किसानों के लिए बड़ी खबर! ईरान में जंग के बीच भारत में घटा यूरिया का प्रोडक्शन, क्या होगा असर?

Iran-Israel War: ईरान-इजरायल के बीच जंग से मिडिल ईस्ट में उपजे तनाव का ही नतीजा है कि भारत में फर्टिलाइजर बनाने वाली कंपनियां प्रोडक्शन में काट-छांट कर रही हैं. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नाम न जाहिर करने की शर्त पर मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर कोऑपरेटिव लिमिटेड जैसी कुछ बड़ी कंपनियों ने अपने यूरिया प्लांट में उत्पादन में कमी ला रही हैं. लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) की सप्लाई में लबे समय तक रुकावट कंपनियों को अपनी फैसिलिटी बंद करने पर मजबूर कर सकती है. 

यूरिया का LNG से क्या कनेक्शन?

यूरिया के प्रोडक्शन में कच्चे माल के रुप में LNG की अहमियत काफी ज्यादा है. यूरिया बनाने के लिए LNG का इस्तेमाल न केवल कच्चे माल के रूप में, बल्कि भारी मशीनरी चलाने के लिए ईंधन के रूप में भी होता है. ऐसे में कतर के रास लफान (Ras Laffan) संयंत्र पर ईरान के हमले के बाद ‘फोर्स मेज्योर’ का ऐलान कर दिया गया.

‘फोर्स मेज्योर’ एक कानूनी शब्द है, जिसका मतलब उन हालातों से हैं जिन पर इंसान का कोई कंट्रोल नहीं है जैसे कि प्राकृतिक आपदा या युद्ध की परिस्थिति. जब कोई कंपनी ‘फोर्स मेज्योर’ की घोषणा करती है, तो इसका मतलब है कि वह मौजूदा हालातों के चलते अपने कॉन्ट्रैक्ट्स को पूरा नहीं कर पाएगी और सप्लाई न दे पाने की स्थिति में उस पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा. 

भारत के लिए क्या है चिंता की बात? 

भारत अपनी जरूरत का 40-45 परसेंट LNG कतर से ही आयात करता है और भारत में यूरिया का लगभग 80 परसेंट प्रोडक्शन LNG पर निर्भर है. ऐसे में सप्लाई में कमी का असर कमोडिटी मार्केट पर पड़ रहा है, जिससे कीमतें बढ़ रही हैं और बड़ी आर्थिक चिंताएं पैदा हो गई हैं.

ब्लूमबर्ग को मिले कंपनी के नोटिस के मुताबिक, पाकिस्तान की सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइन्स लिमिटेड ने भी कस्टमर्स को बताया है कि मिडिल ईस्ट में लड़ाई की वजह से वह अपने फर्टिलाइजर प्लांट्स को रीगैसीफाइड LNG सप्लाई नहीं कर पाएगी. देश को ज्यादातर LNG कतर से मिलती है और यह रोक बुधवार आधी रात से लागू होगी.

भारत के फर्टिलाइजर मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने यूरिया में कटौती पर कोई कमेंट किए बिना कहा कि जियोपॉलिटिकल हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और गैस सप्लाई में अभी कोई कमी नहीं है. फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के डायरेक्टर जनरल सुरेश कुमार चौधरी के मुताबिक, जल्द ही डिमांड पूरी करने के लिए काफी स्टॉक है. चौधरी ने मंगलवार को एक इंटरव्यू में कहा, “हमें पूरी उम्मीद है कि जंग जल्द ही खत्म हो सकती है.” उन्होंने बिना ज्यादा जानकारी दिए कहा, “अगर जंग जारी रहती है, तो यह हमारे लिए चिंता की बात होगी.”

चिंता की एक बात यह भी है कि भारत पर यह संकट खरीफ सीजन की बुवाई से ठीक पहले आया. ऐसे में अगर खाद की उपलब्धता में रुकावट आई, तो कीमतों पर असर पड़ेगा. 

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