पीतल के भगोने, कोयले की आंच और मलाई का स्वाद, गोरखपुर की ये चाय दुकानें हैं शहर की पहचान

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गोरखपुर की गलियों में चाय सिर्फ एक पेय नहीं बल्कि एक खास अनुभव है. कूड़ाघाट की पीतल के भगोने वाली चाय, गोरखनाथ के पास मलाई वाली चाय, विजय चौक का बन-मक्खन और राप्ती नगर की भट्ठा वाली चाय शहर की अलग पहचान बन चुके हैं. कम कीमत में मिलने वाला यह देसी स्वाद ही गोरखपुर की चाय संस्कृति को खास बनाता है.

गोरखपुर. पूर्वांचल का शहर गोरखपुर सिर्फ अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अलग-अलग स्वाद के लिए भी जाना जाता है. यहां की गलियों में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि एक खास अनुभव बन चुकी है. शहर के हर मोहल्ले में छोटे-छोटे स्टॉल जरूर मिल जाएंगे, जहां सुबह से लेकर देर रात तक लोगों की भीड़ लगी रहती है. लेकिन इन सबके बीच कुछ ऐसी चाय की दुकानें हैं, जिनकी अपनी अलग पहचान और परंपरा है. अगर आप गोरखपुर आते हैं तो इन जगहों की चाय का स्वाद लेना लगभग जरूरी माना जाता है.

पीतल के भगोने वाली ‘दीपक चाय
गोरखपुर के कूड़ाघाट इलाके में दीपक चाय वाले की दुकान काफी चर्चित है. यहां चाय बनाने का तरीका ही लोगों को आकर्षित करता है. दीपक पीतल के बड़े भगोने में चाय तैयार करते हैं, जिससे चाय का स्वाद अलग और ज्यादा गाढ़ा हो जाता है. रात करीब 10 बजे तक यहां चाय पीने वालों का सिलसिला चलता रहता है. खास बात यह है कि, यहां चाय के साथ मिलने वाला बटर लगा बन मक्खन स्वाद को दोगुना कर देता है.

मलाई वाली चाय का पुराना ठिकाना
गोरखनाथ मंदिर के पास गोरखनाथ कॉम्प्लेक्स के बगल में एक बुजुर्ग चाचा की छोटी सी पुरानी दुकान है. यहां चाय कोयले की धीमी आंच पर बनाई जाती है और शीशे के गिलास में परोसी जाती है. चाय देने के बाद उसके ऊपर ताजी मलाई डाली जाती है. चाय पीते ही अलग तरह का स्वाद महसूस होता है, दुकान चलाने वाले चाचा नाथ बताते हैं कि, यह तरीका कई सालों से चला आ रहा है और लोग इसी पारंपरिक स्वाद के लिए यहां आते हैं.

विजय चौक की चाय और बन मक्खन
शहर के व्यस्त इलाके विजय चौक पर भी चाय और बन मक्खन की अपनी अलग पहचान है. यहां शाम के समय ऑफिस से लौटने वाले लोग, छात्र और दोस्त मंडली बैठकर चाय का आनंद लेते हैं. गर्म चाय के साथ मक्खन लगा बन यहां का सबसे लोकप्रिय कॉम्बिनेशन माना जाता है.

राप्ती नगर की भट्ठा वाली चाय
राप्ती नगर में मनोज की चाय की दुकान भी कम मशहूर नहीं है, यहां चाय भट्ठे पर धीमी आंच में पकाई जाती है, जिससे उसका स्वाद गाढ़ा और खुशबूदार हो जाता है. लोग खास तौर पर इस धीमी आंच वाली चाय का स्वाद लेने यहां पहुंचते हैं. इन सभी जगहों की एक खास बात यह भी है कि, यहां चाय की कीमत ज्यादा नहीं है. करीब 20 रुपये में चाय और 30 रुपये में बन मक्खन मिल जाता है. कम कीमत में मिलने वाला यह देसी स्वाद ही गोरखपुर की चाय संस्कृति को खास बनाता है.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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