इससे पहले की बीमार पड़े, इन 9 चीजों को अभी घर से निकाल दीजिए, वरना मुसीबत में आ जाएंगे

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Replace these 9 Things: हम अक्सर खाने-पीने की चीजों पर तो ‘एक्सपायरी डेट’ देख लेते हैं, लेकिन हमारे घर में ऐसी कई चीजें हैं जिनका हम रोज इस्तेमाल करते हैं और उनकी उम्र पर ध्यान ही नहीं देते. हमारे घरों में कई तरह की चीजें होती हैं जो देखने में तो अच्छे दिखते हैं लेकिन ये अंदर से बेहद खराब होते हैं और इनमें असंख्य सूक्ष्म जीव अपना घर बना लेते हैं. हम जब अनजान होकर इनका इस्तेमाल करते हैं तो ये हमें मुफ्त में बीमारियां दे देती है.

हम सभी के घरों में ऐसी कई चीज़ें होती हैं, जिनका हम रोज़ाना इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उनकी उम्र या हालत पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते. किचन के सामान से लेकर पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स तक, इनमें से कई चीज़ें चुपचाप घिस जाती हैं, उनमें बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं या उनकी असर करने की क्षमता कम हो जाती है. लेकिन हमें इसका पता भी नहीं चलता. समस्या यह है कि खाने-पीने की चीज़ों की तरह रोज़मर्रा के इस्तेमाल की वस्तुओं पर अक्सर एक्सपायरी डेट नहीं लिखी होती. ऐसे में हम उन्हें ज़रूरत से ज़्यादा समय तक इस्तेमाल करते रहते हैं, जिससे साफ़-सफाई, सेहत और कामकाज की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है. इन सबका परिणाम यह होता है हमें मुफ्त में बीमारियां मिलती. आगे हम ऐसी ही कुछ चौंकाने वाली चीज़ों के बारे में जानेंगे, जिन्हें नियमित रूप से बदलना ज़रूरी है और जिनका समय पर नवीनीकरण आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बड़ा फर्क ला सकता है. (Image: Pexels)

उदाहरण के तौर पर अपना टूथब्रश को ही ले लीजिए. अक्सर डेंटिस्ट सलाह देते हैं कि टूथब्रश हर तीन महीने में बदल देना चाहिए, लेकिन ज़्यादातर लोग उसे तब तक इस्तेमाल करते रहते हैं, जब तक उसके ब्रिसल्स पूरी तरह खराब न हो जाएं. समय के साथ टूथब्रश दांतों को सही तरह से साफ़ नहीं कर पाता और घिसे हुए ब्रिसल्स मसूड़ों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं. इतना ही नहीं, रोज़ इस्तेमाल के कारण उसमें बैक्टीरिया भी जमा हो जाते हैं. इसलिए नियमित रूप से टूथब्रश बदलना अच्छी ओरल हाइजीन बनाए रखने का सबसे आसान तरीका है. (Image: Pexels)

किचन में इस्तेमाल होने वाले स्पंज भी एक बड़ी समस्या हो सकते हैं. देखने में वे भले ही बेकार न लगें, लेकिन स्पंज में नमी बनी रहती है और खाने के कण उसमें फंस जाते हैं, जिससे वे बैक्टीरिया पनपने की जगह बन जाते हैं. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि स्पंज को हर एक या दो हफ्ते में बदल देना चाहिए, या कम से कम उसे बार-बार अच्छी तरह साफ़ और सैनिटाइज़ करना चाहिए. महीनों तक एक ही स्पंज का इस्तेमाल करने से बर्तन और किचन की सतहों पर कीटाणु फैल सकते हैं, जिससे सफ़ाई का मकसद ही पूरा नहीं होता. (Image: Pexels)

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तकिए की सफाई को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिए जाते हैं, जबकि अच्छी नींद और सेहत में उनकी अहम भूमिका होती है. समय के साथ तकिए अपनी बनावट और सहारा देने की क्षमता खो देते हैं, जिससे गर्दन में दर्द और बेचैन नींद की समस्या हो सकती है. इनमें धूल के कण, पसीना और एलर्जी पैदा करने वाले तत्व भी जमा हो जाते हैं. ज़्यादातर स्लीप एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि तकियों को हर एक से दो साल में बदल देना चाहिए. नया तकिया न सिर्फ़ आराम बढ़ाता है, बल्कि एलर्जी के जोखिम को भी कम करता है. इसलिए समय के साथ तकिए को बदलते रहिए. (Image: Pexels)

