बुक रिव्यू- न अतीत का दुख, न भविष्य की चिंता: कैसे सीखें वर्तमान में जीना, कैसे आज पर ध्यान केंद्रित करें, यही सिखाती है किताब

2 घंटे पहले

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किताब: ध्यान केंद्रित कैसे करें

(अंग्रेजी किताब ‘द आर्ट ऑफ फोकस’ का हिंदी अनुवाद)

लेखक: गौरांग दास

अनुवाद: डॉ. रोहिणी

प्रकाशक: पेंगुइन

मूल्य: 299 रुपए

टेक्नोलॉजी, ओटीटी और रील्स की दुनिया में हमारा ध्यान बार-बार भटकता है। क्या आप चाहते हैं कि आपका दिमाग एक जगह टिककर रहे और आप अपने काम को बेहतर तरीके से कर सकें? अगर हां, तो गौरांग दास की किताब ध्यान केंद्रित कैसे करें आपके लिए एक बेहतरीन साथी साबित हो सकती है। यह किताब न सिर्फ आपको एकाग्रता सिखाती है, बल्कि इसे इतने आसान और रोचक तरीके से पेश करती है कि पढ़ते वक्त ऐसा लगता है जैसे कोई दोस्त आपको समझा रहा हो। मैंने इस किताब को पढ़ा और सच कहूं, इसे पढ़ने के बाद मेरे सोचने का तरीका बदल गया। आइए, इस रिव्यू में जानते हैं कि यह किताब क्या है और यह आपके लिए क्यों खास हो सकती है।

कोविड-19 के बाद की उदासी से लड़ने में बहुत काम आई किताब

यह किताब खास तौर पर कोविड-19 के बाद की दुनिया के लिए लिखी गई है, जब हम सब नई चुनौतियों से जूझ रहे हैं। लेखक गौरांग दास ने इसमें 45 छोटी-छोटी कहानियों के जरिए बताया है कि कैसे हम अपने दिमाग को शांत रख सकते हैं और अपने लक्ष्यों पर ध्यान लगा सकते हैं। हर कहानी के बाद एक चर्चा है, जो उस कहानी से मिलने वाली सीख को आसान शब्दों में समझाती है। यह किताब इतनी सरल भाषा में लिखी गई है कि इसे पढ़ने के लिए आपको शब्दकोश की जरूरत नहीं पड़ेगी।

लेखक हैं माइंडफुलनेस और लीडरशिप कोच

गौरांग दास एक माइंडफुलनेस और लीडरशिप कोच हैं। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई की और एक मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर काम किया। लेकिन बाद में उन्होंने मॉन्क बनने का रास्ता चुना। आज वह इस्कॉन के भक्ति वेदांत रिसर्च सेंटर के प्रशासनिक निदेशक हैं। उनकी यह किताब उनकी जिंदगी के अनुभवों और आध्यात्मिक ज्ञान का निचोड़ है, जो हर आम इंसान के लिए उपयोगी है। उन्होंने बुद्धिमान व्यक्ति की पहचान सरल ढंग से बताई है। अगर को ई बुद्धिमत्ता हासिल करना चाहता है तो इस किताब से सीख सकता है। गौरांग दास ने लिखा है कि धैर्यपूर्वक सुनना बुद्धिमान व्यक्ति का सबसे जरूरी गुण है।

किताब की खासियत

इस किताब की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह आपको बोरिंग लेक्चर नहीं देती। यह 45 छोटे अध्यायों में बंटी है, जिन्हें आप कभी भी, कहीं भी पढ़ सकते हैं। हर अध्याय एक कहानी से शुरू होता है और फिर उस कहानी से मिलने वाली सीख पर बात होती है। लेखक ने भगवद गीता के कुछ अंशों का भी इस्तेमाल किया है, लेकिन इसे इस तरह पेश किया गया है कि आपको हिंदू धर्म या माइथोलॉजी का जानकार होना जरूरी नहीं। यह किताब हर उम्र और हर समुदाय के लोगों के लिए है।

