अमेरिका की धमकी के आगे नहीं झुका कनाडा, अब भारत की शरण में पहुंचा, ट्रंप को मिलेगा मुंहतोड़ जवाब

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Canada looks at India for Economy Boost: अमेरिका जिन देशों को झटका दे रहे है, वे समाधान के तौर पर भारत का रुख कर रहे हैं. भले ही वो यूरोपियन यूनियन के देश हों या फिर कनाडा. ट्रंप की टैरिफ की धमकी के बाद कनाडा अब व्यापारिक मजबूती के लिए भारत की ओर देख रहा है.

कनाडा बढ़ा रहा भारत से व्यापारिक रिश्ते.

Canada-India Relation: अमेरिका के साथ बढ़ते व्यापारिक तनाव के बीच कनाडा ने साफ कर दिया है कि वह अपने व्यापारिक रिश्तों को विविध बनाने की रणनीति से पीछे नहीं हटेगा. कनाडा की विदेश मंत्री भारत के दौरे पर हैं और उन्होंने कहा कि देश अब केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रह सकता और अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ाना उसकी मजबूरी है. पहले उसने चीन के साथ व्यापारिक समझौता किया और अब वो भारतीय बाजार में दिलचस्पी ले रहा है.

कनाडा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को चेतावनी दी थी कि अगर कनाडा चीन के सामान के लिए अमेरिका में ‘ड्रॉप ऑफ पोर्ट’ बना, तो सभी कनाडाई उत्पादों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा. इसके अलावा प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी जल्द भारत आने की योजना बना रहे हैं, जबकि मार्च में वे ऑस्ट्रेलिया का दौरा करेंगे.

भारत के साथ ट्रेड डील चाहता है कनाडा?

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने कहा – ‘हमें कनाडाई अर्थव्यवस्था को सुरक्षित और मजबूत बनाना है और इसके लिए व्यापार को अलग-अलग देशों में फैलाना बेहद जरूरी है. यही वजह है कि हम चीन गए, अब भारत जाएंगे और किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेंगे.’ इसी रणनीति के तहत कनाडा के ऊर्जा मंत्री टिम हॉजसन भारत के गोवा दौरे पर जा रहे हैं, जहां वे एक ऊर्जा सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और भारतीय उद्योग जगत के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे. इस दौरान दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स, यूरेनियम और लिक्विफाइड नेचुरल गैस को लेकर सहयोग और संभावित सौदों पर चर्चा होने की उम्मीद है. कनाडा के पास इन संसाधनों का बड़ा भंडार मौजूद है.

कनाडा का चीन से क्या रिश्ता?

हाल ही में चीन और कनाडा के बीच एक समझौता हुआ है, जिसके तहत कनाडा चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैरिफ कम करेगा और बदले में चीन से खाद्य उत्पादों, जैसे कैनोला और बीफ, पर व्यापारिक रियायतें मिलेगी. इस पर सफाई देते हुए अनीता आनंद ने कहा कि कनाडा चीन के साथ कोई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट नहीं कर रहा है, लेकिन वह अगले 10 वर्षों में अमेरिका के बाहर अपने निर्यात को दोगुना करने की योजना पर काम करता रहेगा.

क्यों अमेरिका से बिगड़े रिश्ते?

अनीता आनंद ने यह भी कहा कि अमेरिका और कनाडा के रिश्ते अब भी मजबूत हैं और आगे भी बने रहने की उम्मीद है. दोनों देशों के बीच व्यापार दुनिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में से एक है, भले ही टैरिफ को लेकर तनाव चल रहा हो. अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी कहा कि अमेरिका और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं आपस में गहराई से जुड़ी हैं और कई उत्पाद निर्माण के दौरान छह बार सीमा पार करते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अमेरिका नहीं चाहता कि चीन अपने सस्ते सामान कनाडा के जरिए अमेरिकी बाजार में उतारे.

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Prateeti Pandey

News18 में इंटरनेशनल डेस्क पर कार्यरत हैं. टीवी पत्रकारिता का भी अनुभव है और इससे पहले Zee Media Ltd. में कार्य किया. डिजिटल वीडियो प्रोडक्शन की जानकारी है. टीवी पत्रकारिता के दौरान कला-साहित्य के साथ-साथ अंतरर…और पढ़ें

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अमेरिका की धमकी के आगे नहीं झुका कनाडा, अब भारत की शरण में पहुंचा

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