10 मिनट पहलेलेखक: शशांक शुक्ला
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किताब- धन-संपत्ति का मनोविज्ञान
(अंग्रेजी की किताब ‘द साइकोलॉजी ऑफ मनी’ का हिंदी अनुवाद)
लेखक- मॉर्गन हाउजल
अनुवाद- असमा
प्रकाशक- जयको पब्लिशिंग हाउस
मूल्य- 225 रुपए
मॉर्गन हाउजल की किताब ‘धन संपत्ति का मनोविज्ञान’ पैसे को लेकर एक नया नजरिया देती है। यह फाइनेंस की उन किताबों से अलग है, जो आमतौर पर शेयर मार्केट, निवेश के तौर-तरीकों के बारे में बात करती हैं या हिसाब-किताब रखना सिखाती हैं।
हाउजल कहते हैं कि पैसों के मामले में कामयाब होने के लिए यह जरूरी नहीं है कि आपको कितना ज्ञान है। इससे कहीं ज्यादा जरूरी है कि आप पैसों को किस तरह संभालते हैं।
मॉर्गन हाउजल की यह किताब 20 छोटे-छोटे चैप्टर्स में बंटी है। इसमें कहानियों के जरिए समझाया गया है कि हम पैसे को लेकर किस तरह सोचते और कैसा व्यवहार करते हैं।

पुस्तक की मुख्य बातें यह किताब हमें कई जरूरी बातें सिखाती है, जिनसे हम पैसे से जुड़े अपने फैसले बेहतर तरीके से ले सकते हैं। नीचे कुछ प्रमुख बिंदु दिए गए हैं। आइए इसे ग्राफिक्स के जरिए समझते हैं।

पैसों को लेकर सबकी अपनी-अपनी समझ है हाउजल का कहना है कि हर व्यक्ति के वित्तीय निर्णय उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों और अनुभवों पर आधारित होते हैं।
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति जो गरीबी में पला-बढ़ा है, वह बचत को अधिक महत्व दे सकता है, जबकि कोई अमीर परिवार से आने वाला व्यक्ति जोखिम लेने में सहज हो सकता है।
हाउजल कहते हैं कि-
‘कुछ लोग उन परिवारों में जन्म लेते हैं जो शिक्षा को प्रोत्साहित करते हैं। कुछ लोग इसके खिलाफ होते या उतना महत्व नहीं देते हैं। कुछ लोग उद्यमिता को प्रोत्साहित करने वाली समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में जन्म लेते हैं। दूसरी तरफ कुछ लोग युद्ध और गरीबी में। मैं चाहता हूं कि आप सफल हों। लेकिन इस बात को भी समझें कि सारी सफलता मेहनत से नहीं मिलती है और सारी गरीबी आलस्य के कारण नहीं होती है। दूसरों को और खुद को भी जज करते समय इस बात को ध्यान में रखें।’
जीवन में भाग्य और जोखिम की भूमिका अहम है पुस्तक में बताया गया है कि वित्तीय सफलता में भाग्य और जोखिम की बड़ी भूमिका होती है। सफलता केवल मेहनत या बुद्धिमत्ता पर निर्भर नहीं करती; बाहरी कारक भी महत्वपूर्ण हैं।
उदाहरण के लिए, रोनाल्ड रीड, एक साधारण गैस स्टेशन कर्मचारी और चौकीदार थे। उन्होंने अपनी सादगी और धैर्यपूर्ण निवेश के दम पर 80 लाख डॉलर की संपत्ति बनाई।
दूसरी ओर हार्वर्ड से पढ़ाई करने वाले रिचर्ड फुस्कोन ने अपनी लग्जरी लाइफस्टाइल और भारी कर्ज के कारण 2008 के मंदी में दिवालिया हो गए। इससे यह पता चलता है कि व्यवहार शिक्षा से अधिक महत्वपूर्ण है।
कितना काफी है, यह जानना बहुत जरूरी है हाउजल इस बात पर जोर देते हैं कि हमें यह जानना चाहिए कि हमारे लिए ‘पर्याप्त’ क्या है। लालच और अधिक की चाहत हमें वित्तीय नुकसान की ओर ले जा सकती है।
किताब में रोनाल्ड रीड और रिचर्ड फुस्कोन की कहानी के जरिए इस बात को समझाने की कोशिश की गई है कि धैर्य और संयम धन निर्माण में कितने महत्वपूर्ण हैं।
कंपाउंडिंग की ताकत समझना जरूरी है पुस्तक में चक्रवृद्धि ब्याज (कंपाउंडिंग) की ताकत को समझाया गया है। हाउजल वॉरेन बफेट का उदाहरण देते हैं, जिनकी 84.5 अरब डॉलर की संपत्ति में से 81.5 अरब डॉलर 65 साल की उम्र के बाद आए।
यह दर्शाता है कि छोटे, नियमित निवेश लंबे समय में बड़ी संपत्ति बना सकते हैं। हाउजल कहते हैं कि लंबे समय तक लगातार अच्छे रिटर्न कमाना ही वह समय है जब आप चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ उठाते हैं।
धनी बनने से ज्यादा जरूरी धनी बने रहना है धनी बनना तो एक बड़ी उपलब्धि होती है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि आप अपनी संपत्ति को बनाए रखें और उसे बढ़ाते रहें।
कई लोग थोड़ी-बहुत सफलता पाने के बाद बिना सही योजना के खर्चा बढ़ा देते हैं, जिससे उनकी दौलत जल्दी खत्म हो जाती है।

