क्या कम खाने से कमजोर हो सकता है शरीर? आयुर्वेद में बताया गया है यह नियम

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Benefits of Portion Control: ज्यादा खाना शरीर को ताकत देने के बजाय पाचन तंत्र पर दबाव डालता है और सुस्ती का कारण बनता है. कम और बैलेंस्ड डाइट लेने से न केवल मेटाबॉलिज्म तेज होता है, बल्कि मोटापा, डायबिटीज और हार्ट डिजीज का रिस्क भी कम हो जाता है. आयुर्वेद कहता है कि खाना खाते वक्त पेट को हमेशा 30% खाली रखना चाहिए.

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कम खाने से शरीर में चुस्ती और फुर्ती बनी रहती है.

Important Ayurvedic Diet Rules: अक्सर कहा जाता है कि लोगों को भरपेट भोजन करना चाहिए. कई बार लोग टेस्टी खाना खाते हैं और ओवरईटिंग कर लेते हैं. माना जाता है कि ज्यादा खाना खाने से शरीर में ताकत बढ़ सकती है, लेकिन यह सच नहीं है. ज्यादा खाने से पेट संबंधी रोग बढ़ने लगते हैं और इससे सेहत को कोई फायदा नहीं होता है. आयुर्वेद में साफ कहा गया है कि कम खाना सेहत सुधारने के लिए जरूरी होता है. लोगों को कभी भी भरपेट खाना नहीं खाना चाहिए. खाना खाते वक्त पेट में कुछ जगह खाली रखनी चाहिए, ताकि शरीर को फायदा मिल सके. आयुर्वेद का यह नियम सेहत के लिए रामबाण हो सकता है.

हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ज्यादा खाने से पेट से जुड़ी परेशानियां परेशान करने लगती हैं. ज्यादा खाना न सिर्फ पाचन की गति को मंद करता है, बल्कि पेट और पाचन तंत्र पर भी दबाव बनाता है. ऐसे में बार-बार गैस की परेशानी और पेट दर्द की शिकायत होने लगती है. ऐसे में हल्का और संतुलित डाइट लेना फायदेमंद होता है. कम और संतुलित आहार लेने से पेट हल्का रहता है और खाना बेहतरीन तरीके से पचता है. पाचन तंत्र पर कम दबाव पड़ता है, गैस, ब्लोटिंग और कब्ज की समस्या कम होती है. इसके साथ शरीर की ऊर्जा बचती है. भारी खाने को पचाने में शरीर को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है और ऐसे में शरीर सुस्ती और मोटापे का शिकार हो जाता है. जब आप हल्का खाते हैं, तो शरीर को इसे पचाने के लिए कम मेहनत करनी पड़ती है.

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संतुलित और कम खाना शरीर में एनर्जी और चुस्ती दोनों बनाए रखता है. कम और संतुलित डाइट लेने से वजन भी कंट्रोल रहता है. इससे मोटापा, डायबिटीज और हार्ट डिजीज जैसी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है. इसके अलावा कम खाने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है. कई रिसर्च में भी पाया गया है कि सही डाइट लेने से पाचन अग्नि तेजी से खाने को पचाती है और शरीर को पूरा पोषण मिलता है. कम खाना शरीर में सूजन और एसिड रिफ्लक्स का खतरा कम हो जाता है. ज्यादा भारी भोजन से शरीर में एसिड तेजी से बढ़ता है और पाचन से संबंधी परेशानी तेजी से बढ़ने लगती हैं.

अब सवाल उठता है कि लोगों को रोज कितना भोजन करना चाहिए? आयुर्वेद में भोजन को लेकर कई नियम बताए गए हैं और इन्हें अपनाने से सेहत में सुधार हो सकता है. आयुर्वेद कहता है कि पेट को तीन भागों में भोजन देना चाहिए. एक भाग ठोस यानी सॉलिड फूड होना चाहिए. दूसरा भाग तरल यानी फ्लूड होना चाहिए और एक हिस्से को खाली रखना चाहिए. सामान्य भाषा में हमेशा 70 फीसदी खाना ही पेट को देना चाहिए. कुछ हिस्सा खाली रखना चाहिए, ताकि शरीर उसका इस्तेमाल खाना पचाने और सेहत को बेहतर बनाने में कर सके.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें

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