अगले 24 साल में 33% बढ़ जाएंगे ब्रेस्ट कैंसर के मामले ! इन 5 देशों में हालात बदतर

Lancet Study on Breast Cancer: ब्रेस्ट कैंसर एक जानलेवा बीमारी है, जिसकी वजह से हर साल लाखों लोग अपनी जान गंवा देते हैं. ब्रेस्ट कैंसर का सबसे ज्यादा शिकार महिलाएं होती हैं, लेकिन यह पुरुषों को भी हो सकता है. दुनियाभर में ब्रेस्ट कैंसर के मरीज बढ़ते जा रहे हैं. बेहतर इलाज और एडवांस स्क्रीनिंग टेक्नोलॉजी के बावजूद आने वाले कुछ दशक में ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो सकती है, जो बेहद चिंताजनक है. द लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित लेटेस्ट ग्लोबल स्टडी के मुताबिक साल 2023 में जहां ब्रेस्ट कैंसर के 23 लाख मामले दर्ज हुए, वहीं 2050 तक यह संख्या बढ़कर 35 लाख से भी ज्यादा हो सकती है. जबकि सालाना मौतों का आंकड़ा 7.64 लाख से बढ़कर लगभग 10 लाख तक पहुंचने की आशंका है.

यह स्टडी ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज (GBD) डाटा पर आधारित है, जिसमें 1990 से 2023 तक 204 देशों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया और 2050 तक के अनुमान पेश किए गए. इस रिपोर्ट के अनुसार 1990 के बाद से ब्रेस्ट कैंसर से मौतों में सबसे ज्यादा 214% बढ़ोतरी लाओस में दर्ज की गई. इसके अलावा बांग्लादेश में 91%, वियतनाम में 80%, इंडोनेशिया में 78%, भारत में 74%, जापान में 52% और फिलीपींस में 41% मौतें बढ़ी हैं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ब्रेस्ट कैंसर चीन में मृत्यु दर में लगभग 37 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. इस स्टडी में सामने आए आंकड़े बेहद डरावने हैं.

इस स्टडी की लीड ऑथर और यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) की रिसर्चर केली बंधारी का कहना है कि हाई इनकम वाले देशों में जहां स्क्रीनिंग और समय पर इलाज की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हैं, वहीं लो और मीडियम इनकम वाले देशों में देर से डायग्नोसिस और क्वालिटी ट्रीटमेंट की कमी के कारण मृत्यु दर अधिक है. ब्रेस्ट कैंसर का बोझ अब तेजी से ऐसे देशों की ओर स्थानांतरित हो रहा है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भी ब्रेस्ट कैंसर को लेकर हालात चिंताजनक हैं. यहां एज स्टैंडराइज्ड इंसीडेंस रेट (ASIR) 1990 में 13 प्रति लाख था, जो 2023 में बढ़कर 29.4 प्रति लाख हो गया. इसी अवधि में एज स्टैंडराइज्ड मोर्टेलिटी रेट (ASMR) 8.9 से बढ़कर 15.5 प्रति लाख तक पहुंच गया है. शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 2050 तक दक्षिण एशिया में ASIR लगभग 28.5 प्रति लाख और ASMR 18.9 तक पहुंच सकता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मृत्यु दर की वृद्धि घटना दर की तुलना में थोड़ी धीमी है, जो शुरुआती पहचान और ट्रीटमेंट में कुछ सुधार का संकेत देती है.

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मैरी एनजी के अनुसार भारत जैसे देशों के लिए सबसे बड़ी चुनौती तेजी से हो रहे जनसांख्यिकीय और महामारी विज्ञान बदलाव हैं. देश में कैंसर रजिस्ट्रियों का कवरेज अभी केवल 10 से 15 प्रतिशत आबादी तक सीमित है, जिससे सटीक और व्यापक रणनीति बनाना मुश्किल हो जाता है. हालिया आंकड़ों के अनुसार 20 से 54 वर्ष की महिलाओं में नए मामलों में 1990 के बाद 29 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो यह दर्शाता है कि युवा महिलाओं में भी ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ रहा है.

शोधकर्ताओं का मानना है कि वैश्विक स्तर पर ब्रेस्ट कैंसर के लगभग 28 प्रतिशत मामलों का संबंध 6 रिस्क फैक्टर्स से है. इनमें स्मोकिंग, हाई ब्लड शुगर, मोटापा और अनहेल्दी लाइफस्टाइल शामिल हैं. अध्ययन के अनुसार स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, धूम्रपान से दूरी बनाकर, नियमित शारीरिक गतिविधि रखना, रेड मीट का सीमित सेवन और वजन नियंत्रित रखना ब्रेस्ट कैंसर का खतरा कम कर सकता है. इन सभी कोशिशों से 2.40 करोड़ हेल्दी लाइफ ईयर्स यानी स्वस्थ जीवन के वर्षों को बचाया जा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जागरुकता, समय पर जांच और लाइफस्टाइल में सुधार इस खतरे को कम कर सकता है.

.

Share me..

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *