बुक रिव्यू- जिंदगी बदलनी है तो पहले खुद को बदलें: शुरुआत करें सेल्फ हेल्प के साथ, मदद के 8 तरीके ये किताब आपको सिखाएगी

20 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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किताब का नाम: ‘सेल्फ हेल्प: आपके हाथ में जीवन की कुंजी’

(‘सेल्फ हेल्प: दिस इज योर चांस टू चेंज योर लाइफ’ का हिंदी अनुवाद)

लेखक: गैब्रिएल बर्नस्टीन

प्रकाशक: पेंगुइन

अनुवाद: डॉ. अपूर्व कृष्ण

मूल्य: 350 रुपए

हमें अपने जीवन में कई बार ऐसा महसूस होता है कि हमारी पुरानी आदतें, नकारात्मक सोच और डर भीतर ही भीतर हमें जकड़े हुए हैं। कभी अचानक गुस्सा फूट पड़ता है, कभी खुद पर शक होने लगता है तो कभी दूसरों को खुश करने की कोशिश में हम खुद को ही खो देते हैं।

अक्सर ये पैटर्न हमारे बचपन की इनसिक्योरिटी, शर्म या डर से पैदा होते हैं और धीरे-धीरे हमारी पहचान का हिस्सा बन जाते हैं। लेकिन क्या हो जब हम इन डर और घावों को दबाने के बजाय उन्हें पहचानें, स्वीकार करें और प्यार से ठीक करना शुरू करें?

मशहूर अमेरिकी मोटिवेशनल स्पीकर और राइटर गैब्रिएल बर्नस्टीन की किताब ‘सेल्फ हेल्प: आपके हाथ में जीवन की कुंजी’ इसी बदलाव की दिशा दिखाती है। गैब्रिएल बर्नस्टीन को ‘गैबी’ के नाम से जाना जाता है। ये एक स्पिरिचुअल लीडर हैं, जिनकी किताबें लाखों लोगों को प्रेरित करती हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स बेस्टसेलर लिस्ट में अपनी जगह बनाने वाली बर्नस्टीन योग, मेडिटेशन और आध्यात्मिकता पर बेस्ड किताबें लिखती हैं। अपनी इस किताब में उन्होंने इंटरनल फैमिली सिस्टम्स (IFS) थेरेपी के बारे में बताया है।

IFS एक प्रमाणित थेरेपी है, जिसमें मन को अलग-अलग हिस्सों की तरह देखा जाता है। जैसे ‘इनर चाइल्ड’, ‘क्रिटिक’ व ‘प्रोटेक्टर’। इन हिस्सों को समझकर यह थेरेपी हमारे भीतर मौजूद असली, शांत और संतुलित ‘सेल्फ’ को एक्टिव करने में मदद करती है।

गैबी की किताब थेरपिस्ट के ऑफिस से बाहर निकलकर रोजमर्रा की जिंदगी में फिट होती है। ये न सिर्फ प्रेरणा देती है, बल्कि व्यावहारिक प्रोसेस सिखाती है, जिससे आप खुद अपने हीलर बन सकते हैं।

किताब का मकसद और अहमियत

किताब का मकसद IFS के जटिल सिद्धांतों को सरल तरीके से समझाना है, ताकि हर कोई अपने आंतरिक संघर्षों को सुलझा सके। ये किताब बताती है कि कैसे एक्सट्रीम पैटर्न्स जैसे एडिक्शन, गुस्सा, खुद को खुश करने की कोशिश या लगातार सेल्फ-जजमेंट असल में पुराने डर को दबाने के तरीके हैं। जब हम इन्हें पहचान लेते हैं और इन हिस्सों को प्यार देते हैं तो हीलिंग तेज होती है।

गैबी अपनी जिंदगी के अनुभव भी शेयर करती हैं। ये किताब स्पिरिचुअलिटी और साइंस को जोड़ते हुए समझाती है कि हमारे भीतर का ‘सेल्फ’ एक भरोसेमंद गाइडेंस सिस्टम की तरह काम करता है। नीचे दिए गए ग्राफिक में किताब की 8 मुख्य क्वालिटीज बताई गई हैं, जो सेल्फ एनर्जी की पहचान मानी जाती हैं।

आइए इन सेल्फ हेल्प क्वालिटीज के बारे में विस्तार से बात करते हैं।

जिज्ञासा: खुद को समझें

हमारा मन कई ‘भागों’ से बना होता है। जैसे इनर चाइल्ड (जो डरता है), क्रिटिक (जो लगातार जज करता है)। गैबी बताती हैं कि ये हिस्से हमें बचाने की कोशिश तो करते हैं, लेकिन पुरानी यादों और पुराने डर के आधार पर अक्सर गलत दिशा दिखा देते हैं। इसलिए इन्हें जिज्ञासा के साथ समझना जरूरी है।

उदाहरण के लिए, अगर आप अचानक गुस्सा हो जाएं तो रुककर पूछें कि ‘यह पार्ट मुझे किससे बचाने की कोशिश कर रहा है?’ यही क्यूरियोसिटी हमें जजमेंट से दूर रखती है और हीलिंग की शुरुआत करती है। यह प्रक्रिया धीरे-धीरे अंदर की शांति और सेल्फ एनर्जी को एक्टिव करती है।

शांति और जुड़ाव: आंतरिक संघर्ष सुलझाएं

गैबी बताती हैं कि IFS को रोजमर्रा की जिंदगी में लागू करके हम समझ सकते हैं कि एडिक्शन, ओवर-प्रोडक्टिविटी या लोगों को खुश करने की कोशिश जैसे पैटर्न अक्सर पुराने शेम को दबाने के तरीके होते हैं। इन हिस्सों को उसी तरह ध्यान से सुनें, जैसे किसी दोस्त को सुनते हैं।

उदाहरण के लिए, अगर आप खुद को बार-बार दोष देते हैं तो रुककर पूछें कि ‘यह क्रिटिक वाला हिस्सा किस डर से एक्टिव हो रहा है? शायद यह बचपन की किसी असफलता से डर रहा है।’ इस तरह का जेंटल चेक-इन आपको अपने भीतर से जोड़ता है और क्लैरिटी लाता है। किताब में गैबी बताती हैं कि असली हीलिंग प्यार और स्वीकार्यता से होती है।

स्पष्टता और करुणा: नेगेटिव स्टोरीज से मुक्ति

‘मैं कभी सफल नहीं हो पाऊंगा’ जैसी नेगेटिव बातों को दोहराना बंद करें और ‘चूज अगेन’ मेथड अपनाएं। नेगेटिव थॉट को पहचानें, गहरी सांस लें और उसकी जगह एक पॉजिटिव विकल्प चुनें। जैसे ’मैं सीख रहा हूं।’

उदाहरण के लिए, अगर जॉब रिजेक्शन से शेम महसूस हो तो खुद से कहें कि ’यह दर्द जायज है, लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं।’ यह प्रैक्टिस कहीं भी, कभी भी की जा सकती है। किताब बताती है कि ऐसे छोटे-छोटे मेटल शिफ्ट्स समय के साथ चमत्कारिक बदलाव लाते हैं।

क्रिएटिविटी और साहस: वल्नरेबिलिटी को अपनाएं

गैबी वल्नरेबिलिटी को कमजोरी नहीं, बल्कि एक बड़ी ताकत मानती हैं। उनका कहना है कि अपने डर और इनसिक्योरिटी को स्वीकार करना गहरे और सच्चे कनेक्शन बनाने का पहला कदम है। उदाहरण के लिए, अगर किसी रिश्ते में डर महसूस हो तो उसे क्रिएटिव तरीके से व्यक्त करें और साहस के साथ उस डर को चुनौती दें। यही ओपेननेस धीरे-धीरे हीलिंग और रिश्तों काे मजबूती देती है।

आत्मविश्वास: सपोर्टिव एनवायर्नमेंट बनाएं

गैबी कहती हैं कि आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए पॉजिटिव लोगों के बीच रहना बेहद जरूरी है। उदाहरण के तौर पर, आप किसी सपोर्ट ग्रुप से जुड़ सकते हैं या अपने भरोसेमंद दोस्तों से अपनी भावनाएं शेयर कर सकते हैं। यह अकाउंटबिलिटी बढ़ाता है और आपको स्थिर बनाए रखता है।

किताब में माइंडफुलनेस, अफर्मेशंस जैसे कई प्रैक्टिकल टूल्स दिए गए हैं, जिन्हें फिटनेस, करियर या रिलेशनशिप जैसे किसी भी क्षेत्र में लागू किया जा सकता है। इससे नेगेटिविटी कम होती है और भीतर की सेल्फ एनर्जी एक्टिव होने लगती है।

यह किताब किसे पढ़नी चाहिए?

अगर आप पुराने पैटर्न्स से तंग हैं और खुद को हील करना चाहते हैं तो ये किताब आपके लिए है। ये नए रीडर्स से लेकर IFS एक्सपर्ट्स तक सबके लिए है।

किताब से क्या सीख मिलती है?

ये किताब सिखाती है कि ट्रांसफॉर्मेशन रोज लिए जाने वाले छोटे-छोटे फैसलों का नतीजा है। IFS से हम समझते हैं कि हमारे दिमाग के अलग-अलग हिस्से हमें बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन असली गाइड हमारी सेल्फ एनर्जी होती है। चूज अगेन मेथड नेगेटिव थॉट्स को धीरे से शिफ्ट करता है।

गैबी की व्यक्तिगत कहानियां जैसे ‘अपनी आंतरिक हीलिंग’ दिखाती है कि सेल्फ-कंपैशन ही ग्रोथ का ईंधन है। किताब याद दिलाती है कि हीलिंग परफेक्शन नहीं, बल्कि इंटीग्रेशन की प्रक्रिया है और आपके भीतर ही स्टार्टिंग पॉइंट और सॉल्यूशन दोनों है। कुल मिलाकर किताब यह समझाती है कि असली हीलिंग प्यार, जिज्ञासा और माफी से आगे बढ़ती है।

किताब के बारे में मेरी राय

मुझे ये किताब इसलिए पसंद आई क्योंकि ये स्पिरिचुअलिटी को ग्राउंडेड बनाती है। IFS का साइंटिफिक बेस जैसे ब्रेन के प्रोटेक्टिव पार्ट्स ने मुझे कन्विंस किया। गैबी की राइटिंग स्टाइल बहुत सरल और सहज है। कुछ जगहों पर रिपीटिशन की शिकायत है, लेकिन अगर आप IFS में इंटरेस्टेड हैं या सेल्फ-कंपैशन सीखना चाहते हैं तो ये पढ़ें। ये किताब न सिर्फ पढ़ने लायक, बल्कि लाइफ-लॉन्ग प्रैक्टिस है। गैबी हमें बताती हैं कि बदलाव हमेशा पॉसिबल है, बस इसके लिए खुद को पहचानें।

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