किसानों की चिंता की वजह झुलसा रोग, इन टिप्स से पूरी तरह सेफ रहेगी फसल

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किसानों की चिंता की वजह झुलसा रोग, इन टिप्स से पूरी तरह सेफ रहेगी फसल

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Agriculture News: पेस्टीसाइड एक्सपर्ट अमित सिंह ने लोकल 18 से कहा कि रोग की शुरुआत दिखते ही प्रभावी फफूंदनाशक का छिड़काव करना चाहिए. रिडोमिल गोल्ड का उपयोग एक लीटर पानी में दो ग्राम की दर से किया जा सकता है.

सतना. मध्य फरवरी से लेकर मार्च के अंतिम दिनों तक का समय रबी सीजन की कुछ अहम फसलों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है. खेतों में हल्की नमी, दिन में बढ़ती गर्माहट और रात की ठंडक मिलकर ऐसा वातावरण बनाते हैं, जिसमें झुलसा रोग तेजी से फैलता है. कई किसान शुरुआत में इसे सामान्य पत्तियों का पीला पड़ना या पोषण की कमी समझ लेते हैं लेकिन जब तक असली कारण सामने आता है, तब तक फसल को भारी नुकसान हो चुका होता है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दौर में सतर्कता बरती जाए और समय पर उपचार किया जाए, तो उत्पादन में गिरावट रोककर भरपूर पैदावार ली जा सकती है. लोकल 18 से बातचीत में सतना के पेस्टीसाइड एक्सपर्ट अमित सिंह ने बताया कि झुलसा रोग मुख्य रूप से कवक जनित बीमारी है, जो टमाटर, प्याज और लहसुन की फसलों पर तेजी से हमला करती है. इसकी पहचान पत्तियों पर बैंगनी-भूरे धब्बों, पीली धारियों और किनारों से सूखने के रूप में होती है. धीरे-धीरे ये धब्बे बड़े होकर पूरी पत्ती को जला देते हैं. प्याज और लहसुन में यह संक्रमण कंद तक पहुंचकर सड़न पैदा कर सकता है जबकि टमाटर में फूल आने और फल बनने के समय इसका असर सीधे उत्पादन पर पड़ता है. समय पर नियंत्रण न किया जाए, तो आधी से अधिक तक की उपज प्रभावित हो सकती है.

अमित सिंह के अनुसार, रोग की शुरुआत दिखते ही प्रभावी फफूंदनाशक का छिड़काव करना चाहिए. रिडोमिल गोल्ड का उपयोग दो ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से किया जा सकता है. सामान्य संक्रमण की स्थिति में 400 से 500 ग्राम प्रति एकड़ पर्याप्त रहता है जबकि अधिक प्रकोप होने पर इसकी मात्रा एक किलोग्राम प्रति एकड़ तक की जा सकती है. इसके साथ इक्का 20% एसपी 100 ग्राम प्रति एकड़ मिलाना लाभकारी होता है. एक एकड़ में लगभग 150 से 200 लीटर पानी यानी 10 से 15 पंप के जरिए छिड़काव किया जाना चाहिए.

छिड़काव का सही समय और लागत
विशेषज्ञों की सलाह है कि स्प्रे सुबह या शाम के समय ही करें क्योंकि तेज धूप में दवा का असर कम हो सकता है. छिड़काव के दौरान खेत में समान रूप से दवा पहुंचे, इसका ध्यान रखना भी जरूरी है. एक एकड़ में इस उपचार पर लगभग 1000 से 1500 रुपये तक का खर्च आता है, जो संभावित नुकसान की तुलना में काफी कम है. प्याज और लहसुन में 15 फरवरी से 20 मार्च के बीच इसका खतरा अधिक रहता है जबकि टमाटर में फूल आने की अवस्था सबसे संवेदनशील मानी जाती है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस अवधि में खेत की नियमित निगरानी, संतुलित सिंचाई और समय पर दवा का उपयोग ही फसल को सुरक्षित रख सकता है. थोड़ी सी सावधानी किसानों को भारी नुकसान से बचाकर बेहतर उत्पादन और अधिक मुनाफा दिला सकती है.

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