खूनी हो या बादी बवासीर, आयुर्वेद में छिपा है 100% इलाज, 7 घरेलू उपायों से दूर होगा दर्द, सूजन

Home remedies for piles: बवासीर (piles) कई तरह का होता है, एक आंतरिक बवासीर (खूनी बवासीर) और दूसरा बाहरी बवासीर (बादी बवासीर). कुछ लोगों को बड़ी बवासीर या बादी बवासीर में मस्से बन जाता है, जिसे मस्से वाली पाइल्स भी कहते हैं. इस समस्या में अक्सर लोग अपनी परेशानी को शर्म और झिझक के कारण बताने से बचते हैं. आपको बता दें कि बवासीर कैसी भी हो, इसका इलाज मौजूद है. यह कोई लाइलाज रोग नहीं है. आप सही समय, हेल्दी डाइट, योग और कुछ घरेलू उपायों को आजमाकर बवासीर की समस्या को काफी हद तक कम कर सकते हैं. बवासीर होने में काफी दर्द होता है. शौच करने में समस्या होती है. चलने-फिरने, बैठने में तकलीफ होती है. ऐसे में जितनी जल्दी इसका इलाज कराया जाए, उतना ही आपको आराम मिलेगा. आयुर्वेद में बवासीर का इलाज मौजूद है. चलिए जानते हैं इसके बारे में यहां.

क्या होती है बवासीर? (What is piles)

आयुर्वेद में बड़ी बवासीर को अर्श कहा गया है. इसमें गुदे के आसपास की नसें सूज जाती हैं. मस्सों की तरह उभर आती हैं. इसे बड़ी बवासीर कहते हैं. ये मस्से कभी अंदर रहते हैं (इंटर्नल पाइल्स) तो कभी बाहर निकल आते हैं (एक्सटर्नल पाइल्स). बवासीर होने का मुख्य कारण है लगातार कब्ज बने रहना. जब आप शौचालय में पेट को साफ करने के लिए देर तक बैठकर जोर लगाते हैं ताकि मल त्याग कर सकें, तो इस दौरान नसों पर दबाव बढ़ जाता है. ऐसा लगातार होने से पाइल्स की समस्या शुरू हो जाती है.

बवासीर होने का कारण (causes of piles) 

लगातार मसालेदार और जंक फूड का सेवन, लंबे समय तक टॉयलेट में बैठे रहना, पानी कम पीना, फाइबर युक्त फूड्स का सेवन कम करना, प्रेग्नेंसी, भारी वजन उठाना आदि भी बवासीर को बढ़ाते हैं. शुरुआत में बवासीर होने पर अधिक तकलीफ महसूस नहीं होती है, लेकिन धीरे-धीरे दर्द, जलन, खुजली और खून आना शुरू हो जाता है. मल त्यागते समय तकलीफ इतनी बढ़ जाती है कि जीवन की गुणवत्ता पर भी इसका असर पड़ता है.

-यदि आप चाहते हैं कि आपको कभी भी जीवन में बवासीर न हो तो आप सबसे पहले अपने खानपान पर ध्यान दें. प्रतिदिन कुछ ना कुछ ऐसी चीजों को सेवन करें, जिसमें फाइबर भरपूर हो. हरी सब्जियां, सलाद, फल, दलिया और इसबगोल की भूसी खाएं.

-पानी जरूर पर्याप्त मात्रा में पिएं. इससे शरीर से टॉक्सिन पदार्थों को निकलने में मदद मिलती है. मल हार्ड नहीं होता है. कब्ज से बचने का ये सबसे आसान तरीका है. ऑयली और स्पाइसी फूड्स का सेवन बिल्कुल न करें. खासकर तब, जब आपको बवासीर और कब्ज की समस्या हो.

-इसके साथ ही गुनगुने पानी का सिट्ज बाथ दिन में दो-तीन बार करना राहत देता है. इसमें बस एक टब में गुनगुना पानी भरकर 10-15 मिनट बैठना होता है, जिससे मस्सों की सूजन और दर्द कम होता है.

-नारियल तेल और एलोवेरा जेल मस्सों पर लगाएं. इससे सूजन, जलन, खुजली दूर होती है. त्रिफला चूर्ण रात में लेने से कब्ज ठीक होता है. इसबगोल मल को नरम बनाता है.

-बरगद का दूध और अर्जुन छाल का काढ़ा भी खून रोकने और नसों को मजबूत करने में मदद करते हैं. नीम और हल्दी का लेप लगाने से मस्से सिकुड़ते हैं.

-अंजीर रात भर भिगोकर सुबह खाने से मल त्याग आसान होता है. दही और छाछ को खाने में शामिल करना भी फायदेमंद है, क्योंकि यह पाचन को सुधारता है.

-साथ ही देर तक लगातार बैठकर काम करने से बचना चाहिए. टॉयलेट में कुछ लोग देर तक बैठकर मोबाइल चलाते रहते हैं. ऐसा न करें. नियमित योग करें. भारतीय शौचालय में स्क्वैटिंग पोजिशन में बैठना होता है. ये भी बेस्ट है, क्योंकि इससे गुदा पर कम दबाव पड़ता है.

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