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Bhopal 5 Haunted Places: भोपाल अपने प्राकृतिक हरियाली और धरोहर के लिए प्रसिद्ध है, मगर यहां कुछ ऐसी भी जगहें हैं जो अंधेरा होते ही वीरान हो जाती हैं. सालों से यहां किसी का आना-जाना नहीं रहा है. आइए जानते हैं इन जगहों के बारे में…
भोपाल के ताज-उल-मस्जिद के पास स्थित ताजमहल पैलेस को शाहजहां बेगम ने बनवाया था. उस दौर में यह अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता था, लेकिन समय के साथ इसका दौर बदलता रहा. इस पैलेस के बारे में कहा जाता है कि यहां पहले कब्रिस्तान हुआ करता था, इस वजह से इसके अंदर जाने से आज भी लोग कतराते हैं.

फिल्म निर्माता स्त्री की शूटिंग ताजमहल पैलेस में कर रहे थे, तब वहां के निवासियों ने सभी को ये सलाह दी थी कि हवेली में शूटिंग के दौरान फीमेल क्रू वहां पर बाल न खोलें और किसी भी खुशबूदार चीज का इस्तेमाल न करें.

पुराने भोपाल के आरिफ नगर स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री. इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों में इसका नाम दर्ज है. साल 1984 में फैक्ट्री से हुए गैस रिसाव में कम से कम 3,787 लोगों की मौत हुई थी.

कहा जाता है कि हजारों आत्माओं का दर्द आज भी यहां भटकता है. यहां आने पर लोगों को अजीबोगरीब आवाज़ें और डरावनी चीज़ें सुनाई देती हैं. कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि उन्होंने आत्माओं को तड़पते हुए देखा था.

शहर के इंदिरा गांधी महिला एवं बाल्य चिकित्सालय में पांचवें मंजिल पर बने 20 कमरों के प्राइवेट वार्ड आठ साल से ताले में बंद हैं. कहा जाता है कि भूतों की अफवाहों के चलते 5वीं मंजिल पर बने वार्ड बंद हैं.

13 साल पहले जब ये मामला उठा तब अस्पताल प्रबंधन ने इसमें मरीजों को भर्ती कर इलाज करना शुरू किया था. मगर, 8 साल पहले इसे फिर से ताले में बंद कर दिया गया. इंदिरा गांधी महिला एवं बाल्य चिकित्सालय के पांचवें फ्लोर पर 20 प्राइवेट रूम बने हुए हैं.

भोपाल के लालघाटी चौराहा के पास स्थित भूत बंगला अपने आप में काफी चर्चा का विषय रहा है. कहा जाता है कि सेठ छगनलाल के इस बंगले में नवाब हमीदुल्ला खां आया करते थे. 1930 में नगर सेठ के यहां हुए एक कार्यक्रम में यहां नेपाल नरेश भी आए थे.

लोग कहते हैं कि इस बंगले में कई बार खून से सनी लाशें मिली हैं, लेकिन आज तक यह पता नहीं चल सका कि आखिर ये कत्ल करता कौन है. कहा ये भी जाता है कि इस बंगले में जाने की हिमाकत जो भी करता है, उसे बंगले में रहने वाले भूत मौत की नींद सुला देते हैं.

शिवपुरी का प्राचीन किला लगभग दो हज़ार साल पहले वीर खंडेराव नामक एक राजा द्वारा बनवाया गया था. इसकी ढहती दीवारों में न केवल इतिहास गूंजता है, बल्कि कहीं ज़्यादा भयावह चीज़ों की भी फुसफुसाहट सुनाई देती है.

सूरज डूबने के बाद हर रात यहां फुसफुसाहटें शुरू हो जाती हैं. कहते हैं कि यह वीर खंडेराव की आत्मा यहां है, जो हमेशा अपनी भव्य पार्टियों को याद करती रहती है. मगर ये भूतिया उत्सव कोई परीकथा नहीं है, जिन लोगों ने इन भूतिया नर्तकियों को देखा है. वे कभी वापस नहीं लौट पाए.
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