बच्चे का नाम है नैश
इस बच्चे का नाम नैश है, जो इसी महीने 5 जुलाई को एक वर्ष का हो चुका है. नैश का जन्म आयोवा के यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा हेल्थ केयर के तीन डॉक्टरों ने करवाया था. खबरों के अनुसार, नैश का वजन जन्म के समय सिर्फ 283 ग्राम था. जन्म होते ही उसे तुरंत डॉक्टर्स ने निओनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट में रख दिया, ताकि उसे कोई नुकसान न हो. प्रिमैच्योर बेबी को विशेष देखभाल, निगरानी और इलाज की जरूरत होती है, ताकि उसका शारीरिक और मानसिक विकास सही से हो सके. हॉस्पिटल में नैश और उसकी मां मोल्ली लगभग 6 महीने तक रहे एडमिट. आज एक साल की उम्र में भी नैश को कुछ न कुछ सेहत से संबंधित परेशानियां बनी हुई हैं. नैश को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन और खाने के लिए फीडिंग ट्यूब लगाया गया है.
सर गंगाराम हॉस्पिटल, नई दिल्ली की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. साक्षी नायर कहती हैं कि कई कारणों से शिशु का जन्म समय से पूर्व हो सकता है. इसमें दोनों ही कंडीशन शामिल हैं जैसे प्रेग्नेंसी से पहले और इसके दौरान होने वाली स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं. इसमें मां की सेहत, बच्चेदानी का मुंह कमजोर होना, समय से पहले सर्विक्स या गर्भाशय का निचला हिस्सा खुल जाना, कई बार गर्भ में जुड़वा या तीन शिशु का होना, पहली प्रेग्नेंसी में प्रीमैच्योर डिलीवरी होने पर दूसरी बार भी ये समस्या होना, गर्भाशय या ग्रीवा में किसी तरह का इंफेक्शन, वेजाइनल इंफेक्शन और रक्तस्राव, प्लेसेंटा में समस्या होना, यूरिन इंफेक्शन, सेक्सुअल ट्रांसमिटेड इंफेक्शन, कोई बीमारी जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट, किडनी डिजीज भी समय से पहले प्रसव के जोखिम को बढ़ा सकती हैं. कई मामले में जल्दी पानी निकलना भी प्रीमैच्योर बेबी बर्थ का एक कारण होता है. हालांकि, डॉ. नायर कहती हैं कि 50 से 60 प्रतिशत मामलों में सही कारण का पता नहीं चल पाता है.
क्या प्रीमैच्योर बेबी के जीने की संभावना होती है कम?
डॉ. नायर कहती हैं कि बच्चे का जन्म किस महीने (कितने सप्ताह) में हुआ है, इस पर काफी हद तक निर्भर करता है. साथ ही नर्सरी में किस तरह की केयर है, क्या ट्रीटमेंट दिया जा रहा है, ये बातें भी बहुत मायने रखती हैं. शिशु को किस तरह की तकलीफ है, उसका शारीरिक विकास कितना हुआ है, इन सभी बातों पर भी सर्वाइवल रेट निर्भर करता है.
प्रीमैच्योर बेबी में क्या समस्याएं हो सकती हैं?
यदि जन्म से ही अच्छी केयर, ट्रीटमेंट दी जाए तो कई बच्चे स्वस्थ भी जीवन जीते हैं. वैसे, बड़े होने पर प्रीमैच्योर बेबी की इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है. न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं. आईक्यू लेवल कमजोर होता है. सही से शारीरिक और मानसिक विकास नहीं होता.