इसलिए केवल धन कमाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि समझदारी से बचत और निवेश करना भी जरूरी है ताकि आप लंबे समय तक आर्थिक रूप से सुरक्षित और स्थिर रह सकें। यही असली सफलता होती है
धनी होना यानी अपने समय पर कंट्रोल करना है हाउजल मानते हैं कि पैसे की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह आपको अपने समय पर पूरा कंट्रोल देता है। वे कहते हैं कि पैसे की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह आपको अपने समय का मालिक बनाता है।
इसका सीधा मतलब है कि पैसा आपको यह आज़ादी देता है कि आप जो चाहें, जब चाहें, जिसके साथ चाहें और जितने समय तक चाहें, वो कर सकें। किताब में बचत को धन निर्माण का आधार बताया गया है।
हाउजल कहते हैं कि ‘बचत आपके अहंकार और आपकी आय के बीच का अंतर है। बचत न केवल आपको वित्तीय सुरक्षा देती है, बल्कि यह आपको अवसरों का लाभ उठाने और अनिश्चितताओं से निपटने की लचीलापन भी प्रदान करती है।
हालात के हिसाब से फैसले लें, हमेशा तर्कशील होना जरूरी नहीं है हाउजल सुझाव देते हैं कि वित्तीय निर्णयों में पूरी तरह तर्कसंगत होने की बजाय यथार्थवादी होना बेहतर है। भावनाएं और सामाजिक कारक हमारे निर्णयों को प्रभावित करते हैं, और हमें इसे स्वीकार करना चाहिए।
जैसे हैं, वैसे बनें रहें, दिखावे की जरूरत नहीं है किताब में यह भी बताया गया है कि धन का दिखावा करना आपको गरीब बना सकता है।
हाउजल लिखते हैं, ‘लोगों को यह दिखाने के लिए पैसा खर्च करना कि आपके पास कितना पैसा है, यह सबसे तेज तरीका है कम पैसा होने का। इसके बजाय, विनम्रता और दयालुता से सम्मान अर्जित करें।
किताब क्यों पढ़ी जानी चाहिए ‘धन संपत्ति का मनोविज्ञान’ एक ऐसी पुस्तक है जो आपको धन के प्रति अपने नजरिए को बदलने के लिए प्रेरित करती है।
यह आपको सिखाती है कि धन केवल संख्याओं का खेल नहीं है, बल्कि यह आपके व्यवहार, भावनाओं और सोच पर निर्भर करता है। किताब कई कारणों से पढ़े जाने योग्य है। आइए इसे ग्राफिक्स के जरिए समझते हैं।

यह पुस्तक किन लोगों के लिए है?
- ऐसे लोग जो अपने पैसों को सही तरीके से मैनेज करना चाहते हैं।
- ऐसे इन्वेस्टर्स जो समझना चाहते हैं कि बाजार में लोगों की सोच और भावनाएं कैसे असर डालती हैं।
- मनोविज्ञान के शौकीन लोग, जो धन और लोगों के व्यवहार के बीच के संबंध को जानना चाहते हैं।
- वे लोग जो आर्थिक आजादी पाना चाहते हैं और अपने समय पर खुद का नियंत्रण रखना चाहते हैं।
पुस्तक की शैली और संरचना
पुस्तक की सबसे बड़ी खासियत इसकी सरल और आकर्षक शैली है। प्रत्येक चैप्टर एक नई कहानी या उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो मुश्किल फाइनेंशियल कांसेप्ट को आसान बनाता है।
उदाहरण के लिए, रोनाल्ड रीड और रिचार्ड फुसकोन की कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी बताती है कि पैसा कमाने या बनाने में व्यवहार कितना महत्वपूर्ण है।
‘धन संपत्ति का मनोविज्ञान’ एक ऐसी पुस्तक है जो धन के प्रति हमारे दृष्टिकोण को बदल सकती है। यह हमें सिखाती है कि धन केवल संख्याओं का खेल नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यवहार और सोच पर निर्भर करता है।
यह पुस्तक उन लोगों के लिए एक जरूरी है, जो अपने भविष्य को फाइनेंशियली बेहतर बनाना चाहते हैं। इसे पढ़कर आप न केवल अपने वित्तीय निर्णयों को सुधार सकते हैं, बल्कि यह भी समझ सकते हैं कि धन का असली मूल्य आपके समय और स्वतंत्रता में है।
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