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Bhopal Metro Passenger Story : मध्यप्रदेश की राजधानी में 7 सालों के लंबे इंतजार के बाद 21 दिसंबर 2025 को 7 किमी के रूट पर शुरू हुई मेट्रो अब लगभग 3 महीने बाद ही एक ट्रिप में बमुश्किल 10 यात्रियों के साथ दौड़ रही है, देखिए कैसे Local18 की रियलिटी चेक कराती इस रिपोर्ट में कछुए की रफ्तार से दौड़ती 3 कोच वाली मेट्रो 40 किमी की स्पीड भी नहीं पकड़ रही.
Bhopal News : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में साल 2025 में 21 दिसंबर को आम जनता के लिए शुरू हुई थी. जिसके बाद अब भोपाल मेट्रो को शुरू हुए लगभग 3 महीने का वक्त बीत चुका है लेकिन इतने कम समय में ही भोपाल मेट्रो प्रशासन यात्रियों की कमी से जूझ रहा है.
राजधानी भोपाल में साल 2019 में मेट्रो निर्माण का काम शुरू हुआ था. जिसके बाद 7 साल में सुभाष नगर से एम्स तक के 7 किमी के रूट पर 3 कोच वाली मेट्रो जनता के लिए शुरू हुई तो शुरुआती दिनों में खूब भीड़ भी दिखी लेकिन अब जब रानी कमलापति मेट्रो स्टेशन पर हमें मेट्रो दिखी तो उसमें गिनती के 10 से भी कम यात्री दिखें. इतना ही नहीं मेट्रो कछुए की स्पीड से चल रही है. जो 45 किमी की स्पीड से दौड़ रही बाइक से भी आधी रफ्तार पर हमें चलती दिखी. देखिए हमारी रियलिटी चेक करती आंखों देखी यह रिपोर्ट.
3 महीने में ही यात्रियों के लिए तरसने लगी भोपाल मेट्रो
राजधानी भोपाल में कारोंद से लेकर एम्स के बीच ओरेंज लाइन लगभग 16 किलोमीटर की है. इसी लाइन के सुभाष नगर से एम्स के बीच 7 किमी ट्रैक पर भोपाल मेट्रो का बीते साल शुभारंभ हुआ था लेकिन इतने कम समय में ही भोपाल मेट्रो यात्रियों के लिए तरसने लगी है. जब हमने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के सामने बने स्टेशन पर भोपाल मेट्रो को देखा तो बमुश्किल गिनती के 10 से कम यात्री हमें दिखे.
उंगलियों पर गिन ली भोपाल मेट्रो में यात्रियों की संख्या
राजधानी के डॉ अंबेडकर (GG) फ्लाईओवर के सामने से जब Local18 रिपोर्टर ने मेट्रो को निकलते देखा तो उसमें 10 से भी कम यात्री ऑफिस छूटने के समय यानी 4 बजे दिखे. इतना ही नहीं भोपाल मेट्रो की 3 कोच वाली इस मेट्रो के आखिरी कोच में हमें कोई भी यात्री नहीं दिखा यानी बाकीं दो डिब्बों में कुछ यात्री तो थे लेकिन आखिरी डिब्बा बिल्कुल खाली दौड़ रहा था.
कछुए की रफ्तार से दौड़ती मेट्रो का रियलिटी चेक
भोपाल में एमपी नगर मेट्रो स्टेशन से जब Local18 की टीम बाइक पर 40 की रफ्तार से मेट्रो के चलते ही निकली तो दो जगह रुकने के बाद भी हमारी टीम रानी कमलापति के सामने बने मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो के पहले पहुंच गई. जबकि मेट्रो लगभग बाइक की 40 की रफ्तार के मुकाबले कछुए की रफ्तार से चल रही थी. एक्सपर्ट भोपाल मेट्रो में कम यात्रियों की संख्या का दोष इसकी धीमी रफ्तार को भी देते हैं.
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें
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