रीयूज़ेबल पानी की बोतलें पर्यावरण के लिहाज़ से काफ़ी लोकप्रिय हैं, लेकिन इन पर भी ध्यान देना ज़रूरी होता है. अगर आप इसे रेगुलर धोते भी है तो भी बोतलों के ढक्कन, स्ट्रॉ या अन्य छिपी हुई जगहों पर फफूंद और बैक्टीरिया पनप सकते हैं. इसलिए समय होने पर बोतल बदल दें. यह कब बदलें यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस तरह से बना है. ऐसे में हर एक या दो साल में बोतल ो बदल देना चाहिए. ख़ासकर अगर उसमें बदबू आने लगे या रंग बदलने लगे. शरीर को हाइड्रेट रखना ज़रूरी है, लेकिन सुरक्षित तरीके से हाइड्रेशन बनाए रखना उससे भी ज़्यादा अहम है. (Image: Pexels)

लकड़ी के कटिंग बोर्ड, रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली ऐसी चीज़ें हैं जिन्हें अनिश्चित समय तक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. चाकू के निशान और खरोंच छोटे-छोटे गड्ढे बना देते हैं, जिनमें बैक्टीरिया आसानी से पनप सकते हैं. प्लास्टिक के कटिंग बोर्ड भी समय के साथ मुड़ सकते हैं या उनमें दरारें पड़ सकती हैं. इसलिए हर कुछ साल में, या अगर उन पर गहरे कट दिखाई देने लगें तो उससे पहले ही कटिंग बोर्ड बदल देना चाहिए ताकि कोई मुसीबत न आ जाए. (Image: Pexels)

बाथ टॉवल्स यानी तोलिया वाश के बाद ताजगी महसूस कराता है लेकिन समय के साथ उनकी सोखने की क्षमता और मुलायमपन कम हो जाता है. इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण यह है कि अगर इन्हें ठीक से सुखाया न जाए तो ये बैक्टीरिया और फफूंदी जमा कर लेते हैं. एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि टॉवल्स को हर दो से तीन साल में बदल देना चाहिए. नए टॉवल्स न सिर्फ़ नहाने के अनुभव को बेहतर बनाता है, बल्कि साफ़-सफाई और हाइजीन को भी सुनिश्चित करता है. (Image: Pexels)

ईयरबड्स और हेडफ़ोन आजकल हम अक्सर रोज़ाना इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग उन्हें बदलने के बारे में सोचते हैं. जब तक यह पूरी तरह से घिस न जाए तब तक हम नहीं छोड़ते. ऐसे घिसे हुए ईयरबड्स में कान का मवाद और बैक्टीरिया भी जमा हो सकते हैं, जिससे कान में इंफेक्शन हो सकता है. ईयरबड्स को साफ़ करना मदद करता है, लेकिन हर दो साल में इन्हें बदलने से बेहतर ध्वनि गुणवत्ता और हाइजीन सुनिश्चित होती है. (Image: Pexels)

नॉन-स्टिक कुकवेयर भी ऐसी चीज़ों में से है जो धीरे-धीरे खराब हो जाती है. समय के साथ इसकी कोटिंग छिल सकती है या खराब हो सकती है, जिससे खाना में हानिकारक कण मिल सकते हैं. अगर आपके पैन पर खरोंचें हैं या नॉन-स्टिक सतह खो रही है, तो उन्हें बदलने का समय आ गया है. उच्च गुणवत्ता वाले कुकवेयर अधिक समय तक टिक सकते हैं, लेकिन सबसे अच्छे पैन भी अंततः नए की ज़रूरत महसूस करते हैं. इसलिए खराब होने से पहले इसे बदल लें. (Image: Pexels)

स्किन को साफ करने वाला लूफ़ा और बाथ स्पंज अपने पोर्स वालीबनावट के कारण बैक्टीरिया को पकड़ने के लिए कुख्यात हैं. यानी इन पोर्स में बैक्टीरिया या फफूंद आसानी से अपना घर बना लेते हैं. इसलिए इन्हें हर एक से दो महीने में बदल देना चाहिए, क्योंकि नियमित धोने के बावजूद ये जल्दी अस्वच्छ हो जाते हैं. नए स्पंज या लूफ़ा इस्तेमाल करने से आपकी स्किनकेयर रूटीन सुरक्षित और प्रभावी बनी रहती है. (Image: Pexels)

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