बुक रिव्यू: क्या आप जरूरत से ज्यादा सोचते हैं: ब्रेन क्लटर को कैसे करें साफ, रहें शांत और फोकस्ड, यही गुर सिखाती है ये किताब

11 मिनट पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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किताब- ‘हाउ टू स्टॉप ओवर थिंकिंग’

लेखक- निक ट्रेंटन

अनुवाद- अमित कुश

प्रकाशक– पेंगुइन

मूल्य- 250 रुपए

अमेरिकी लेखक निक ट्रेंटन की किताब ‘हाउ टू स्टॉप ओवर थिंकिंग’ माइंड को डिक्लटर करने और प्रेजेंट पर फोकस करने पर बेस्ड है। ये हमें ज्यादा सोचने की आदत से मुक्ति दिलाने की प्रेरणा देती है।

निक ट्रेंटन एक जाने-माने साइकोलॉजिस्ट और सेल्फ-हेल्प एक्सपर्ट हैं। उन्होंने साइकोलॉजी में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। वह अपनी किताबों में जटिल मानसिक प्रक्रियाओं को आसान भाषा में समझाते हैं।

किताब का उद्देश्य

निक ट्रेंटन की किताब ‘हाउ टू स्टॉप ओवर थिंकिंग’ का मुख्य उद्देश्य पाठकों को यह सिखाना है कि वे कैसे अपने मन को शांत, पॉजिटिव और वर्क-फोकस्ड बना सकते हैं। किताब हमें बताती है कि ओवर थिंकिंग को कम करने और मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए हमें तत्काल कदम उठाने चाहिए। लेखक बताते हैं कि ओवरथिंकिंग एंग्जाइटी का एक मुख्य लक्षण है। निक ने किताब में 5 अध्याय और 29 चैप्टर्स के जरिए ओवर थिंकिंग से उबरने का तरीका बताया है।

लेखक पारंपरिक मनोविज्ञान की उस कमी को उजागर करते हैं, जो एंग्जाइटी के लक्षणों पर ध्यान देता है, न कि उसके कारणों पर। यह किताब एक व्यक्तिगत और सक्रिय नजरिये की वकालत करती है, जो चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।

  • अवेयरनेस
  • विचारों को चुनौती
  • रिलैक्सेशन और माइंडफुलनेस
  • एक्शन ओरिएंटेड स्ट्रैटजी

अवेयरनेस: ओवर थिंकिंग से मुक्ति की सबसे असरदार ‘दवा’

किताब में जागरूकता को ओवर थिंकिंग से निकलने का सबसे असरदार तरीका बताया गया है। लेखक कहते हैं कि हमें रोजमर्रा की 10 छोटी-छोटी मानसिक आदतों का अभ्यास करना चाहिए, जैसे- अपनी सांस पर ध्यान देना, शरीर को महसूस करना (बॉडी स्कैन) या अपने आसपास के माहौल को समझना।

इसके लिए दो चीजें मदद करती हैं-

  • विचार लेबलिंग: जब कोई नकारात्मक ख्याल आए तो खुद से कहना– “ये सिर्फ एक विचार है, हकीकत नहीं।”
  • ट्रिगर पहचानना: किन स्थितियों में आपका दिमाग जरूरत से ज्यादा सोचने लगता है, इसे पहचानना।

अगर आप रोजाना सिर्फ 10 मिनट अवेयरनेस की प्रैक्टिस करें तो ओवर थिंकिंग का लेवल लगभग 20% तक कम हो सकता है। इसके अलावा नकारात्मक विचारों के सिलसिले को जल्दी पहचानकर आप खुद को बार-बार चिंता में फंसने से बचा सकते हैं।

किताब की शैली

‘हाउ टू स्टॉप ओवर थिंकिंग’ प्रमाणों पर आधारित किताब है, जो वैज्ञानिक तथ्यों को सरल और व्यावहारिक सलाह के साथ जोड़ती है। लेखक ने अपनी व्यक्तिगत कहानियों (विशेष रूप से इमोशनल हेल्थ के बारे में) को शामिल करके किताब को और भी रिलेवेंट बनाया है। उदाहरण के लिए, वे बताते हैं कि कैसे फार्म लाइफ ने उन्हें सादगी सिखाई, जो उनके लिए माइंडफुलनेस का आधार बनी।

किताब की भाषा सरल और समझने योग्य है, जो इसे सामान्य पाठकों और मनोविज्ञान में रुचि रखने वालों दोनों के लिए उपयुक्त बनाती है। अध्याय छोटे-छोटे हैं, प्रत्येक में व्यायाम और रिफ्लेक्शन शामिल हैं, जो इसे इंटरैक्टिव बनाते हैं।

किताब के बारे में मेरी राय

यह किताब मेंटल हेल्थ और शांति के प्रति एक नया नजरिया देती है। यह न केवल विचार पैटर्न पर ध्यान देती है, बल्कि भावनात्मक और व्यावहारिक कल्याण को भी उतना ही महत्व देती है।

मेरे अनुसार ‘हाउ टू स्टॉप ओवर थिंकिंग’ एक प्रेरणादायक और उपयोगी किताब है। यह हमें दिखाती है कि कैसे हम अपने दिमाग के शोर को कंट्रोल करके खुशहाल और संतुलित जीवन जी सकते हैं। किताब में दिये गए कई अभ्यास सरल हैं और इन्हें नियमित जीवन में शामिल करके जल्दी ही बदलाव महसूस किया जा सकता है।

यह किताब उन लोगों के लिए एक मूल्यवान रिसोर्स है, जो अपनी चिंता पर कंट्रोल रखना चाहते हैं और एक शांत, सार्थक जिंदगी जीना चाहते हैं। ट्रेंटन की तकनीकें, जैसे विचार डिक्लटरिंग और 4 A’s, वास्तविक जीवन में लागू करने योग्य हैं। उदाहरण के लिए, एक अध्याय में वे बताते हैं कि कैसे एक व्यस्त प्रोफेशनल ने डेली जर्नलिंग से अपनी ओवर थिंकिंग को 50% कम किया।

हालांकि कुछ अभ्यास प्रारंभ में चुनौतीपूर्ण लग सकते हैं, जैसे रोजाना डायरी रखना या ध्यान करना। लेकिन अगर लगातार किया जाए तो ये फायदेमंद सिद्ध होते हैं। कुल मिलाकर यह किताब उन लोगों के लिए ज्यादा मददगार है, जो तनाव, चिंता और विचारों के जंजाल से बाहर निकलना चाहते हैं।

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