युद्ध की तपिश से पिघला बजट! सोफे से लेकर गद्दे तक 50% महंगे, फर्नीचर बाजार में सन्नाटा

Price Rise in Furniture: ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर अब भारत के फर्नीचर उद्योग पर साफ नजर आने लगा है. पेट्रोकेमिकल उत्पादों की कीमतों में तेजी और सप्लाई में कमी के चलते फर्नीचर से जुड़े लगभग सभी सामान महंगे हो गए हैं. गद्दे, बेड, सोफा, डाइनिंग टेबल, पर्दे, प्लाई, अलमारी और यहां तक कि घरों में रखे जाने वाले छोटे मंदिरों की कीमतों में भी 20 से 50 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

व्यापारियों के मुताबिक, जो फोम वाला गद्दा पहले करीब 1800 रुपये में मिलता था, वह अब 2600 रुपये तक पहुंच गया है, यानी लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी. वहीं, पर्दों की कीमतों में करीब 20 प्रतिशत उछाल आया है 400 रुपये का पर्दा अब 550 रुपये में मिल रहा है. फर्नीचर निर्माण में इस्तेमाल होने वाली प्लाई की कीमत भी 700 रुपये से बढ़कर 1200 रुपये तक पहुंच गई है. इसी तरह कंबल 1600 रुपये से बढ़कर 2300 रुपये तक हो गए हैं. 

कच्चा माल महंगा, फर्नीचर के दामों में भारी उछाल

विक्रेताओं का कहना है कि पेट्रोकेमिकल उत्पाद जैसे पॉलिएथिलीन, थिनर और फॉर्मल्डिहाइड महंगे होने के कारण उत्पादन लागत में भारी इजाफा हुआ है. इसका सीधा असर तैयार फर्नीचर पर भी पड़ा है. एक डबल बेड की कीमत में 8 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है, जबकि डाइनिंग टेबल सेट 7 हजार और सोफा सेट 8 से 9 हजार रुपये तक महंगे हो गए हैं. घरेलू उपयोग की अन्य वस्तुएं भी इससे अछूती नहीं रहीं. मंदिर की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत और अलमारी की कीमतों में 10 से 12 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है.

महंगाई से ग्राहक गायब, उद्योग ने मांगी सरकारी राहत

फर्नीचर मार्केट से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल के कारण पेट्रोकेमिकल उत्पादों की लागत बढ़ी है, वहीं सप्लाई बाधित होने से स्थिति और खराब हो गई है. बढ़ती कीमतों के चलते बाजार में ग्राहकों की संख्या भी कम हो गई है, जिससे कारोबार प्रभावित हो रहा है.

फर्नीचर मार्केट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सरकार से मांग की है कि उद्योग को राहत देने के लिए टैक्स में छूट और अन्य सहायता दी जाए, ताकि इस संकट से उबरा जा सके. हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संकेत मिल रहे हैं कि युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इन कुछ हफ्तों में ही भारतीय अर्थव्यवस्था और खासकर छोटे उद्योगों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है.

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