खास बात ये है कि लेखक ने मौजूदा समय की जिंदगी की समस्याओं को समझा है – जैसे कि रिश्तों में दिक्कत, अकेलापन, या फिर हर चीज में आगे रहने की होड़। वह इन मुद्दों को कहानियों के जरिए छूते हैं और फिर बताते हैं कि इनसे कैसे निपटा जाए।

कुछ खास कहानियां और उनकी सीख

1. कीड़ों की लड़ाई

इस कहानी में एक पिता अपने बेटे को जंगल में ले जाते हैं और उसे एक बर्च का पेड़ दिखाते हैं। यह पेड़ बाहर से मजबूत लगता है, लेकिन अंदर से कीड़े इसे खा चुके हैं। पिता कहते हैं कि असली खतरा बाहर की आपदाओं से नहीं, बल्कि अंदर की कमजोरियों से होता है – जैसे गुस्सा, लालच या ईर्ष्या। यह कहानी मुझे बहुत पसंद आई, क्योंकि इसने मुझे अपनी कमजोरियों पर सोचने के लिए मजबूर किया।

2. मूर्ख राजा

यह कहानी एक शिष्य की है, जो अपने गुरु की सलाह नहीं मानता और मुसीबत में पड़ जाता है। इससे हमें सीख मिलती है कि सही और गलत में फर्क करना कितना जरूरी है। लेखक कहते हैं कि यह हुनर हमें मुश्किल वक्त में सही फैसले लेने में मदद करता है। यह कहानी पढ़कर जिंदगी के अपने ही फैसलों पर गौर करने का मौका मिलता है।

इस किताब के हर अध्याय में नई चीजें सीखने को मिलती हैं। इससे मिली 5 मुख्य सीख ग्राफिक में देखिए-

इन पॉइंट्स को विस्तार से समझें-

अंदर की कमजोरियों को पहचानें:अपनी जिंदगी की समस्याओं का हल बाहर नहीं, अपने अंदर ढूंढें।

सही फैसले लें: सही-गलत में फर्क करना सीखें, यह आपको मुश्किलों से बचाएगा।

सादा जीवन जिएं: जिंदगी को आसान रखें, फालतू की चीजों से ध्यान न भटकाएं।

वर्तमान में जिएं: बीते हुए कल या आने वाले कल की चिंता छोड़ें, वर्तमान पर फोकस करें।

आध्यात्मिकता अपनाएं: यह आपके दिमाग को शांति देती है और एकाग्रता बढ़ाती है।

जिंदगी में कैसे अपनाएं ये सीख?

किताब सिर्फ सलाह नहीं देती, बल्कि उसे अपनाने के तरीके भी बताती है। यहाँ कुछ आसान टिप्स हैं-

  • रोज 10 मिनट ध्यान करें: इससे दिमाग शांत होगा।
  • कमजोरियों को लिखें: एक डायरी में अपनी कमजोरियां नोट करें और उन पर काम करें।
  • फैसले लेने की प्रैक्टिस: छोटे-छोटे फैसले लेकर अपनी समझ बढ़ाएं।
  • वर्तमान पर ध्यान दें: जब दिमाग भटके, तो खुद को वर्तमान में लाएं।
  • आध्यात्मिक किताबें पढ़ें: इससे शांति और फोकस बढ़ेगा।

यह किताब क्यों पढ़ें?

ध्यान केंद्रित कैसे करें किताब इसलिए खास है क्योंकि यह जटिल बातों को आसान तरीके से समझाती है। यह आपको हंसाती है, सोचने पर मजबूर करती है और जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करती है। कोविड के बाद की दुनिया में, जब सब कुछ बदल गया है, यह किताब आपको नई शुरुआत करने का रास्ता दिखाती है।

किसे पढ़नी चाहिए ये किताब

यह किताब हर उस इंसान को पढ़नी चाहिए, जो अपने दिमाग को शांत करना चाहता है और अपने लक्ष्यों पर ध्यान लगाना चाहता है। अगर आप स्टूडेंट हों, नौकरीपेशा हों या घर संभालते हैं तो यह किताब आपके लिए है। इसे पढ़ें, इसके सबक अपनाएं और देखें कि कैसे आपकी जिंदगी में बदलाव आता है।

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