Best Kadhai For Cooking: स्टील, लोहे या एल्यूमिनियम कौन सी कड़ाही है सेहत और स्वाद के लिए सबसे सेफ? जानिए

Best Kadhai For Cooking: भारतीय रसोई में कड़ाही सिर्फ एक बर्तन नहीं, बल्कि रोजमर्रा की कुकिंग का सबसे अहम साथी होती है. सब्जी भूननी हो, दाल में तड़का लगाना हो या पूरियां तलनी हों-हर काम में कड़ाही का ही सहारा लिया जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस धातु की कड़ाही में आप खाना पका रहे हैं, उसका असर सीधे आपकी सेहत और खाने की क्वालिटी पर पड़ता है? आजकल बाजार में स्टील, लोहा और एल्यूमिनियम की कड़ाहियां आसानी से मिल जाती हैं, इसलिए लोग अक्सर कंफ्यूज हो जाते हैं कि रोज के इस्तेमाल के लिए कौन सी कड़ाही बेहतर रहेगी.

पुराने समय में दादी-नानी लोहे या पीतल के बर्तन इस्तेमाल करती थीं, बाद में एल्यूमिनियम का चलन बढ़ा और अब स्टील की कड़ाही ज्यादा दिखने लगी है. हर धातु की अपनी खासियत और कुछ कमियां होती हैं, अगर सही जानकारी हो तो आप अपने किचन के लिए सबसे सुरक्षित और हेल्दी कड़ाही चुन सकते हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि स्टील, लोहे और एल्यूमिनियम की कड़ाही में क्या फर्क है और रोज खाना बनाने के लिए किसे चुनना बेहतर रहेगा.

1. स्टील की कड़ाही
स्टील की कड़ाही आजकल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली कड़ाही मानी जाती है. इसमें लगभग हर तरह का खाना आसानी से पकाया जा सकता है. स्टील की खास बात यह है कि यह खाने के स्वाद या पोषण पर कोई बुरा असर नहीं डालती. यानी जो पोषक तत्व सब्जी या दाल में मौजूद हैं, वे वैसे ही बने रहते हैं. स्टील की कड़ाही सेहत के लिहाज से सुरक्षित मानी जाती है और इसमें रिएक्शन का खतरा भी कम रहता है. खट्टी या मसालेदार चीजें भी आराम से बनाई जा सकती हैं. साफ करना भी आसान होता है और जंग लगने का डर नहीं रहता. हालांकि इसकी एक कमी यह है कि अगर तेल कम हो या आंच ज्यादा हो तो खाना चिपक सकता है. इसलिए इसमें पकाते समय थोड़ा तेल और सही तापमान का ध्यान रखना जरूरी है.

कब इस्तेमाल करें: रोज की सब्जी, दाल, हल्का फ्राई या तड़का-हर काम के लिए अच्छा विकल्प.

2. लोहे की कड़ाही
लोहे की कड़ाही को हेल्थ के नजरिये से बहुत अच्छा माना जाता है. इसमें खाना पकाने पर थोड़ी मात्रा में आयरन खाने में मिल जाता है, जिससे शरीर में आयरन की कमी कम करने में मदद मिलती है. यही वजह है कि पुराने समय में ज्यादातर घरों में लोहे की कड़ाही का इस्तेमाल होता था. लोहे की कड़ाही जल्दी गर्म हो जाती है और लंबे समय तक गर्म रहती है, इसलिए इसमें बना खाना खास स्वाद देता है. खासकर भुनी हुई सब्जी या मसालेदार डिश इसमें ज्यादा अच्छी बनती है, लेकिन इसमें कुछ सावधानियां जरूरी हैं. खट्टी चीजें जैसे टमाटर या इमली वाली सब्जी इसमें ज्यादा देर तक रखने से धातु का असर खाने में आ सकता है. लोहे की कड़ाही को ठीक से सुखाकर न रखा जाए तो जंग भी लग सकती है.

कब इस्तेमाल करें: सूखी सब्जी, भुजिया, तड़का या आयरन बढ़ाने के लिए नियमित उपयोग.

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3. एल्यूमिनियम की कड़ाही: हल्की लेकिन जोखिम वाली
एल्यूमिनियम की कड़ाही पहले लगभग हर रसोई में मिल जाती थी क्योंकि यह हल्की, सस्ती और जल्दी गर्म होने वाली होती है. इसमें खाना जल्दी पक जाता है, इसलिए कई लोग इसे सुविधाजनक मानते हैं. लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक एल्यूमिनियम के बर्तनों में रोज खाना पकाना सही नहीं माना जाता. पकाने के दौरान इसके छोटे-छोटे कण खाने में मिल सकते हैं, जो लंबे समय में शरीर के लिए नुकसानदेह हो सकते हैं.

कई स्टडीज में इसे दिमाग और शरीर से जुड़ी गंभीर बीमारियों के खतरे से जोड़ा गया है. खासतौर पर खट्टी या नमकीन चीजें एल्यूमिनियम में पकाने से ज्यादा रिएक्शन होता है. इसलिए इसे रोज के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाता.

कब बचें: रोजमर्रा की कुकिंग, खासकर खट्टी या मसालेदार चीजों के लिए.

रोज खाना पकाने के लिए कौन सी कड़ाही चुनें?
अगर रोजमर्रा की सुरक्षित और आसान कुकिंग की बात करें तो स्टील की कड़ाही सबसे संतुलित विकल्प मानी जाती है. यह टिकाऊ, साफ रखने में आसान और लगभग हर तरह के खाने के लिए उपयुक्त है, अगर आप स्वाद और आयरन का अतिरिक्त फायदा चाहते हैं तो लोहे की कड़ाही को भी किचन में जरूर रखें और सूखी या भुनी चीजों के लिए इस्तेमाल करें. एल्यूमिनियम की कड़ाही को नियमित उपयोग से बचना बेहतर माना जाता है, खासकर हेल्थ के नजरिये से.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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