कनाडा में ‘नफरत’ के खिलाफ बड़ी जंग: क्या भारतीयों को खालिस्तानियों से मुक्ति?

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कनाडा में ‘नफरत’ के खिलाफ बड़ी जंग: क्या भारतीयों को खालिस्तानियों से मुक्ति?

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कनाडा सरकार ने नफरत और उग्रवाद से निपटने के लिए ‘बिल सी-9’ (कॉम्बैटिंग हेट एक्ट) पेश किया है, जो भारतीय प्रवासियों के लिए सुरक्षा की नई उम्मीद लेकर आया है. पूर्व राजनयिक संजय कुमार वर्मा के अनुसार, यह कानून उन ‘ग्रे जोन’ गतिविधियों को अपराध की श्रेणी में लाता है, जिनका इस्तेमाल खालिस्तानी उग्रवादी भारतीयों को डराने-धमकाने के लिए करते रहे हैं. अब मंदिरों या सांस्कृतिक केंद्रों के रास्ते रोकना और प्रतीकात्मक नफरत फैलाना दंडनीय अपराध होगा.

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कनाडा में एंटी-हेट बिल लाया जा रहा है.

Canada Anti Hate Bill: कनाडा में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए पिछला कुछ समय काफी तनावपूर्ण रहा है. खालिस्तानी उग्रवाद की बढ़ती गतिविधियों ने न केवल कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित किया, बल्कि वहां के आम भारतीय समुदाय में असुरक्षा की भावना भी पैदा की. इसी बीच, कनाडा का हालिया कानून, बिल सी-9 (Bill C-9) जिसे कॉम्बैटिंग हेट एक्ट कहा जा रहा है, चर्चा के केंद्र में है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून विशेष रूप से उन चुनौतियों का समाधान कर सकता है, जिनका सामना भारतीय समुदाय खालिस्तानी चरमपंथियों के कारण कर रहा है.

‘इंडिया नैरेटिव’ के लिए लिखे एक लेख में पूर्व उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा ने इस बात को रेखांकित किया कि कनाडा में भारतीय प्रवासियों के लिए माहौल अब दिखावटी और कई बार खुलकर शत्रुतापूर्ण हो गया है. उनके अनुसार, जो गतिविधियां पहले केवल राजनीतिक असहमति लगती थीं, वे अब डराने-धमकाने, हिंसा के उकसावे और सीधे तौर पर ‘हेट स्पीच’ में बदल चुकी हैं.

मानसिक दबाव भी सुरक्षा का उल्लंधन

अभी तक कनाडा की कानूनी प्रणाली उन मामलों में कार्रवाई करने में हिचकिचाती थी जहां शारीरिक नुकसान प्रत्यक्ष रूप से साबित नहीं होता था. लेकिन बिल सी-9 इस ‘ग्रे जोन’ को खत्म करने की कोशिश करता है. यह कानून मान्यता देता है कि प्रतीकात्मक घृणा और समुदायों पर बनाया गया मानसिक दबाव भी सुरक्षा के अधिकार का उल्लंघन है.

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और बाधाओं पर प्रहार

इस कानून के तहत अब उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी जो धार्मिक या सांस्कृतिक स्थलों तक पहुँचने वाले श्रद्धालुओं के रास्ते में रुकावट डालते हैं. हाल के वर्षों में हमने देखा है कि कनाडा में भारतीय मंदिरों के बाहर आक्रामक प्रदर्शन किए जाते हैं और भक्तों को अंदर जाने से रोका जाता है. बिल सी-9 इन कृत्यों को स्पष्ट रूप से अपराध की श्रेणी में लाता है.

खालिस्तानी उग्रवाद का ‘पैटर्न’ और चुनौतियां

लेख में उन चिंताजनक घटनाओं का भी जिक्र किया गया है जो सामान्य विरोध प्रदर्शनों की सीमा लांघ चुकी हैं. संजय कुमार वर्मा ने बताया, ये घटनाएं महज विरोध नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हैं जिसका उद्देश्य भारतीय प्रवासियों को डराना और उन पर दबाव बनाना है.

  1. विवादास्पद झांकियां: टोरंटो में इंदिरा गांधी की हत्या को वीरता के रूप में दर्शाने वाला दृश्य.
  2. धमकी भरे पोस्टर: भारतीय राजनयिकों की तस्वीरों पर नकली गोलियों के निशान वाले पोस्टर लगाना.
  3. मंदिरों में तोड़फोड़: उग्रवादी नारों के साथ धार्मिक स्थलों को निशाना बनाना.

अभिव्यक्ति की आजादी बनाम सुरक्षा

कनाडा में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of Speech) का अधिकार काफी मजबूत है. ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि इस कानून का दुरुपयोग न हो. कानून को इतना सटीक होना चाहिए कि वह वास्तविक नफरत और उग्रवाद पर तो प्रहार करे, लेकिन शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध के दायरे को न सिकोड़े. (आईएएनएस से इनुट्स प्राप्त)

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Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें

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