दमोह. जिले में पानी जैसी बुनियादी जरूरत को लेकर किसानों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा. जिले के 33 गांवों से आए हजारों किसान सैकड़ों ट्रैक्टरों के साथ जिला मुख्यालय की ओर बढ़े. मामला सीतानगर सिंचाई परियोजना से जुड़ा है, जिसमें पहले 84 गांवों को शामिल किया गया था, लेकिन परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान 33 गांवों को बाहर कर दिया गया. इन्हीं गांवों में जल वितरण बंद होने से खेती पर सीधा असर पड़ा और किसानों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा. किसानों से मिलने पहुंचे कलेक्टर सुधीर कोचर ने कहा कि प्रशासन और सरकार किसानों के साथ है. 24 घंटे दरवाजे खुले हुए हैं, जो भी परेशानी है उसे बातचीत से दूर किया जाएगा.
किसानों का कहना था कि बीते चार सालों से वे प्रशासन और सरकार से सिंचाई सुविधा बहाल करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ. इसी नाराजगी के चलते किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकाली. हालात तब और तनावपूर्ण हो गए, जब शहर की व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के चलते पुलिस ने किसानों को हटा नाका पर रोक दिया. इसके बावजूद किसान शांतिपूर्वक अपनी मांगों पर डटे रहे. कलेक्टर के आश्वासन के बाद फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन किसानों की नजर अब सरकार के फैसले पर टिकी है.
सीतानगर सिंचाई परियोजना दमोह जिले की बड़ी परियोजनाओं में से एक मानी जाती है. शुरुआत में इसमें 84 गांवों को सिंचाई सुविधा देने की योजना थी. बाद में तकनीकी और प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए 33 गांवों को इससे अलग कर दिया गया. इन गांवों में खेती पूरी तरह बारिश और सीमित जल स्रोतों पर निर्भर है. पानी की सप्लाई रुकने से रबी और खरीफ दोनों फसलों पर संकट गहराने लगा.
सैकड़ों ट्रैक्टर और हजारों किसान सड़कों पर
ग्रामीण इलाकों से निकले किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर दमोह शहर की ओर बढ़े. उनका लक्ष्य कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी बात सीधे प्रशासन तक रखना था. किसानों की संख्या और ट्रैक्टरों की कतारें देखते ही प्रशासन सतर्क हो गया. पुलिस बल तैनात कर किसानों को शहर में प्रवेश से पहले रोक लिया गया, ताकि कानून व्यवस्था प्रभावित न हो.
पुलिस ने रोका, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा
पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद किसानों ने वहीं धरना शुरू कर दिया. कई घंटों तक चले इस प्रदर्शन में किसी तरह की तोड़फोड़ या हिंसा की सूचना नहीं आई. किसान अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे और प्रशासन से बातचीत की मांग करते रहे. माहौल गहमागहमी भरा जरूर था, लेकिन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा.
कलेक्टर पहुंचे किसानों के बीच
लंबे इंतजार के बाद दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर खुद किसानों के बीच पहुंचे. उन्होंने किसानों से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं. कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सिंचाई परियोजना से जुड़े निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर होने हैं, लेकिन जिला प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सभी आवश्यक प्रस्ताव और ड्राफ्ट तैयार कर सरकार को भेजेगा.
किसानों को दिया गया आश्वासन
कलेक्टर ने किसानों को भरोसा दिलाया कि चार महीने के भीतर पूरी ड्राफ्टिंग तैयार कर शासन को भेज दी जाएगी. उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन के दरवाजे किसानों के लिए 24 घंटे खुले हैं और किसी भी समस्या पर सीधे संपर्क किया जा सकता है. इस आश्वासन के बाद किसानों में संतोष नजर आया और आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया.
कांग्रेस ने भी दिया आंदोलन को समर्थन
किसानों के इस आंदोलन को कांग्रेस का समर्थन भी मिला. कांग्रेस नेताओं ने किसानों की मांग को जायज बताते हुए कहा कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत से किसी भी गांव को वंचित नहीं किया जाना चाहिए. हालांकि आंदोलन के दौरान किसी राजनीतिक मंच या भाषण की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई.
किसानों की प्रमुख मांगें
सीतानगर सिंचाई परियोजना में 33 गांवों को दोबारा शामिल किया जाए
जल वितरण तत्काल बहाल किया जाए
परियोजना से जुड़े निर्णयों की समयबद्ध जानकारी किसानों को दी जाए
प्रशासन के सामने क्या हैं विकल्प
- तकनीकी रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेजना
- परियोजना में संशोधन की संभावनाएं तलाशना
- वैकल्पिक जल स्रोतों पर अस्थायी समाधान लागू करना
- सीतानगर सिंचाई परियोजना एक नजर में
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