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ये कहानी है पश्चिम चम्पारण जिले के रामनगर प्रखंड स्थित गोबरहिया दोन निवासी निर्मला देवी और उनके पति की, जो आज मशरूम उत्पादन, शहद उत्पादन और सिक्की मौनी जैसी वस्तुओं को तैयार करने जैसे कई व्यवसाय करती हैं. जो कभी दूसरे के घर काम करने पर मजबूर थे आज आत्मनिर्भर बनकर लोगों को भी प्रेरणा दे रहे हैं. आज निर्मला के पास कमाई के कई जरिए बन चुके हैं.
पश्चिम चम्पारण. कभी खेतों में मजदूरी और घर-घर घूम झाड़ू पोछा कर गुजारा करने वाली रामनगर की एक दंपत्ति आज खुद के व्यवसाय से दूसरों को रोजगार देगी, ये किसने सोचा था. उनके जीवन में गरीबी थी जहां व्यवसाय खड़ा करना तो दूर, खुद के गुजारे का भी ठिकाना नहीं था. लेकिन कहते हैं न ‘जहां चाह, वहां राह’. हिम्मत न हारने की ज़िद और गरीबी को ललकारने के जुनून ने उनकी स्थिति को कुछ इस दर बदला कि आज वो अनगिनत लोगों की प्रेरणा बन चुके हैं.
जी हां, ये कहानी है पश्चिम चंपारण जिले के रामनगर प्रखंड स्थित गोबरहिया दोन निवासी निर्मला देवी और उनके पति की, जो आज मशरूम उत्पादन, शहद उत्पादन और सिक्की मौनी जैसी वस्तुओं को तैयार करने जैसे कई व्यवसाय करती हैं. लोकल 18 से बात करते हुए निर्मला बताती हैं कि आज से महज तीन साल पहले तक वो और उनके पति गांव में ही मजदूरी का काम किया करते थें, जिससे उनके परिवार का भरण पोषण होता था. दिन भर की जी तोड़ मेहनत के बावजूद भी जब जरूरत के अनुसार पैसे नहीं मिल पाते थें, तब उन्होंने अपनी खाली पड़ी जमीन पर मशरूम उत्पादन करने का प्लान किया.
खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला
शुरुआत में उन्होंने इस काम के लिए गांव में चल रहे कुछ फाउंडेशन की मदद ली और मशरूम के 50 बैग्स से खुद का सेटअप खड़ा किया. इससे होने वाली बिक्री और मजदूरी से आने वाले पैसे को मिलाकर निर्मला ने ऑयस्टर मशरूम के कारोबार को विस्तृत किया और अपनी कमाई के दायरे को बढ़ाया. साल 2025 में उन्होंने गांव में चल रहे NGO की मदद से मशरूम के साथ शहद उत्पादन का भी काम शुरू किया. शुरुआत में 10 बॉक्स में मधुमक्खी पालन कर उससे भी पैसे बनाएं. इस दौरान बड़ी बात बात यह रही कि निर्मला के पास कमाई के अब तीन जरिए बन चुके थे. समय बीतता गया और उन्होंने कारोबार को बढ़ा कर सिक्की मौनी की वस्तुओं को बनाने का भी काम शुरू किया.
अब हर महीने 50 हजार की आमदनी
मशरूम, शहद और सिक्की मौनी के व्यवसाय से जब उनकी आमदनी अच्छी होने लगी तब उन्होंने झाड़ू पोंछे का काम छोड़ खुद के कारोबार पर ही आधारित रहने का फैसला लिया. सब कुछ बेहतर चलता रहा और एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने मशरूम के 200 बैग्स और मधुमक्खी के 40 बॉक्सेस के साथ सिक्की मौनी के काम में गांव की अन्य महिलाओं को भी शामिल किया और हर महीने 60 से 70 हजार रुपए की आमदनी बनानी लगी. बात यदि वर्तमान की करें तो, मशरूम के व्यवसाय से निर्मला हर महीने 15 से 20 हजार रुपए, शहद उत्पादन से हर महीने करीब 25 हजार रुपए और सिक्की मौनी की वस्तुओं से 10 हजार रुपए तक बना रही हैं. इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि कभी महीने का दस हजार कमाई करने वाली निर्मला आज हर महीने कम से कम 50 हजार रुपए की आमदनी बड़ी आसानी से करने लगी हैं.
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