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खरगोन में जननायक टंट्या मामा भील की प्रतिमा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. टेंडर शर्तों के अनुसार धातु या पत्थर की प्रतिमा लगनी थी, लेकिन फाइबर की मूर्ति स्थापित कर दी गई. जांच में लापरवाही सामने आने पर नगरपालिका के दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है. ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया है और नई प्रतिमा लगाने के निर्देश दिए गए हैं.
खरगोन. जननायक क्रांति सूर्य टंट्या मामा भील की प्रतिमा को लेकर चल रहा विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है. बिस्टान नाका तिराहा पर स्थापित प्रतिमा में कथित भ्रष्टाचार सामने आने के बाद नगरीय प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है. जांच में सामने आया कि जिस प्रतिमा को संगमरमर या अष्टधातु से बनना था, उसकी जगह फाइबर की प्रतिमा लगा दी गई. इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने नगरपालिका के दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब कांग्रेस और भाजपा दोनों ही दलों की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा था.
यह मामला सिर्फ एक प्रतिमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे नगरपालिका की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं. टंट्या मामा भील को आदिवासी समाज और क्षेत्र के लोग जननायक के रूप में पूजते हैं. ऐसे महापुरुष की प्रतिमा में गुणवत्ता से समझौता होना सामाजिक और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. प्रतिमा का लोकार्पण विधायक और कलेक्टर की मौजूदगी में हो चुका था, जिससे बाद में हुए खुलासे ने प्रशासन को असहज स्थिति में डाल दिया.
टेंडर शर्तों के विपरीत लगी प्रतिमा
नगरपालिका परिषद ने 24 सितंबर 2025 को बिस्टान नाका क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए करीब 40 लाख रुपए के कार्य को स्वीकृति दी थी. इसी योजना में टंट्या मामा भील की प्रतिमा स्थापना भी शामिल थी. टेंडर के अनुसार प्रतिमा की लागत 9 लाख 90 हजार रुपए तय की गई थी और शर्त थी कि मूर्ति संगमरमर या अष्टधातु की होगी. लेकिन ठेकेदार ने इन शर्तों का उल्लंघन करते हुए बेहद कम लागत की एफआरपी यानी फाइबर की प्रतिमा स्थापित कर दी थी.
भौतिक सत्यापन में लापरवाही पड़ी भारी
प्रतिमा स्थापना से पहले नगरपालिका के सहायक यंत्री मनीष महाजन और सब इंजीनियर जितेंद्र मेड़ा द्वारा मौके पर भौतिक सत्यापन किया गया था. दस्तावेजों में प्रतिमा को टेंडर शर्तों के अनुरूप बताया गया. बाद में जांच में यह सत्यापन गलत पाया गया. इसी लापरवाही को गंभीर मानते हुए दोनों इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.
विरोध के बाद तेज हुई कार्रवाई
इस पूरे मामले को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी ने लिखित शिकायत की थी. वहीं भाजपा के कई पार्षदों ने भी प्रतिमा की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए थे. मामला सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और आदिवासी समाज में भी नाराजगी देखी गई. लगातार बढ़ते दबाव के बाद प्रशासन ने जांच तेज की और कार्रवाई की गई.
ठेकेदार पर भी हुई सख्त कार्रवाई
मामला उजागर होने के बाद नगरपालिका परिषद ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया है. कलेक्टर भव्या मित्तल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि टेंडर शर्तों के अनुसार नई धातु की प्रतिमा स्थापित की जाएगी. साथ ही भुगतान और सामग्री की जांच भी की जा रही है. कांग्रेस नेता पप्पू मोये ने कहा कि टंट्या मामा देश के महापुरुष हैं और उनका अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा. दयाराम दफल ने चेतावनी दी कि यदि तय मानकों के अनुसार प्रतिमा नहीं लगी, तो आंदोलन किया जाएगा. स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया है.
जांच में सामने आए मुख्य बिंदु
- टेंडर में धातु या पत्थर की प्रतिमा का प्रावधान
- मौके पर फाइबर की प्रतिमा की स्थापना
- अधिकारियों द्वारा गलत भौतिक सत्यापन
- भुगतान और गुणवत्ता में बड़ा अंतर
घटनाक्रम को ऐसे समझें
- 24 सितंबर 2025 को सौंदर्यीकरण कार्य स्वीकृत
- 9.90 लाख रुपए का प्रतिमा टेंडर जारी
- 15 नवंबर 2025 को प्रतिमा का लोकार्पण
- शिकायत के बाद प्रतिमा की जांच
- फाइबर प्रतिमा होने का खुलासा
- दो इंजीनियर निलंबित, ठेकेदार ब्लैकलिस्ट
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
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