क्या मांगलिक भी कर सकता है गैर मांगलिक से विवाह, क्या कहता है शास्त्र आचार्य से जानिए दोष व उपाए 

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Kundli Mein Manglik Dosh: उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज बताते हैं कि मांगलिक लड़की का गैर मांगलिक युवक से विवाह अशुभ नहीं है. बल्कि उचित उपायों से पूरी तरह सफल हो सकता है. भात पूजा, मंगल शांति और ज्योतिषीय विधियों से मंगल दोष संतुलित होकर वैवाहिक जीवन में शुभता लाता है.

हिन्दू धर्म मे 16 संस्कार कहे गए है. उन्हीं मे से एक विवाह संस्कार का भी महत्व है. शादी यानि विवाह, शादी केवल सामाजिक रस्म नहीं, बल्कि ज्योतिषीय संतुलन और आध्यात्मिक मिलन भी है. हिन्दू धर्म में कुंडली मिलान एक आवश्यक परंपरा मानी जाती है, खासकर जब बात हो मांगलिक दोष की. वर्षों से यह धारणा रही है कि अगर किसी की कुंडली में मांगलिक दोष हो. वह किसी गैर मांगलिक से विवाह कर ले, तो वैवाहिक जीवन संकटों से घिर सकता है.

उज्जैन

उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज कहते हैं, हर मांगलिक दोष अशुभ नहीं होता, न ही हर गैर-मांगलिक विवाह खराब होता है. और अगर कोई परेशानी है तो समाधान भी शास्त्रों मे है. मांगलिक दोष की बात करे तो यह अशुभ नही शुभ परिणाम भी देता है.ज्योतिषीय दृष्टिकोण से, यदि लड़के या लड़की की कुंडली में मंगल ग्रह दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, तो उसे मांगलिक दोष कहा जाता है. परंतु हर दोष जीवन को प्रभावित नहीं करता है.

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आचार्य के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु, केतु, शनि जैसे ग्रह भी उन्हीं भावों में हों तो मंगल का प्रभाव निष्क्रिय हो सकता है. इसका अर्थ है कि कुछ विशेष योग मांगलिक दोष को नकारात्मक की बजाय तटस्थ या शुभ बना सकते है.

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हर समस्या का कोई ना कोई समाधान अवश्य है. इसी प्रकार मंगल दोष शांति के लिए भारत में कई धार्मिक स्थल प्रसिद्ध हैं, लेकिन मंगलनाथ मंदिर, उज्जैन का स्थान अद्वितीय है. यह मंदिर न केवल मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है, बल्कि यहां की भात पूजा विशेष रूप से प्रभावी मानी जाती है.

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रोजाना सैकड़ों लोग अपने वैवाहिक जीवन को मंगलमय बनाने के लिए यहां पूजा करवाते हैं. भात पूजा में चावल चढ़ाकर भगवान मंगल को प्रसन्न किया जाता है, जिससे दोष का प्रभाव कम या समाप्त हो जाता है.

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बहुत से लोग मांगलिक विवाह को लेकर डर में जीते हैं, लेकिन आचार्य बताते हैं कि यह भय का नहीं, बल्कि सही समझ और मार्गदर्शन का विषय है. कुंडली में मंगल की स्थिति केवल चुनौतियों का संकेत देती है, समाधान का रास्ता बंद नहीं करती.

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यदि कुंडली को सही ढंग से परखा जाए और अनुभवी आचार्य से उचित शांति पूजन, दोष निवारण या मांगलिक उपाय कराए जाएं, तो मांगलिक और गैर-मांगलिक का विवाह पूरी तरह संभव ही नहीं, बल्कि सुखद और सफल भी बन सकता है.

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आचार्य मानते हैं कि सही समय, सही विधि और सही परामर्श के साथ किया गया विवाह जीवन में सौभाग्य, सामंजस्य और स्थिरता लाता है. इसलिए मांगलिक दोष को केवल बाधा न मानें, इसे समझें, समाधान अपनाएं और विश्वास के साथ रिश्ते को आगे बढ़ाएं.

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