Cauliflower Side Effects: फूलगोभी भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में एक बेहद लोकप्रिय सब्ज़ी है. इसे लोग कभी भुजिया बनाकर खाते हैं, तो कभी पराठों में भरकर खाते हैं. हाल के वर्षों में तो इसका इस्तेमाल लो-कार्ब डाइट के लिए चावल और पिज़्ज़ा क्रस्ट के विकल्प के रूप में भी होने लगा है. इसका कारण यह है कि फूलगोभी में कैलोरी बेहद कम होती है और पोषण खूब ज़्यादा होता है. विटामिन, मिनरल, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फूलगोभी को सुपरफूड की तरह देखा जाता है. यही कारण है कि हेल्थ कॉन्शस लोग इसका ज्यादा सेवन करने लगे हैं. मगर विशेषज्ञों का कहना है कि हर सेहतमंद चीज़ की तरह फूलगोभी भी अगर हद से ज्यादा खाई जाए या सही तरीके से पकाई न जाए तो कई तरह की दिक्कतें खड़ी कर सकती है. हाल ही में प्रकाशित अध्ययनों में सामने आया है कि फूलगोभी को कैसे पकाया जाता है. क्योंकि पकाने का तरीका से उसके पोषण मूल्य पर सीधा असर डालता है. साथ ही, जरूरत से ज्यादा खाने पर यह पाचन समस्या, थायरॉइड पर असर, किडनी स्टोन या एलर्जी जैसी परेशानियों का कारण भी बन सकती है.
क्यों होता है साइड इफेक्ट्स
1. पकाने का तरीका गलत- टीओआई के मुताबिक वैज्ञानिकों ने पाया है कि फूलगोभी को जिस तरह पकाया जाता है, उसका उसके न्यूट्रिशन पर बड़ा असर पड़ता है. फूलगोभी में पाए जाने वाले कंपाउड जैसे ग्लूकोसिनोलेट (सिनिग्रिन), फिनोल्स और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है. लेकिन अगर हम फूलगोभी को उबालते हैं तो इनमें से कई ज़रूरी पोषक तत्व पानी में घुलकर कम हो जाते हैं. जबकि हल्का-सा स्टीम करने पर यह अधिकांश पोषक तत्व बरकरार रहते हैं. यही वजह है कि विशेषज्ञ उबली हुई बजाय स्टीम या हल्की रोस्टेड फूलगोभी खाने की सलाह देते हैं ताकि विटामिन और हेल्दी कंपाउंड्स का फायदा शरीर को मिल सके.
2. ज़्यादा खाने से पेट और थायरॉइड पर असर-फूलगोभी फाइबर से भरपूर होती है और इसमें रैफिनोज़ नामक एक तरह की शुगर मौजूद रहती है. यह कुछ लोगों के लिए पचाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में फूलगोभी का ज़्यादा सेवन गैस, पेट फूलना और ऐंठन जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है. खासतौर पर जिन लोगों को इर्रिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) की समस्या है, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए. इसके अलावा फूलगोभी और अन्य क्रूसिफेरस सब्ज़ियों में गोइट्रोजेन्स नामक कंपाउड भी होते हैं, जो आयोडीन के अवशोषण में बाधा डाल सकते हैं. थायरॉइड की समस्या वाले लोगों को यह दिक्कत बढ़ा सकता है. हालांकि हल्की स्टीमिंग से यह असर काफी हद तक कम हो जाता है, इसलिए थायरॉइड रोगियों को इसे कच्चा या ज्यादा मात्रा में खाने से बचना चाहिए.
3. किडनी स्टोन, एलर्जी और दवा इंटरैक्शन का खतरा- फूलगोभी में मध्यम मात्रा में ऑक्सलेट्स पाए जाते हैं. जो लोग पहले से किडनी स्टोन की समस्या से जूझ रहे हों, उनके लिए इसका अधिक सेवन स्टोन बनने का खतरा बढ़ा सकता है. वहीं कुछ लोगों में फूलगोभी से एलर्जी भी हो सकती है. इससे त्वचा पर खुजली, होंठ या गले में सूजन और गंभीर स्थिति में सांस लेने में तकलीफ तक हो सकती है. इसके अलावा फूलगोभी में मौजूद विटामिन के खून को जमाने में मदद करता है. ऐसे में जो लोग खून पतला करने वाली दवा (ब्लड थिनर) लेते हैं, उनके लिए अचानक ज्यादा फूलगोभी खाना दवा के असर को बिगाड़ सकता है. यही कारण है कि ऐसी दवाएं लेने वाले मरीज हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही फूलगोभी की मात्रा तय करें.