक कि फ्लड डिटेक्टर भी लगे हैं. यहां का मैनेजिंग डायरेक्टर शॉन होए गर्व से कहते हैं अगर यहां रात में बाहर कोई लोमड़ी भी घूम जाए, हमें पता चल जाता है.”

अब सोचिए, इतनी सुरक्षा आखिर किसलिए? दरअसल, इस वॉल्ट में 40 से 60 मिलियन पाउंड (करीब 450 से 600 करोड़ रुपये) की चीज़ें रखी हुई हैं. इसमें सोना-चांदी, नकदी, महंगे हैंडबैग, पेंटिंग्स, यहां तक कि राजघरानों से मिले गिफ्ट्स तक मौजूद हैं. लेकिन सबसे दिलचस्प हैं वो चीजें जिनकी कीमत पैसों में नहीं लगाई जा सकती जैसे फैमिली फोटो, खिलौने, लिमिटेड एडिशन पोकेमॉन कार्ड्स या फिर टॉय सोल्जर्स.

कुछ लोग यहां अपनी पर्सनल बातें छुपाने के लिए भी चीजें रखते हैं. जैसे पति अपनी पत्नी से या पत्नी पति से कोई राज़ छुपा ले. कई लोग वसीयत, प्रॉपर्टी पेपर और लीगल डॉक्यूमेंट्स रखते हैं ताकि मौत के बाद ही वो सामने आएं.

क्लाइंट कौन हैं, इस पर होए ज्यादा नहीं बोलते. बस इतना कहते हैं कि यहां आम लोग भी आते हैं और साथ ही सेलिब्रिटी, स्पोर्ट्स स्टार्स, विदेशी शहजादे, और अरबपति भी. कीमत सुनकर आप चौंक जाएंगे सबसे छोटी तिजोरी की सालाना फीस करीब 1 लाख रुपये से शुरू होती है और सबसे बड़ी तिजोरी सालाना 17 लाख रुपये तक में मिलती है.

कंपनी क्लाइंट्स से ये नहीं पूछती कि वो क्या रख रहे हैं. बस ये नियम है कि ड्रग्स, अवैध पैसे या बैन की गई चीजें यहां नहीं रख सकते. हालांकि आलोचक मानते हैं कि इस लचीलेपन का गलत फायदा भी उठाया जा सकता है. अमेरिका में एक ऐसी ही कंपनी पर एफबीआई ने छापा मारा था और 800 करोड़ से ज्यादा का कैश जब्त किया था.

वैसे, सवाल ये भी है कि जब सबकुछ डिजिटल हो गया है तो तिजोरी की जरूरत क्यों? बैंक तो अब धीरे-धीरे लॉकर की सर्विस खत्म कर रहे हैं. लेकिन IBV जैसी कंपनियां मानती हैं कि आज भी लोगों को फिजिकल चीजें सुरक्षित रखने की जरूरत है. खासकर जब सोने की कीमत आसमान छू रही है और दुनियाभर में राजनीतिक अस्थिरता है.

IBV की शुरुआत 2004 में साउथ अफ्रीका से हुई थी और अब इसके 40 हजार से ज्यादा मेंबर दुनिया भर में हैं. लंदन वाली ब्रांच में हर क्लाइंट को सिर्फ एक ही चाबी मिलती है. कंपनी के पास बैकअप चाबी तक नहीं होती. अगर वो एक चाबी खो गई तो लॉक तोड़ने के लिए स्पेशलिस्ट बुलाना पड़ता है. यानी यहां मालिक के अलावा कोई और तिजोरी खोल ही नहीं सकता.

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