Last Updated:
Blood in Urine and Cancer: दिल्ली के एक व्यक्ति को पेशाब में खून आता था, लेकिन वह दवाएं लेकर ठीक हो जाता था. ऐसा 2 साल तक लगातार चलता रहा और वह इस संकेत को इग्नोर करता रहा. जब समस्या बढ़ी और डॉक्टर्स ने जांच की, तो पता चला वह व्यक्ति एडवांस किडनी कैंसर से जूझ रहा है. दिल्ली AIIMS में रोबोटिक सर्जरी के जरिए यह कैंसर हटाया गया है. डॉक्टर्स ने चेतावनी दी है कि पेशाब में खून आए, तो इस संकेत को कभी नजरअंदाज न करें. वक्त रहते अपनी जांच कराएं.
पेशाब में खून आना किडनी कैंसर का लक्षण हो सकता है.
Kidney Cancer Symptoms: पेशाब में खून आना सेहत से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं का संकेत होता है. आमतौर पर यह यूरिन इंफेक्शन या किडनी स्टोन निकलने का लक्षण होता है. अगर परेशानी लगातार बनी रहे, तो यह कैंसर का बड़ा संकेत हो सकता है. दिल्ली के एक 48 साल के शख्स को करीब 2 साल तक पेशाब में खून आता रहा. कभी अचानक यूरिन में खून आता, तो दवा लेने के बाद बंद हो जाता है. उसे किसी तरह का दर्द, बुखार या अन्य कोई परेशानी नहीं हुई. यही वजह रही कि वह 2 साल तक इस समस्या को इग्नोर करता रहा. आखिर में खून आने के साथ पेशाब रुकने लगी. तब जाकर उसने अपनी जांच कराई. डॉक्टर्स ने जांच के बाद बताया कि उस शख्स की राइट किडनी में बड़ा ट्यूमर डेवलप हो चुका है.
TOI की रिपोर्ट के मुताबिक जब युवक को किडनी में ट्यूमर का पता लगा, तो डॉक्टर्स ने उसे दिल्ली एम्स रेफर कर दिया. एम्स के डॉक्टर्स ने स्कैन किया, तो पता चला है कि यह कैंसर किडनी से से बढ़ते हुए इन्फीरियर वेना कावा (IVC) तक पहुंच गया था. यह शरीर के निचले हिस्से से हार्ट तक खून ले जाने वाली मुख्य नस है. ऐसे में डॉक्टर्स ने सर्जरी करने का फैसला किया. एक्सपर्ट्स ने बताया कि किडनी कैंसर कुल कैंसर मामलों का लगभग 2 से 3% होता है, लेकिन 4 से 10% मामलों में यह बड़ी नसों तक फैल सकता है, जिससे मरीज की सर्जरी करना काफी जटिल हो जाता है. इस केस में भी यही स्थिति पैदा हो गई थी.
AIIMS के यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर बी नायक ने बताया कि जब ट्यूमर IVC में प्रवेश कर जाता है, तो ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है. कुछ मामलों में यह हार्ट की तरफ भी बढ़ सकता है. दिल्ली के 48 साल के मरीज का ट्यूमर लगभग 8 से 9 सेंटीमीटर का था. खास बात यह है कि मरीज को पोलियो का पुराना इतिहास था और वह शारीरिक रूप से दिव्यांग भी है. उसे बिना दर्द के हीमैचूरिया यानी पेशाब में खून आ रहा था, जिसे कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए. आमतौर पर ऐसे मामलों में बड़ा चीरा लगाकर ओपन सर्जरी की जाती है और कार्डियोवैस्कुलर सपोर्ट की जरूरत पड़ती है. हालांकि इस केस में सर्जिकल टीम ने रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए न्यूनतम इनवेसिव पद्धति अपनाई.
इस प्रक्रिया में किडनी के ट्यूमर के साथ-साथ नस में फैले ट्यूमर थ्रॉम्बस को भी हटाया गया. सर्जिकल टीम के सदस्य प्रोफेसर राजीव कुमार ने बताया कि रोबोटिक तकनीक जटिल सर्जरी को कम चीरे के साथ संभव बनाती है और कुछ चुनिंदा मामलों में यह फायदेमंद साबित हो सकती है. अधिकांश ट्यूमर थ्रॉम्बस के मामलों में अब भी ओपन सर्जरी ही मानक उपचार है, लेकिन कुछ मरीजों में मिनिमली इनवेसिव तकनीक से रिकवरी तेज हो सकती है. तीन सप्ताह पहले की गई सर्जरी सफल रही और हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट में क्लियर सेल रीनल कार्सिनोमा की पुष्टि हुई.
AIIMS के यूरोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड प्रोफेसर डॉ. अमलेश सेठ का कहना है कि अगर कैंसर अन्य अंगों में न फैला हो और पूरी तरह निकाल दिया जाए, तो एडवांस स्टेज में भी 5 साल की सर्वाइवल दर हो सकती है. सही सर्जरी के बाद करीब 50 से 70% मामलों में मरीज 5 साल तक जीवित रह सकता है. डॉक्टर्स का साफ कहा है कि पेशाब में बार-बार और लगातार खून आना कभी भी सामान्य लक्षण नहीं है. यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है. समय पर जांच और डॉक्टर की सलाह से आपकी जान बच सकती है. इसे लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए.
About the Author
अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें